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तीसरी लहर से निपटने की तैयारी! 525 बच्चों पर होगा Covaxin का ट्रॉयल, SEC ने दवा नियामक से की सिफारिश

कोरोना वायरस के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार वैक्सीन का बच्चों पर ट्रायल के लिए Bharat Biotech को सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी की मंजूरी मिल चुकी है.

May 12, 2021 6:00 PM
Bharat Biotech Covaxin recommended by expert panel for phase 2 AND 3 trials on 2-18 year-oldsभारत में इस समय दो कंपनियों द्वारा बनाई गई वैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है और 18+ के लोगों को ही इसकी डोज दी जा रही है.

देश में कोरोना की दूसरी लहर बहुत खतरनाक साबित हो रही है. इस बार अधिक संख्या में केसेज आ रहे हैं और इस बार युवा अधिक संक्रमित हो रहे हैं. विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि तीसरी लहर आती है तो उसका बच्चों पर भी असर पड़ सकता है. इसे लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है. इसी कड़ी में कोरोना वायरस के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार वैक्सीन का बच्चों पर ट्रायल के लिए Bharat Biotech को मंजूरी मिल चुकी है. दवा नियामक DCGI की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (SEC) ने भारत बॉयोटेक को 2-15 साल के बच्चों पर वैक्सीन के ट्रॉयल को मंजूरी दी है. अब इसे डीसीडीआई के अप्रूवल का इंतजार है. देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान AIIMS के में डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन के डॉ संजीव सिन्हा ने उम्मीद जताई है कि बच्चों पर वैक्सीन के दूसरे व तीसरे चरण का ट्रॉयल जल्द शुरू किया जाएगा.

525 लोगों पर किया जाएगा क्लीनिकल ट्रॉयल

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक 525 लोगों पर यह क्लीनिकल ट्रॉयल किया जाएगा. यह ट्रॉयल दिल्ली स्थित एम्स, पटना स्थित एम्स और नागुपर के मेडिट्रिन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (MIMS) में किया जाएगा. कमेटी के मुताबिक भारत बॉयोटेक को तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रॉयल शुरू करने से पहले दूसरे चरण का पूरा डेटा उपलब्ध कराना होगा. मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के मुताबिक कोवैक्सीन का उत्पादन मई-जून 2021 में दोगुना हो जाएगा और जुलाई-अगस्त में 6-7 गुना हो जाएगा. सितंबर 2021 तक वैक्सीन उत्पादन बढ़कर 10 करोड़ डोज प्रति महीना होने का अनुमान है.

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अभी 18+ को ही लग रही वैक्सीन

भारत में इस समय दो कंपनियों द्वारा बनाई गई वैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है और 18+ के लोगों को ही इसकी डोज दी जा रही है. भारत में सीरम इंस्टीट्यूट की कोवीशील्ड और भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन को लोगों को लगाया जा रहा है. कोवीशील्ड और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी व एस्ट्राजेनेका ने विकसित किया है जबकि कोवैक्सीन को भारत बॉयोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने मिलकर विकसित किया है. कुछ दिनों पहले केंद्र सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार ने तीसरे लहर की आशंका जताते हुए इसका बच्चों पर बहुत असर हो सकता है.

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