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Budget 2019 Expectation: कारोबार-बाजार, करदाता और किसान, क्या मोदी पूरी कर पाएंगे सबकी उम्मीदें?

टैक्‍सपेयर्स, इंडस्‍ट्री, युवाओं, किसानों से लेकर आम आदमी की नजर इस बजट पर है.

Updated: Jan 31, 2019 3:56 PM
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1 फरवरी को मोदी सरकार के पहले कार्यकाल का आखिरी Budget पेश होगा. यह अंतरिम बजट होगा. आमतौर पर अंतरिम बजट अगले 2 से 3 महीने होने वाले खर्च को ध्यान में रखकर पेश किया जाता है. लेकिन, इस बार ऐसा माना जा रहा है कि यह अंतरिम बजट इससे पहले पेश किए गए अंतरिम बजट से अलग होगा.

आम चुनाव 2019 में मोदी सरकार की साख दांव पर है, दूसरी ओर पूरा विपक्ष लामबंद होकर मोदी सराकर को हटाने की हर मुमकिन कोशिश में लगा है. ऐसे में यह बजट जितना आम आदमी के लिए खास है उतना ही महत्वपूर्ण यह मोदी सरकार और खुद पीएम मोदी के लिए भी है. बहरहा, इंडस्ट्री से लेकर बाजार तक और करदाताओं से लेकर किसान और युवाओं तक सभी की नजर मोदी सरकार के इस चुनावी बजट पर टिकी है.

एक्सपर्ट मान रहे हैं कि पिछले दिनों 3 बड़े राज्यों में BJP के चुनाव हारने के बाद इस अंतरिम बजट की अहमियत बढ़ गई है. ​निश्चित तौर पर यह बजट पॉपुलिस्ट होगा, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को खुश किया जा सके. हाल ही में सरकार की ओर से भी ऐसे संकेत मिले थे कि यह अंतरिम  बजट कुछ अलग ही होगा. ऐसे में उम्मीदें और ज्यादा बढ़ गई हैं. फाइनेंशियल एक्सप्रेस हिंदी ऑनलाइन ने भी इसे लेकर अलग-अलग सेक्टर से जुड़े लोगों से बात की है. जानते हैं कि बजट 2019 से लोगों की उम्मीदें.

टैक्स पेयर्स

#80सी की लिमिट बढ़े

बैंक बाजार डॉट कॉम के सीईओ आदिल शेट्ठी का कहना है कि अभी 80सी के तहत टैक्स बचाने की सीमा 1.5 लाख से बढ़ाकर 2-2.5 लाख रुपये की जानी चाहिए. इससे फाइनेशिलय एसेट्स में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा. क्लियर टैक्स के सीईओ अर्चित गुप्ता का कहना है कि धारा 80सी के तहत निवेश सीमा को केंद्रीय बजट 2014-15 में संशोधित किया गया था और 1 लाख से रुपए से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये किया गया था. बढ़ता इनकम लेवल और बढ़ती महंगाई दर के साथ यह राशि अब टैक्स सेविंग के लिए पर्याप्त नहीं है. उम्मीद है कि छूट की सीमा 2 लाख होगी.

#टैक्स छूट की सीमा में बदलाव

आदिल शेट्ठी का कहना है कि टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाई जानी चाहिए. पिछले बजट में सरकार ने 2.5 लाख से 5 लाख रुपये की इनकम पर टैक्स स्लैबर 10 फीसदी से घटकर 5 फीसदी किया था. इसके बाद 5 लाख से 10 लाख के इनकम स्लैब में टैक्स रेट 5 फीसदी से सीधे 20 फीसदी है.

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#हाउसिंग लोन

आदिल शेट्ठी का कहना है कि सरकार को हाउसिंग लोन खासकर महानगरों के लिए टैक्स डिडक्शन लिमिट को मौजूदा 2 लाख से बढ़ाकर 4 लाख रुपये की जानी चाहिए. अर्चित गुप्ता के अनुसार, सिर्फ 2 लाख रुपये तक के ब्याज कम्पोनेंट पर छूट अब पर्याप्त नहीं हैं. घर खरीदने वाले कम से कम 2.5 लाख रुपये तक के ब्याज भुगतान पर छूट मिलने की उम्मीद कर रहे हैं. पर्सनल टैक्सपेयर्स 50,000 रुपए के अतिरिक्त लाभ की उम्मीद कर रहे हैं.

किसान

कृषि विशेषज्ञ देवेंदर शर्मा का कहना है कि बजट 2019 में केंद्र सरकार किसानों को ब्याज मुक्त कर्ज देने पर विचार कर सकती है. तेलंगाना का उदाहरण देते हुए कहा कि जिनके पास खुद की कृषि योग्य भूमि नहीं है उन्हें भी इनकम सोर्स दिया जाए. जिन किसानों की कर्जमाफी हो गई है, उन्हें तो राहत मिल गई है लेकिन जिनकी नहीं हुई है उन्हें प्रति परिवार 50 हजार रुपये की राहत दी जाए.

किसानों के लिए एक इनकम कमीशन का गठन किया जाए. यह किसानों के लिए न्यूनतम इनकम की राशि का निर्धारण करेगा. किसानों की न्यूनतम आय 18 हजार रुपये प्रति माह निर्धारित की जाए. मण्डी पर अधिक से अधिक से निवेश की जरूरत है.

