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RBI सालाना रिपोर्ट: 2018-19 में हुआ 71543 करोड़ रुपये का बैंक फ्रॉड, सरकारी बैंकों में सबसे ज्‍यादा धोखाधड़ी

बैंक फ्रॉड के सबसे अधिक मामले सरकारी बैंकों में दर्ज किए गए.

August 29, 2019 7:59 PM
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RBI annual report 2019: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सालाना रिपोर्ट के अनुसार 2018-19 में सालाना आधार पर बैंक फ्रॉड के मामलों में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. गुरुवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2018-19 में बैंकों में 71,542.93 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 6,801 मामले सामने आए हैं. जबकि 2017-18 में बैंक फ्रॉड की रकम 41,167.04 करोड़ रुपये थी.

रिपोर्ट के अनुसार, बैंक फ्रॉड के सबसे अधिक मामले सरकारी बैंकों में दर्ज किए गए. 2018-19 में बैंक फ्रॉड में बल्क अकाउंट सरकारी बैंकों का रहा, इसके बाद सबसे अधिक प्राइवेट बैंक और विदेशी बैंकों में फ्रॉड के मामले समाने आए.

सरकारी बैंकों में फ्रॉड के 3766 मामले 

रिपोर्ट के अनुसार, 2018-19 में सरकारी बैंकों में 64509.43 करोड़ रुपये के फ्रॉड के 3,766 मामले सामने आए. जबकि, इससे पिछले साल 2885 मामलों में 38,260.8 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी दर्ज की गई थी. रिपोर्ट के अनुसार, फ्रॉड का पता चलने और फ्रॉड होने की तारीख में औसतन 22 महीने का समय लगा. बड़े फ्रॉड यानी 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी के बीच यह अंतर औतसन 55 महीने था.

फ्रॉड में धोखा और जालसाजी सबसे ज्यादा

आरबीआई की सालाना रिपोर्ट बताती है कि 2018-19 के दौरान बैंक फ्रॉड के जितने मामले सामने आए हैं उनमें धोखा और जालसाजी का केस सबसे अधिक रहा. इसके बाद गलतफहमी और विश्वासघात जैसे मामले रहे. सबसे कम अकाउंट यानी 1 लाख रुपये से कम के फ्रॉड का मामला केवल 0.1 फीसदी रहा.

आरबीआई का कहना है कि वह अलग- अलग एजेंसियों के साथ मिलकर बैंकों की बीच डाटा शेयरकरने और सूचना का सिस्टम तैयार करने पर काम करेगा. इससे बैंक फ्रॉड की घटनाओं का पता लगाने और रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने में मदद मिलेगी.

सबसे ज्यादा धोखाधड़ी के मामले अग्रिम राशि से जुड़े रहे हैं. इसके बाद कार्ड, इंटरनेट और जमा राशि से जुड़े धोखाधड़ी के मामले सामने आये हैं. वर्ष 2018- 19 में कार्ड, इंटरनेट और जमा राशि से जुड़े धोखाधड़ी राशि कुल धोखाधड़ी के समक्ष मात्र 0.3 प्रतिशत रही है.

घरेलू मांग घटने से आर्थिक सुस्ती

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि घरेलू मांग घटने से आर्थिक गतिविधियां सुस्त पड़ी हैं और अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए निजी निवेश बढ़ाने की जरूरत है. आरबीआई ने कहा है कि आईएलएंडएफएस संकट के बाद एनबीएफसी से कॉमर्शियल लोन डिस्ट्रिब्यूशन में 20 फीसदी की गिरावट आई है. बता दें, ​आरबीआई की तरफ से हर साल रिपोर्ट जारी की जाती है. इसमें केंद्रीय बैंक के कामकाज तथा संचालन के विश्लेषण के साथ ही अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन में सुधार के लिए सुझाव दिए जाते हैं.

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