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भारत में 2023 से शुरू हो जाएंगी प्राइवेट ट्रेनें! स्पीड, किराए से लेकर अन्य डिटेल

भारत में जल्द ही निजी ट्रेनों की योजना साकार होने जा रही है. देश में 12 प्राइवेट ट्रेनों के पहले सेट का परिचालन वित्त वर्ष 2023 से शुरू हो जाएगा.

Published: July 20, 2020 12:43 PM
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भारत में जल्द ही निजी ट्रेनों की योजना साकार होने जा रही है. देश में 12 प्राइवेट ट्रेनों के पहले सेट का परिचालन वित्त वर्ष 2023 से शुरू हो जाएगा. रेलवे की योजना वित्त वर्ष 2027 तक देश में 151 निजी ट्रेनें चलाने की है. रेलवे से जुड़े एक खास सूत्र ने इस बात की जानकारी दी है. बता दें कि रेलवे की योजना पीपीपी मॉडल पर 5 फीसदी ट्रेनों के निजीकरण करने की है. वहीं 95 फीसदी बची ट्रेनें रेलवे द्वारा ही चलाई जाएंगी. इसके लिए टेंडर मार्च 2021 तक फाइनल कर लिए जाएंगे. इस जानकारी के साथ ही निजी ट्रेनों की डेट को लेकर चल रहीं कई खबरों पर फिलहाल ब्रेक लग गया है.

कैसे कैसे शुरू होंगी ट्रेनें

सबसे पहले वित्त वर्ष 2023 में 12 निजी ट्रेनों की शुरूआत होगी. इसके बाद वित्त वर्ष 2023-24 में 45 ट्रेनें और बढ़ाई जाएंगी. वित्त वर्ष 2025-26 में 50 और निजी ट्रेनें इसमें शामिल होंगी. इसके बाद अगले अगले वित्त वर्ष में 44 और ट्रेनें बढ़ा दी जाएंगी. वित्त वर्ष 2026-27 तक कुल 151 निजी ट्रेनों का परिचालन शुरू हो जाएगा.

मार्च 2021 तक टेंडर

इस संबंध में 8 जुलाई को जारी किए गए योग्यता के लिए अनुरोध (RFQ) को नवंबर तक अंतिम रूप दिए जाने का अनुमान है. फाइनेंशियल बिडिंग को मार्च 2021 तक खोला जाएगा. इसके बाद 31 अप्रैल 2021 तक बिडर्स का चयन किए जाने का अनुमान है. अधिकारी ने कहा कि कुल आय में अधिकतम हिस्सेदारी की पेशकश करने वाले बोलीदाताओं को परियोजना दी जाएगी.

किराया और स्पीड

जानकारी के अनुसार ज्यादातर प्राइवेट ट्रेन मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही बनाई जाएंगी. किराया एसी बस और हवाई किराया को ध्यान में रख कर तय किया जाएगा. रेलवे के एक अधिकारी के अनुसार यात्री रेलगाड़ी परिचालन में निजी कंपनियों के उतरने से रेलगाड़ियों को तेज गति से चलाने और रेल डिब्बों की टेक्नॉलजी में नया बदलाव आएगा. रेलवे ने कहा है कि 70 प्रतिशत प्राइवेट ट्रेनों का विनिर्माण भारत में किया जाएगा, जिन्हें अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिजाइन किया जाएगा. टेक्नोलॉजी के बेहतर होने से रख रखाव का खर्च भी कम होगा.

रेलवे की बढ़ेगी कमाई

जानकारी के अनुसार ट्रेनों के 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने पर यात्रा समय में 10-15 फीसदी की और 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने पर 30 फीसदी तक की बचत होगी. उन्होंने कहा कि रेलवे को इन 151 ट्रेनों के परिचालन से प्रति वर्ष लगभग 3,000 करोड़ रुपए भाड़े के तौर पर मिलने की उम्मीद है. इन ट्रेनों पर भारतीय रेलवे के चालक और गार्ड ही रखे जाएंगे.

जुर्माने का भी प्रावधान

इन ट्रेनों का संचालन और रखरखाव भारतीय रेलवे द्वारा निर्दिष्ट मानकों और विशिष्टताओं और आवश्यकताओं द्वारा नियंत्रित किया जाएगा. निजी संस्था द्वारा गाड़ियों का संचालन समय के साथ महत्वपूर्ण प्रदर्शन संकेतक जैसे कि समय की पाबंदी (95 फीसदी), विश्वसनीयता (एक लाख किमी की यात्रा के लिए एक से अधिक विफलता), गाड़ियों के रखरखाव और अन्य आवश्यकताओं के अनुरूप होगा. निजी कंपनियां यात्री रेलगाड़ी परिचालन से जुड़े किसी भी प्रदर्शन मानक को पूरा करने में असफल रहती हैं तो उन पर जुर्माना भी लगाया जाएगा.

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