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बैंक हड़ताल: सरकारी बैंकों के कामकाज पर भी पड़ा असर; कैश लेनदेन, जमा-निकासी की सेवाएं प्रभावित

बैंक अधिकारियों के एक संगठन- अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (AIBOC) ने भी हड़ताल को समर्थन दिया है.

November 26, 2020 12:05 PM
Bank Strike Updates Operations at PSU banks partially hit due to trade union strikeकई सरकारी बैंकों में कैश लेनदेन प्रभवित रहा. शाखाओं में नकदी जमा और निकासी की सेवाएं प्रभावित हुई हैं.

Bank Strike updates: केंद्रीय ट्रेड यूनियन की तरफ से बुलाई गई एक दिन की हड़ताल के चलते सरकारी बैंकों में भी कामकाज आंशिक रूप से प्रभावित रहा. हड़ताल में कुछ बैंक संगठन शामिल हुए. कई सरकारी बैंकों में कैश लेनदेन प्रभवित रहा. शाखाओं में नकदी जमा और निकासी की सेवाएं प्रभावित हुई हैं. विदेशी मुद्रा विनिमय और सरकारी लेनदेन भी कई पीएसयू बैंकों जहां यूनियन मजबूत है, वहां प्रभावित रहा. हालांकि, एसबीआई और प्राइवेट बैंकों में कामकाज सामान्य रहा.

भारतीय मजदूर संघ को छोड़कर दस केंद्रीय ट्रेड यूनियन ने केंद्र सरकार की विभिन्न नीतियों के खिलाफ विरोधस्वरूप देशव्यापी हड़ताल बुलाई थी. बैंक आफ महाराष्ट्र समेत कई बैंकों ने अपने ग्राहकों को पहले ही जानकारी दे दी थी कि हड़ताल के चलते सामान्य कामकाज प्रभावित हो सकता है.

ऑल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन (AIBEA), नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज (NCBE) और बैंक एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) से जुड़े बैंक कर्मचारी हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं. बैंक अधिकारियों के एक संगठन- अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (AIBOC) ने भी हड़ताल को समर्थन दिया है.

एआईबीईए ने एक बयान में कहा कि ईज आफ डूइंग के नाम पर लोकसभा ने हाल में तीन नए श्रम कानून पारित किए हैं. यह पूरी तरह से कॉरपोरेट के हित में है. करीब 75 फीसदी कर्मचारियों को श्रम कानूनों के दायरे से बाहर कर दिया गया है और नए कानूनों के तहत उनके पास कोई कानूनी संरक्षण नहीं है.

एआईबीईए, भारतीय स्टेट बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक के कर्मचारियों को छोड़कर लगभग सभी बैंक कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था है. विभिन्न सरकारी और निजी क्षेत्र के पुराने बैंकों समेत कुछ विदेशी बैंकों के कर्मचारी एआईबीईए के सदस्य हैं.

निजीकरण, आउटसोर्स जैसी नीतियों का विरोध

बैंक कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन की वजह बैंकों का निजीकरण और क्षेत्र में विभिन्न नौकरियों को आउटसोर्स करना या संविदा पर करना है. इसके अलावा बैंक कर्मचारियों की मांग क्षेत्र के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की भर्ती करना और बड़े कॉरेपोरेट लोन डिफाल्टर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना भी है.

दस केंद्रीय यूनियन- इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC), आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC), हिंद मजदूर सभा (HMS), सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU), आल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC), ट्रेड यूनियन कोआर्डिनेशन सेंटर (TUCC) और सेल्फ इम्प्लायड वुमंस एसोसिएशन (SEWA) शामिल रहे.

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