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बजट 2019: क्या टूट जाएगी अंतरिम बजट में डायरेक्ट टैक्स से छेड़छाड़ न करने की परंपरा?

अगर इतिहास में झांकें तो कुछ अंतरिम बजटों में इनडायरेक्ट टैक्स रेट को बदला गया लेकिन डायरेक्ट टैक्सेज के साथ कोई छेड़खानी नहीं की गई.

Updated: Jan 31, 2019 3:25 PM
Budget 2019, interim budget 2019, FY 2019-20, Budget 2019 Convention vs Economic realities - which way the 2019 budget can goचुनाव होने के बाद नई सरकार फुल बजट लाती है.

अभीक बरुआ, चीफ इकोनॉमिस्ट, HDFC बैंक

Budget 2019: चुनावी साल में सरकार फुल बजट पेश न कर अंतरिम बजट पेश करती है. अंतरिम बजट का अर्थ है कि सरकार पूरे वित्त वर्ष के लिए बजट ने देकर चुनाव पूरा होने तक के समय के लिए बजट पेश करती है. चुनाव होने के बाद नई सरकार फुल बजट लाती है. अंतरिम बजट में मौजूदा सरकार वोट ऑन अकाउंट के जरिए ससंद से नई सरकार के चार्ज लेने तक काम जारी रखने के लिए फंड की डिमांड करती है.

आम तौर पर अंतरिम बजट में बड़े नीतिगत बदलावों को अनाउंस नहीं किया जाता और न ही इनकम टैक्स एक्ट में संशोधन की डिमांड रहती है. संवैधानिक तौर पर ऐसा कोई नियम नहीं है, जो सरकार को अंतरिम बजट में डायरेक्ट टैक्स को लेकर बड़े बदलावों को घोषित करने या लागू करने से या लागू करने से रोक सके. न ही ऐसी कोई बाध्यता है कि अंतरिम बजट ही पेश किया जाएगा. लेकिन चुनावों को देखते हुए यह परंपरा रही है कि चुनाव तक का काम मौजूदा सरकार देखेगी और उसके बाद का चुनावों के बाद आने वाली सरकार.

क्या कहता है इतिहास?

अगर इतिहास में झांकें तो कुछ अंतरिम बजटों में इनडायरेक्ट टैक्स रेट को बदला गया लेकिन डायरेक्ट टैक्सेज के साथ कोई छेड़खानी नहीं की गई. लेकिन इस बार GST मौजूद है और कस्टम ड्यूटी को छोड़कर बाकी सभी इनडायरेक्ट टैक्स GST में समाहित हो चुके हैं. साथ ही जीएसटी को लेकर फैसले GST काउंसिल लेती है. इसलिए बजट में इनडायरेक्ट टैक्स में बदलाव को लेकर कुछ खास नहीं हो सकता. अब देखना यह होगा कि सरकार अंतरिम बजट में डायरेक्ट टैक्स के साथ छेड़छाड़ न करने की परंपरा को बरकरार रखती है या तोड़ देती है.

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जेटली दे चुके हैं हिंट, वोट ऑन अकाउंट से रहेगा कुछ ज्यादा

बजट कैसा होगा, इसे लेकर अनिश्चितता बरकरार है. हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि अंतरिम बजट में क्या होगा यह हमेशा से इकोनॉमी के बड़े हित से तय होता है. इसलिए संभावना है कि यह प्रोसेस केवल वोट ऑन अकाउंट न रहकर इससे ज्यादा रह सकती है. उन्होंने यह भी कहा था कि कुछ चुनौतियों को लेकर इंतजार नहीं किया जा सकता.

2 अंतरिम बजट, जिनमें हुईं खास घोषणाएं

2004-05 का बजट

इस अंतरिम बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने डायरेक्ट या इनडायरेक्ट टैक्स को नहीं छेड़ा लेकिन लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स, टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स, डबल टैक्सेशन आदि को लेकर कई प्रस्तावों की घोषणा की. उन्होंने अंत्योदय अन्न योजना के कवरेज को 50 लाख बीपीएल परिवारों से बढ़ाकर 2 करोड़ परिवारों तक कर दिया. इसके अलावा पायलट बेसिस पर 20 जिलों में फार्म इनकम इंश्योरेंस स्कीम लागू करने का प्रस्ताव भी रखा.

2014-15 का बजट

इस अंतरिम बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम, जसवंत सिंह से एक कदम आगे चले गए. उन्होंने देश की ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए एक्साइज ड्यूटी और कस्टम्स को लेकर कई घोषणाएं कीं. कुछ आइटम्स पर चिदंबरम ने एक्साइज ड्यूटी घटा दी, जबकि कस्टम रेट्स को रेशनलाइज कर दिया. पॉलिसी के मामले में चिदंबरम ने डिफेंस फोर्सेज के लिए वन रैंक वन पेंशन की घोषणा की.

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बजट से उम्मीदें

1. कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी घोषणाएं संभव

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों से ग्रामीण संकट प्रमुख प्रेशर पॉइंट बनकर उभरा है. 6 राज्यों में चुनाव और आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए 2019 का अंतरिम बजट किसान केन्द्रित बजट हो सकता है. मीडियो रिपोर्ट्स के मुताबिक, बजट में किसानों के लिए इनकम सपोर्ट प्रोग्राम की घोषणा हो सकती है. इसके अलावा कम ब्याज दरों पर एग्री क्रेडिट फ्लो में बढ़ोत्तरी जैसे उपाय भी संभव हैं.

2. डायरेक्ट टैक्स में बदलाव की उम्मीद

मिडिल क्लास के लिए कुछ राहत भरे फैसले होने की उम्मीद है. विशेषकर सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स से छूट वाली आय की लिमिट को बढ़ाकर डबल यानी 3 लाख से 5 लाख कर दिया जाना. इसके अलावा इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स डिडक्शन की सीमा को भी 1.5 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये किया जा सकता है.

3. हेल्थकेयर पर रह सकता फोकस

हेल्थकेयर सेक्टर के लिए भी कुछ घोषणाएं होने की उम्मीद है. पिछले बजट में सरकार का फोकस मोदी​केयर यानी आयुष्मान भारत योजना पर था. इस​ साल सरकार इस स्कीम के लिए ज्यादा एलोकेशन का प्रस्ताव रख सकती है और हेल्थकेयर व प्रिवेंटिव चेकअप्स के लिए टैक्स बेनिफिट को बढ़ा सकती है.

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