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Budget 2020: 10 लाख रुपये से ज्यादा की आमदनी पर मिलेगी टैक्स छूट? FICCI ने दिये ये सुझाव

Budget 2020 expectations: फिक्की का कहना है कि भारत के मुकाबले अन्य देशों में उच्चतम टैक्स रेट के लिए आय सीमा अधिक है.

December 17, 2019 6:07 PM
Budget 2020 expectations: FICCI recommends Individuals earning over Rs 10 lakh should get Income Tax reliefफिक्की का कहना है कि भारत के मुकाबले अन्य देशों में उच्चतम टैक्स रेट के लिए आय सीमा अधिक है.

Budget 2020 India expectations: केंद्र सरकार को 30 फीसदी की उच्चतर दर से आयकर उन व्यक्तिगत करदाताओं से वसूलना चाहिए, जिनकी सालाना इनकम 20 लाख रुपये से अधिक हो. फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्‍बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्‍ट्री (FICCI) ने यह सुझाव दिए हैं. मौजूदा आयकर नियमों के अनुसार, 10 लाख रुपये ज्यादा की सालाना आमदनी पर 30 फीसदी की दर से टैक्स देना पड़ता है.

उद्योग संगठन फिक्की का कहना है कि भारत के मुकाबले अन्य देशों में उच्चतम टैक्स रेट के लिए आय सीमा अधिक है. भारत में आयकर उच्चतम टैक्स रेेट के लिए आय सीमा बढ़ाने की जरूरत है. फिक्की ने अपनी ‘Focus areas for Union Budget 2020-21 – Taxation Issues’ रिपोर्ट में कहा है कि टैक्स रेट अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होना चाहिए.

5 लाख तक की आय हो कर मुक्‍त

प्री-बजट 2020-21 उम्मीदों में फिक्की ने सुझाव दिया कि व्यक्तिगत करदाताओं के लिए टैक्स स्लैब में भी बदलाव होना चाहिए. उद्योग संगठन का कहना है कि केंद्र सरकार को 5 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी पर आयकर नहीं लेना चाहिए. 5 से 10 लाख सालाना आमदनी पर 10 फीसदी और 10 से 20 लाख रुपये सालाना आय पर 20 फीसदी और 20 लाख से ज्यादा की आय पर 30 फीसदी की दर आयकर वसूलना चाहिए.

फिलहाल, व्यक्तिगत करदाताओं के लिए 2.5 लाख रुपये तक की सालाना आय कर मुक्त है. 2.5 लाख से 5 लाख की सालाना आमदनी पर 5 फीसदी की दर आयकर देयता है. वहीं, 5 लाख से 10 लाख रुपये की सालाना पर आयकर दर 20 फीसदी और 10 लाख रुपये से अधिक सालाना आमदनी पर 30 फीसदी की दर से कर देना पड़ता है.

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रेट घटने से करदाता के पास ज्‍यादा कैश

फिक्की का कहना है कि बजट 2019 में मौजूदा आयकर स्लैब और टैक्स रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ. हालांकि वित्त (No. 1) विधेयक 2019 में टैक्स रिटेब की लिमिट बढ़ाकर 12,500 रुपये कर दी गई. इसके प्रभावी होने से 5 लाख रुये तक की आमदनी पर कर देयता शून्य हो गई.

उद्योग संगठन का कहना है कि भारत के मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए आयकर दर में कटौती से डिस्पोजल इनकम यानी लोगों के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे बचेंगे. इससे खपत को बढ़ावा मिलेगा और इससे वस्तुओं और सेवाओं की मांग में इजाफा होगा.

 

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