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मोदी सरकार को झटका! Moody’s ने भारत का रेटिंग आउटलुक किया ‘निगेटिव’, वित्‍त मंत्री ने कहा- मजबूत हैं फंडामेंटल

हालांकि, मूडीज ने भारत के लिए Baa2 विदेशी-मुद्रा एवं स्थानीय मुद्रा रेटिंग बरकरार रखी है.

November 8, 2019 1:04 PM
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अर्थव्यवस्था में जान फूंकने की कोशिश में जुटी मोदी सरकार को रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) ने तगड़ा झटका दिया है. मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने देश की क्रेडिट रेटिंग आउटलुक को ‘स्टेबल’ से घटाकर ‘निगेटिव’ कर दिया है. रेटिंग एजेंसी का कहना है कि अर्थव्यवस्था की सुस्ती से निपटने के लिए सरकार के कदम बहुत ज्यादा प्रभावी साबित नहीं हुए. इससे पहले के मुकाबले जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार कम रहेगी. हालांकि, मूडीज ने भारत के लिए Baa2 विदेशी-मुद्रा एवं स्थानीय मुद्रा रेटिंग बरकरार रखी है.

दूसरी ओर, सरकार ने मूडीज के इस कदम का सख्त विरोध किया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitaraman) ने ट्वीट कर कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल अभी भी मजबूत हैं और हाल में आर्थिक सुधार की दिशा में उठाए गए कदम निवेश को बढ़ावा देंगे. वित्त मंत्री सीतारणम ने भारत में महंगाई दर नियंत्रण में है और बॉन्ड यील्ड लो है.

वित्‍त मंत्रालय के अनुसार, मूडीज ने भारत की रेटिंग भले ही घटाई है लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. IMF ने अपने ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक में कहा है कि वित्त वर्ष 2019 में भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट 6.1 फीसदी रहेगी, जबकि 2020 में यह बढ़कर 7 फीसदी की रफ्तार पकड़ लेगी. भारत की पोटेंशियल ग्रोथ रेट बरकार है. IMF और कई अन्य दूसरी संस्थाओं ने भारतीय अर्थव्यवस्था का आउटलुक भी सकारात्मक रखा है.

राजकोषीय घाटा 3.7% रहने का अनुमान

मूडीज ने कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती और जीडीपी ग्रोथ की धीमी रफ्तार को देखते हुए अनुमान जताया है कि मार्च 2020 में खत्म होने वाले वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.7 फीसदी रह सकता है. सरकार का लक्ष्य 3.3 फीसदी रखा गया था. इससे पहले, अक्टूबर 2019 में मूडीज ने 2019-20 में जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.2 फीसदी से घटाकर 5.8 फीसदी कर दिया था.

भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट अप्रैल और जून के बीच 5 फीसदी रही थी, जो कि 2013 के बाद सबसे कम है. एजेंसी ने आर्थिक सुस्ती की सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर ट्रेड वार के बीच सरकारी खर्चों की सुस्त रफ्तार और कंज्यूमर डिमांड में कमी बताई है.

बता दें, अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां देश की सरकारों की उधारी चुकाने की क्षमता का समय—समय पर आकलन करती हैं. इसके लिए वह अर्थव्यवस्था, बाजार और राजनीतिक जोखिमों को आधार बनाती हैं. इसके आधार पर जारी रेटिंग से यह अनुमान तय होता है कि कोई देश आगे चलकर अपने कर्ज को समय पर चुकता कर सकेगा या नहीं?

सरकार के कदम नहीं हुए असरदार

मूडीज ने एक बयान में कहा है कि आउटलुक यह दिखाता है कि सरकार और उसकी नीतियां आर्थिक सुस्ती से निपटने में कारगर नहीं रही. जिससे कर्ज का बोझ और बढ़ेगा, जो पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर है.

मूडीज ने भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ से जुड़े जोखिमों को देखते हुए रेटिंग घटाई है. इससे स्पष्ट है कि पहले के मुकाबले अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी रहेगी. एजेंसी के अनुसार, इस साल भारत का ग्रोथ आउटलुक तेजी से गिरा है. इसकी शुरुआत नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल सर्विसेज (NBFIs) के संकट से हुई. यह सुस्ती धीरे-धीरे रिटेल बिजनेस, कार कंपनियों, घरों की बिक्री और बड़े उद्योगों तक फैल गई.

बता दें, रेटिंग एजेंसियां आमतौर देशों की रेटिंग को भविष्य में होने वाले बदलावों की संभावना के आधार पर तीन वर्ग में बांटती हैं. ये निगेटिव, स्टेबल और पॉजिटिव है.

Input: PTI

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