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Budget 2019: आम आदमी पर कैसे असर डालता है बजट? डिटेल में समझिए

बजट में अगले वित्त वर्ष में सरकार द्वारा किए जाने वाले खर्च के साथ इकोनॉमी को मजबूती देने वाली घोषणाएं और प्रावधान भी किए जाएंगे.

Updated: Jan 31, 2019 4:18 PM

Budget 2019 how does union budget affect common man

वित्त मंत्री अरुण जेटली 1 फरवरी को 2019-20 के लिए अंतरिम बजट पेश करेंगे. बजट में अगले वित्त वर्ष में सरकार द्वारा किए जाने वाले खर्च के साथ इकोनॉमी को मजबूती देने वाली घोषणाएं और प्रावधान भी किए जाएंगे. इनमें से कई घोषणाएं देश के आम आदमी पर सीधा असर डालती हैं. कुछ के चलते उन्हें राहत मिलती है तो कुछ उनके बजट को गड़बड़ा भी सकती हैं. कैसे, आइए बताते हैं-

इनकम टैक्स व अन्य टैक्स

बजट में आम लोगों से जुड़ी घोषणाओं में सबसे पहला नाम आता है इनकम टैक्स का. बजट में ही सरकार यह तय करती है कि आगे के वित्त वर्ष के लिए जनता को इनकम की कितनी लिमिट तक टैक्स से छूट मिलेगी. इसके अलावा अब किसी चीज पर टैक्स बिल्कुल नहीं लगेगा या ज्यादा लगेगा, ​टैक्स के दायरे में कौन सा नया इन्वेस्टमेंट, सर्विस या खरीदारी आदि आएगी या इनमें से किस पर टैक्स छूट ​की लिमिट बढ़ाई जाएगी, किसे टैक्स छूट से बाहर किया जाएगा आदि मामलों पर निर्णय बजट में ही लिए जाते हैं.

उदाहरण के लिए पिछले बजट में सरकार ने इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया था. वहीं सीनियर सिटीजंस के लिए 50,000 रुपये तक की इंटरेस्‍ट इनकम को टैक्‍स फ्री कर दिया था. पहले यह सीमा 10,000 रुपये थी. इसके अलावा सीनियर सिटीजंस के लिए मेडिकल खर्च पर टैक्स छूट की सीमा को भी बढ़ाकर 50,000 रुपये तक कर दिया था. सैलरीड क्‍लास के लिए ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल रीइम्‍बर्समेंट पर टैक्‍स छूट खत्म कर दी थी और इसकी जगह 40000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन लागू कर दिया था.

नई स्कीम लाया जाना

आम लोगों के हित को ध्यान में रखते हुए सरकार नई स्कीम्स की घोषणा भी बजट में करती है. उदाहरण के लिए पिछले साल के बजट में देश के 10 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपये तक का हेल्थ इंश्योरेंस उपलब्ध कराने वाली आयुष्मान भारत योजना की घोषणा की गई. इसके लिए 1200 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दी गई. इसके चलते यह सरकार द्वारा फंडेड अभी तक की सबसे बड़ी स्कीम है.

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सेस, ड्यूटी और सेल्स टैक्स

यदि बजट में सरकार किसी चीज पर एक्साइज ड्यूटी, कस्टम ड्यूटी, इंपोर्ट ड्यूटी, सेस बढ़ाती या घटाती है, तो इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ता है. प्रोडक्ट पर ड्यूटीज अधिक लगने के कारण मैन्युफैक्चरर उसे महंगा कर देंगे, उसकी वजह से कंज्यूमर को प्रोडक्ट अधिक कीमत पर मिलेगा. वहीं कम ड्यूटी के चलते प्रोडक्ट सस्ता हो जाएगा और कंज्यूमर को कम कीमत देनी होगी. सेस के मामले में भी ऐसा ही है.

नए वित्त वर्ष में किस चीज पर सेस की सीमा कितनी रहेगी, कोई नया सेस जोड़ा जाए या कोई सेस खत्म किया जाए, इस सब का भी लोगों की जेब पर सीधा असर होता है.

पिछले बजट में सरकार ने इंपोर्टेड मोबाइल फोन, कार, बाइक, इडिबिल ऑयल आदि पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी थी. पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्‍साइज ड्यूटी 2 रुपये और अतिरिक्‍त एक्‍साइज ड्यूटी को 6 रुपये घटा दिया गया था, वहीं दूसरी ओर 8 रुपये प्रति लीटर का रोड सेस लागू कर दिया था. इसके अलावा हेल्थ, एजुकेशन सेस बढ़ाकर 4 फीसदी कर दिया था.

इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट पर कोई नियम

यदि सरकार ने इंपोर्ट या फिर एक्सपोर्ट से जुड़ा कोई नया नियम लागू कर दिया, तो वह भी महंगाई पर सीधा असर डालेगा. बजट में किसी प्रोडक्ट के एक्सपोर्ट को बैन करने या फिर एक निश्चित सीमा से अधिक एक्सपोर्ट या इंपोर्ट न करने का नियम लागू किया जा सकता है.

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रेलवे मालभाड़ा

यदि रेलवे का मालभाड़ा शुल्क बढ़ता है, तो किसी भी सामान के ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा बढ़ जाएगा. यह बढ़ा हुआ खर्च आम जनता से ही वसूला जाएगा. ट्रांसपोर्टेशन चार्ज बढ़ने की वजह से यह होगा कि प्रोडक्ट की कीमतें भी बढ़ जाएंगी और महंगाई को बढ़ाने का काम करेंगी.

शिक्षा, इंफ्रा आदि को लेकर हुई घोषणाएं

बजट में शिक्षा और देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भी घोषणाएं की जाती हैं. शिक्षा के क्षेत्र की घोषणाएं बच्चों के भविष्य को संवारकर​ उन्हें एक अच्छा जीवन जीने में मदद करने के लिए होती हैं. वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सड़क, घर, हॉस्पिटल, रेल की पटरी, बिजली के टावर आदि को लेकर की गई घोषणाएं आम आदमी के जीवन को सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए होती हैं. उदाहरण के तौर पर पिछले बजट में चि‍कि‍त्‍सा सेवा सुधारने के लि‍ए हर 3 संसदीय क्षेत्र में एक मेडि‍कल कालेज खोलने, प्लानिंग एंड आर्किटेक्ट के लिए 2 नए स्कूल खोलने, ग्रामीण इलाकों में 3.17 लाख किलोमीटर सड़कें बनाने का प्रस्‍ताव रखा गया था.

किसी मोर्चे पर राहत दिया जाना

बजट में सरकार कुछ ऐसी घोषणाएं भी कर देती है, जो एक तबके विशेष के लिए राहत भरी होती हैं. उदारहण के लिए पिछले बजट में सरकार ने महिला कर्मचारियों के EPF में 3 साल तक 8 फीसदी का योगदान अपनी तरफ से किए जाने की घोषणा की थी. किसानों के लिए फसलों की लागत का डेढ़ गुना एमएसपी सुनिश्चित किया था, मछलीपालन और पशुपालन करने वालों को भी किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दिए जाने की घोषणा की थी.

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