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Budget 2019: छोटे कारोबारी क्या चाहते हैं? PM मोदी से सस्ता कर्ज, बीमा, पेंशन समेत कई रियायतों की डिमांड

देश के छोटे कारोबारियों ने बजट को लेकर अपनी डिमांड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी है.

Updated: Jan 31, 2019 3:58 PM
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देश के छोटे कारोबारियों ने Budget को लेकर अपनी डिमांड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी है. ट्रेडर्स के संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने बुधवार को पीएम मोदी से एक्सीडेंटल इंश्योरेंस कवरेज, सस्ता कर्ज और GST स्लैब में बदलाव समेत कई सुविधाओं के इन्सेंटिव पैकेज की डिमांड की है. CAIT का कहना है कि देश में छोटे व्यापारियों के व्यापार को और अधिक सरल बनाने व व्यापार करने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए आगामी बजट में या उससे पूर्व यह पैकेज कारोबारियों को दिया जाए.

व्यापारी चाहते हैं 10 लाख का दुर्घटना बीमा

CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा है कि जीएसटी में रजिस्टर्ड प्रत्येक व्यापारी का 10 लाख रुपये तक का एक्सीडेंटल इंश्योरेंस सरकार कराए. जैसाकि उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के व्यापारियों के लिया किया है. व्यापारियों को अधिक से अ​धिक डिजिटल बनाने के लिए कम्प्यूटर एवं उससे जुड़े सामानों की खरीददारी पर उन्हें सब्सिडी दी जाए. बता दें, देश में अभी तक केवल 35 फीसदी व्यापारी ही अपने व्यापार में कम्प्यूटर का उपयोग करते हैं जबकि सरकार के पूर्ण डिजिटल हो जाने के कारण बाकी के 65 फीसदी व्यापारियों को कंप्यूटर से जोड़ना आवश्यक है.

रजिस्टर्ड व्यापारियों के लिए आए पेंशन स्कीम

खंडेलवाल ने पीएम मोदी को भेजे अपने ज्ञापन में कहा है कि जीएसटी में रजिस्टर्ड सभी व्यापारियों के लिए सरकार एक पेंशन स्कीम लागू करे वहीँ जीएसटी को और अधिक सरल बनाया जाए तथा देश भर में लगने वाले मंडी टैक्स एवं जम्मू में लगने वाले टोल टैक्स को समाप्त किया जाए.

जीएसटी में 18 फीसदी टैक्स रेट को खत्म किया जाए और 28 फीसदी टैकस रेट के दायरे में विलासिता से जुड़ी वस्तुएं ही रखी जाएं. इस टैकस रेट में से ऑटो पार्ट्स, सीमेंट आदि को निकाल कर 12 फीसदी स्लैब में रखा जाए एवं अन्य सभी टैक्स रेट में शामिल की गई वस्तुओं की एक बार नए सिरे से समीक्षा की जाए तथा रॉ मटेरियल के रूप में प्रयुक्त होने वाली वस्तुओं एवं गरीब वर्ग के प्रयोग की वस्तुओं को 5 फीसदी टैक्स रेट में रखा जाए.

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नेशनल ट्रेड पॉलिसी और ई-कॉमर्स पॉलिसी लाए सरकार

कैट का कहना है कि देश के रिटेल व्यापार के लिए एक नेशनल ट्रेड पॉलिसी (राष्ट्रीय व्यापार नीति) बनाई जाए और घरेलू व्यापार की देख रेख के लिए एक आंतरिक व्यापार मंत्रालय बनाया जाए. एक लम्बे समय से लंबित ई-कॉमर्स पालिसी को तुरंत लागू किया जाए. साथ ही एक निष्पक्ष एवं पारदर्शी ई-कॉमर्स पोर्टल खोलने में सरकार व्यापारियों की मदद करे. ई-कॉमर्स व्यापार को संचालित करने के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाए वहीँ रिटेल व्यापार को संचालित करने के लिए एक रिटेल रेगुलेटरी अथॉरिटी का भी गठन किया जाए.

मिले सस्ता कर्ज, मुद्रा योजना में खत्म हो बैंक का रोल

खंडेलवाल ने कहा है कि व्यापारियों को रियायती ब्याज दर पर बैंकों से कर्ज मिलना चाहिए. अभी तक केवल 5 फीसदी व्यापारी ही बैंक अथवा वित्तीय संस्थानों से कर्ज ले पाते हैं, जबकि बचे 95 फीसदी व्यापारी अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए या तो निजी कर्जदाता, रिश्तेदार अथवा अपने निजी स्रोतों पर ही निर्भर रहते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि रियायती ब्याज दर पर कर्ज की सुविधा व्यापारियों के कर्मचारियों को भी मिलनी चाहिए.

खंडेलवाल ने यह भी आग्रह किया की मुद्रा योजना में बैंकों का सीधा रोल समाप्त किया जाए और नॉन बैंकिंग फाइनेंस कम्पनी एवं माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशन के जरिए लोगों को लोन लिया जाए तथा प्राइवेट मनीलेंडर को रजिस्टर्ड कर उनके द्वारा भी कर्ज दिया जाए वहीँ बैंक इन संस्थानों को रियायती दर पर कर्ज दें.

ट्रेड प्रमोशन कॉउन्सिल का गठन हो

कैट ने यह भी आग्रह किया है की देश के घरेलू व्यापार को बढ़ावा देने एवं उसे व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए सरकार एक ट्रेड प्रमोशन काउंसिल का गठन करे जो सरकार एवं व्यापारियों के बीच एक सेतु का काम करे.

डेबिट या क्रेडिट कार्ड के उपयोग पर शुल्क खत्म हो

कैट का कहना है कि व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सभी प्रकार के डेबिट अथवा क्रेडिट कार्ड के उपयोग पर कोई शुल्क नहीं लगाना चाहिए. अभी बैंक 1 फीसदी से 2 फीसदी का शुल्क लगाते हैं. डिजिटल भुगतान का उपयोग करने पर टैक्स छूट और अन्य अनेक प्रकार के लाभ दिए जाएं.  वहीं, देश में महिला कारोबारियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष महिला उद्यमी योजना चलाई जानी चाहिए.

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रिटेल सेक्टर का आर्थिक-सामाजिक सर्वे हो

देश में करीब 7 करोड़ छोटे व्यवसायी हैं जो लगभग 30 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं. साथ ही हर साल करीब 42 लाख करोड़ रुपये का व्यापार करते हैं. कैट ने प्रधानमंत्री से कहा है कि रिटेल सेक्टर की फाइनेंशियल और सामाजिक स्थिति पर देश भर में एक सर्वे कार्य जाए तथा सर्वे रिपोर्ट के आधार पर व्यापारियों के लिए नीतियां एवं योजनाएं बनाई जाएं.

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