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बजट 2019: खुफिया तरीके से होती है बजट की सारी प्लानिंग, लीक न हो डिटेल इसके होते हैं पुख्ता इंतजाम

1 फरवरी को संसद में अंतरिम बजट ​पे​श किया जाने वाला है. बजट में सरकार आने वाले वित्त वर्ष के लिए अपने खर्च, आय अनुमान, योजनाएं, राहत आदि का जिक्र करती है.

Updated: Jan 31, 2019 4:16 PM
budget 2019 full process of budget makingएक तरह से बजट पूरे एक वित्त वर्ष में देश को कैसे चलाया जाएगा इसका ब्यौरा होता है.

1 फरवरी को संसद में अंतरिम बजट ​पे​श किया जाने वाला है. बजट में सरकार आने वाले वित्त वर्ष के लिए अपने खर्च, आय अनुमान, योजनाएं, राहत आदि का जिक्र करती है. बजट घोषणाओं से भारत के आम से लेकर खास आदमी तक हर कोई किसी न किसी तरह प्रभावित होता है. एक तरह से बजट पूरे एक वित्त वर्ष में देश को कैसे चलाया जाएगा इसका ब्यौरा होता है.

होती है अलग डिवीजन

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन एक डिवीजन है– इकोनॉमिक अफेयर्स, और इसके अंदर एक विभाग है– बजट डिवीजन. बजट डिवीजन ही हर साल सरकार का बजट बनाती है. बजट बनाने की प्रक्रिया हर साल अगस्त-सितंबर में शुरू हो होती है, जो पूरी तरह गोपनीय रहती है.

सुरक्षा के लिहाज से बजट बनने की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर बजट पेश होने वाले दिन तक प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड बजट की सुरक्षा और गोपनीयता के लिए तैनात किया जाता है. बजट का ड्राफ्ट बनने से लेकर बजट प्रिटिंग का कागज, प्रिटिंग, पैकेजिंग और संसद पहुंचने की प्रक्रिया के बीच कई बार बजट को लीक न होने देने के लिए सुरक्षा होती है.

अगस्त-सितंबर में आता है बजट सर्कुलर

बजट डिवीजन अगस्त के आखिर या सितंबर के शुरू होते ही बजट सर्कुलर जारी करती है. इसमें भारत सरकार और उसके सभी मंत्रालयों, विभागों से संबंधित कंटेंट और स्टेटमेंट की पूरी डिटेल रहती है. इसी डिटेल के आधार पर बजट का फ्रेमवर्क तैयार होता है. सितंबर आखिर तक अगले वित्त वर्ष के लिए सरकारी खर्चे का अनुमानित आंकड़ा तैयार कर लिया जाता है.

अक्टूबर-नवंबर में क्या होता है?

हर मंत्रालय के लिए फंडिंग तय करने के लिए प्रत्येक मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और वित्त मंत्रालय के बीच बातचीत होती है. निगोशिएशन भी होता है. इतने सारे मंत्रालयों और विभागों के कारण यह प्रक्रिया नवंबर तक चलती है.

दिसंबर में तैयार होती है पहली ड्राफ्ट कॉपी

दिसंबर आते ही बजट की पहली ड्राफ्ट कॉपी वित्त मंत्री के समक्ष पेश की जाती है. इसे फर्स्ट कट ऑफ बजट कहा जाता है. फर्स्ट कट ऑफ बजट का पेपर ब्लू कलर का होता है.

जनवरी में ली जाती है सलाह

जनवरी में बैंक एसोसिएशन, विभिन्न उद्योग समूह के प्रतिनिधियों और जाने-माने अर्थशास्त्रियों के साथ वित्त मंत्री की मीटिंग होती है. इस दौरान सभी की सलाह ली जाती है लेकिन सलाह मानना न मानना वित्त मंत्री का फैसला होता है.

क्या-क्या किया जाता है बजट सीक्रेट रखने के लिए

जनवरी के शुरुआत से ही मीडिया को वित्त मंत्रालय से दूर कर दिया जाता है, ताकि कोई भी बजट संबंधी खबर मीडिया के हाथ न लगे. इंटेलिजेंस ब्यूरो के लोग वित्त मंत्रालय को पूरी तरह से सिक्योर करते हैं. बजट से संबंधित प्रमुख लोगों का फोन भी टेप किया जाता है, जिससे कोई कुछ भी खुलासा न कर सके. यहां तक कि इंटरनेट कनेक्शन भी हटा दिया जाता है. सीसीटीवी के जरिए वित्त मंत्रालय में आने-जाने वाले लोगों पर कड़ी नजर रखी जाती है.

बजट की प्रिंटिंग

बजट डॉक्युमेंट की प्रिंटिंग वित्त मंत्रालय के बेसमेंट में की जाती है. इस प्रिंटिंग प्रेस में लगभग 100 लोगों को बजट से एक सप्ताह पहले पूरी जांच-पड़ताल करके भेजा जाता है और बजट प्रिंट होने तक वहीं रुकना होता है. प्रिंटिंग रूम में सिर्फ एक फोन होता है, जिस पर फोन सिर्फ आ सकता है. हालांकि, बात करते वक्त इंटेलिजेंस का एक आदमी हमेशा खड़ा रहता है.

डॉक्टरों की एक टीम प्रेस में हमेशा मौजूद रहती है ताकि प्रेस में काम करने वाले किसी भी कर्मचारी की तबीयत खराब होने पर उसका तुरंत इलाज किया जा सके.

अगर किसी इमरजेंसी में कोई कर्मचारी प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकलता है तो इंटेलिजेंस का एक आदमी और दिल्ली पुलिस का एक आदमी हमेशा उसके साथ रहता है. वित्त मंत्रालय के प्रिंटिंग प्रेस में काम करने वालों को जो खाना दिया जाता है, उसे भी टेस्टिंग से गुजरना पड़ता है, ताकि पता लगाया जा सके कि खाने में जहर तो नहीं मिलाया गया है.

क्या होता है बजट के दिन

वित्त मंत्री संसद में बजट पेश करने से पहले भारत के राष्ट्रपति और केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष बजट की समरी पेश करते हैं. इसके बाद बजट को संसद में पेश किया जाता है. सामान्यतः बजट दिन के 11 बजे संसद में पेश किया जाता है और वित्त मंत्री संसद को बजट के मुख्य बिंदुओं से अवगत कराते हैं.

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