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तिरंगा के आर्किटेक्ट पिंगली वैंकेया की कहानी, आजादी के 75वें वर्ष में उनके गांव में कैसा है माहौल?

तिरंगा झंडा के आर्किटेक्ट पिंगली वैंकेया के पैतृक गांव में उनके योगदान को लेकर स्थानीय लोगों का क्या मानना है और आजादी के 75वें वर्ष में क्या माहौल है, जानने के लिए यहां पढ़ें-

तिरंगा के आर्किटेक्ट पिंगली वैंकेया की कहानी, आजादी के 75वें वर्ष में उनके गांव में कैसा है माहौल?
पिंगली वैंकेया राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अनुयायी थे और उन्होंने ही वर्ष 1921 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में वैंकेया के बनाए हुए राष्ट्रीय झंडे को मंजूरी दी थी.

देश के राष्ट्रीय झंडे तिरंगा को पिंगली वैंकेया ने डिजाइन किया था, इसका जानकारी लोगों को है लेकिन वह जिस गांव से थे, उसके बारे में इतिहास की किताबों में बहुत कम लिखा-पढ़ा गया है. वह आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के एक छोटे से गांव भाट्लापेनूमार्रू के थे. देश की आजादी के 75वें वर्ष में उनके गांव में क्या माहौल चल रहा है, इसे लेकर उत्सुकता तो होगी है. इसे लेकर ऑफिशियल सूत्रों का कहना है कि स्कूलों में ड्राइंग और किसी थीम पर स्टूडेंट्स के लिए अन्य कंपटीश जैसे रूटीन इवेंट्स के अलावा आजादी के अमृत महोत्सव को लेकर भाट्लापेनूमार्रू में किसी खास एक्टिविटी की कोई योजना नहीं है. वैंकेया राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अनुयायी थे और उन्होंने ही वर्ष 1921 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में वैंकेया के बनाए हुए राष्ट्रीय झंडे को मंजूरी दी थी.

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गांव में क्या स्थिति है वैंकेया के योगदान को लेकर

कुछ साल पहले गांव वालों और कुछ परोपरकारियों ने पैसे जुटाकर एक दो मंजिली बिल्डिंग का निर्माण कराया है जिसका आमतौर पर कम्यूनिटी हॉल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. यह पिंगली वैंकेया के नाम पर इकलौता मेमोरियल है. गांव के केंद्र में महात्मा गांधी के साथ वैंकेया की लाइफ साइज स्टेच्यू लगी है. वैंकेया के परिवार के लोग दशकों पहले गांव छोड़ चुके हैं और उनका जुड़ाव अब सिर्फ नोस्टालजिक ही है यानी यादों के समान.

गांव वालों के लिए भी वैंकेया कई पीढ़ी पहले की शख्सियत हैं लेकिन उनका नाम सम्मान और श्रद्धा के साथ लिया जाता है. 2 अगस्त को वैंकेया की 146वीं जयंती के मौके पर गांव में बड़े पैमाने पर जश्न मनाया गया. गांव वालों ने 300 फीट का तिरंगा गांव में घुमाया और जिला प्रशासन ने झंडा आरोहण कार्यक्रम और सांस्कृतिक समारोह आयोजित किए.

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समीप का एक गांव इंटरनेशनल मैप पर लेकिन वैंकेया का गांव पीछे

गांव के एक शख्स कोटेश्वर राव का कहना है कि भाट्लापेनूमार्रू अन्य गांव की ही तरह है लेकिन इसमें खास यह है कि अब इसकी पहचान वैंकेया के नाम से है. गांव की जनसंख्या 3500 है. कुछ साल पहले विजयवाड़ा के तत्कालीन सांसद लगादपति राजगोपाल ने पिंगली वैंकेया की याद में और भाट्लापेनूमार्रू को देश के नक्शे पर महत्वपूर्ण जगह दिलाने के लिए एक तिरंगा दौड़ आयोजित किया था. कोटेश्वर राव के मुताबिक गांव को लाइमलाइट में लाने के लिए सिर्फ यही बड़ी कोशिश की गई लेकिन इसके बाद कुछ नहीं हुआ. वहीं यहां से कुछ मील की ही दूरी पर कुचीपुड़ी गांव है जहां भारतीय क्लासिकल डांस की शुरूआत हुई थी और इस वजह से यह अंतरराष्ट्रीय नक्शे पर भी मौजूद है.

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पहली बार पिछले महीने किसी केंद्रीय मंत्रा ने किया गांव का दौरा

केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के कार्यक्रम के रूप में पिंगली वैंकेया को श्रद्धांजलि देने के लिए 31 जुलाई को भाट्लापेनूमार्रू का दौरा किया था. गांव का दौरा करने वाले पहले केंद्रीय मंत्री थे. किशन रेड्डी ने कृष्णा जिले के प्रशासन को गांव में पिंगली वैंकेया की याद में विशाल तिरंगा लगाने का निर्देश दिया था. इसके अलावा उन्होंने गांव में पिंगली वैंकेया मेमोरियल बनाने का वादा किया, अगर राज्य सरकार जमीन उपलब्ध कराती है. कृ्ष्णा जिले के ज्वाइंट कलेक्टर आर महेश कुमार का कहना है कि अगले दो से तीन महीने में गांव में विशाल तिरंगा स्थापित किया जाएगा.
(इनपुट: पीटीआई)

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