इंडस्ट्री 

#कॉरपोरेट टैक्स घटे

इंडस्ट्री बॉडी पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री को उम्मीद है कि बजट में डायरेक्ट टैक्सेज के रेशनलाइजेशन को लेकर कदम उठाए जाएंगे. इसमें कॉरपोरेट टैक्स को घटाकर 25 फीसदी पर लाया जाना अहम रहेगा. 3.5 लाख रुपये तक की इनकम को टैक्स से छूट दी जाए, मैक्सिमम मार्जिनल स्लैब 10 लाख से बढ़कर 15 लाख हो.

#इंश्योरेंस सेक्टर

एसबीआई जनरल इंश्योरेंस के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर रिखिल शाह के अनुसार बजट 2019 इंश्योरेंस सेक्टर के लिए अच्छा साबित होने की उम्मीद है. अनुमान है कि सरकार कुछ टैक्स छूट दे सकती है. फार्मा और या हेल्थकेयर इंडस्ट्रीज के लिए कुछ रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क लागू होने की भी उम्मीद है.

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#हेल्थकेयर

एसोसिएशन ऑफ मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री के फोरम को-ऑर्डिनेटर राजीव नाथ का कहना है कि इंपोर्ट होने वाले मेडिकल डिवाइसेज पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर 15 फीसदी की जाए. अभी विदेशी कंपनियां औने—पौने कीमत पर सस्ता माल बेचकर पूरे बाजार पर कब्जा जमा चुकी हैं. लेकिन ड्यूटी बढ़ने से वे ऐसा नहीं कर पाएंगी. इससे घरेलू इंडस्ट्र को रेवेन्यू बढ़ाने में मदद मिलेगी.

#फार्मा इंडस्ट्री

इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के एक मेंबर ने नाम न लिखने की शर्त पर कहा कि सरकार को दवाओं पर जीएसटी हटाना चाहिए या 5 फीसदी ब्रैकेट में लाना चाहिए. दवाओं पर 12 फीसदी जीएसटी होने से इनकी कीमत बढ़ जाती है. जीएसटी न होने से मैन्युुैक्चरर को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिल पाएगा.

#टेक्सटाइल

फिलाटेक्स इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन व उमडी मधु सुधन भागेरिया का कहना है कि बजट में हमें उम्मीद है कि पॉलिएस्टर फिलामेंट यार्न और पालिएस्टर स्टेपल फाइबर पर कस्टम ड्यूटी 5 फीसदी से ब्ढ़ाकर 10 फीसदी किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट टैकस अभी सभी सरचार्ज के बाद 35 फीसदी है, जिसे घटाकर 25 फीसदी किया जाना चाहिए.

#MSME

एक्सपोर्टर्सइंडियाडॉटकॉम के वाइस प्रेसिडेंट व सीओओ अंकित गुप्ता के मुताबिक बजट 2019 में वर्किंग कैपिटल के ब्लॉकेज दूर करने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं. लोन आसानी से उपलब्ध कराने की दिशा में घोषणा हो सकती है. टैक्स रेट घट सकते हैं.

कैपिटल मार्केट 

कैपिटल मार्केट, सरकार से शेयरों पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स यानी LTCG का रिव्यू किए जाने की मांग कर रहा है. इसके अलावा डेट म्यूचुअल फंड्स को टैक्स सेविंग्स स्कीम की तरह बनाए जाने की मांग हो रही है. डेट म्यूचुअल फंड्स को टैक्स इंसेंटिव मिलने से बॉन्ड मार्केट में इनवेस्टमेंट फ्लो बढ़ेगा.

कैपिटल मार्केट के एक एक्सपर्ट ने नाम न लेने की शर्त पर बताया कि पिछले साल के बजट में 10% लांग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स यानी LTCG लगने के बाद स्टॉक्स या इक्विटी फंड्स को लंबे समय तक होल्ड करने वाले निवेशकों को मोटा टैक्स देना होता है. सरकार पहले ही एसटीटी वसूलती है, कैपिटल गेंस टैक्स की जगह लाया गया था. इसलिए LTCG टैक्स खत्म किया जाना चाहिए.बैंक बाजार डॉट कॉम के सीईओ आदिल शेट्ठी का भी कहना है कि छोटे निवेशकों के हितों को ध्यान में रखकर सरकार को LTCG टैक्स रिवाइज करना चाहिए.

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#डेट MF को सेविंग्स स्कीम जैसा बनाया जाए

BPN फिनकैप के डायरेक्‍टर एके निगम का कहना है कि सरकार डेट म्यूचुअल फंड कैटेगरी को सेक्शन 80सी में डाले, जिसके तहत आनेवाले कुछ प्रॉडक्ट्स में इनवेस्टमेंट के जरिए इंडिविजुअल्स को टैक्स बचाने में मदद मिले. अभी सिर्फ म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स प्लांस, PPF, 5 साल के बैंक डिपॉजिट और नेशनल सेविंग्स स्कीम सेक्शन 80 सी के तहत आते हैं.

रियल एस्टेट 

रियल एस्टेट क्षेत्र ने सरकार से बजट-2019 में करों में सुधार, स्टाम्प ड्यूटी को जीएसटी में समाहित करने और मकान खरीदने वालों द्वारा होम लोन पर चुकाए गए ब्याज पर कर कटौती की सीमा बढ़ाने की सिफारिश की है. रियल एस्टेट क्षेत्र के संगठन नारेडको के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने पर्सनल इनकम टैक्स में होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट को सालाना 2 लाख से बढ़ाकर 3 लाख किए जाने की मांग की है.

 

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