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Budget 2019: चुनावी घोषणाओं से गड़बड़ा सकता है मोदी सरकार का वित्तीय गणित

अंतरिम बजट पेश होने में अब एक महीने से भी कम समय बचा है और तीन प्रमुख राज्यों में हालिया विधानसभा चुनाव में हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं.

January 11, 2019 1:15 PM
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Budget 2019: चुनावी साल में केंद्र सरकार के सामने अंतरिम बजट में लोकलुभावन घोषणाएं करने का दबाव रहता है. इसके जरिए वह अपनी वापसी सुनिश्चित करना चाहती है. अंतरिम बजट पेश होने में अब एक महीने से भी कम समय बचा है और तीन प्रमुख राज्यों में हालिया विधानसभा चुनाव में हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. केंद्र सरकार पर इस बात के लिए दबाव बढ़ रहा है कि वह किसानों को तुरंत कैश बेनेफिट दे और करदाताओं को भी छूट उपलब्ध कराए. हालांकि, इसके चक्कर में राजकोषीय गणित भी डांवाडोल हो रहा है. निर्मल बैंग इक्विटीज प्राइवेट और कोटक सिक्योरिटीज लिमिटेड ने अनुमान लगाया है कि इस वित्त वर्ष 2018-19 में वित्तीय घाटा जीडीपी के 3.5 फीसदी तक पहुंच सकता है. केंद्र सरकार ने इसका लक्ष्य 3.3 फीसदी निर्धारित किया था.

पहली छमाही ही पार कर चुका है लक्ष्य

केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2018-19 के लिए चालू खाते के घाटे का जो लक्ष्य निर्धारित किया, उसे पहली ही छमाही में पार कर दिया था. पहली छमाही अप्रैल से अक्टूबर की अवधि में चालू खाते का घाटा 6.49 लाख करोड़ रुपये हो गया था जो पूरे साल के लिए निर्धारित लक्ष्य 6.24 लाख करोड़ का 103.9 फीसदी था. इसकी मुख्य वजह इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में बड़ी गिरावट और एसेट बिक्री से प्राप्त रेवेन्यू व सरकारी कंपनियों की ओर से दिए गए लाभांश में कमी रही. इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 96.1 फीसदी था.

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GST और दिवालिया कानून से बढ़ी थी रेटिंग

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने जीएसटी और दिवालिया कानून लागू होने की वजह से 2017 में भारत की रेटिंग बढ़ाई थी. मूडीज का मानना था कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतर होगी. मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस में सीनियर क्रेडिट ऑफिसर विलियम फोस्टर का कहना है कि किसानों पर डायरेक्ट बेनफिट स्कीम (DBT) के तहत खर्च बढ़ाने पर चालू खाते के घाटे का लक्ष्य हासिल करना बहुत मुश्किल हो जाएगा. फोस्टर के मुताबिक, केंद्र सरकार के पास इस समय राजस्व बढ़ाने के लिए सीमित विकल्प ही है जिसके कारण चुनौतियां बढ़ गई हैं.

DBT से घट सकती है सब्सिडी

निर्मल बैंग के एक अर्थशास्त्री टेरेसा जॉन का कहना है कि इस वित्तीय वर्ष में किसानों को सरकारी भुगतान मिल पाना मुश्किल है. उनका अनुमान है कि किसानों को किए गए भुगतान पर करीब 2 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा जो जीडीपी का करीब 1.2 फीसदी है. जॉन का कहना है कि इसका पूरा भार केंद्र पर नहीं पड़ेगा क्योंकि इसका कुछ हिस्सा राज्यों को भी वहन करना पड़ सकता है जिसके कारण केंद्र पर जीडीपी के करीब 0.5 फीसदी के बराबर 1 लाख करोड़ रुपये का ही भार पड़ेगा. हालांकि DBT योजना से हालिया खाद्य और खाद सब्सिडी पर फर्क पड़ सकता है. उन्होंने संभावना जताई है कि अगले वित्तीय वर्ष में चालू खाते का घाटा 3.5 फीसदी रह सकता है.

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RBI दे सकता है सहारा

आरबीआई इस मसले पर सरकार का सहारा बन सकता है. आरबीआई बोर्ड की पूर्व सदस्य इंदिरा राजारमन ने राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण के लिए सरकार को सुझाव दिया है. राजारमन के मुताबिक, अगर आरबीआई सरकार को अंतरिम लाभांश देती है तो ही केंद्र सरकार अपने अतिरिक्त खर्चों का भार वहन कर सकती है और राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.3 फीसदी से कुछ ही अधिक तक होगा.

कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (CAG) ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकारी बैंकों और कंपनियों को दिए जाने बेल आउट पैकेज पर अपना आंकड़ा सार्वजनिक करे. इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा.

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