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असम में NRC की आखिरी लिस्ट जारी, 19 लाख से ज्यादा लोगों के नाम नहीं

यह सूची असम में वैध भारतीय नागरिकों की पुष्टि से संबंधित है.

August 31, 2019 6:16 PM
Assam NRC final list out, 19.07 lakh excludedImage: PTI

असम में बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) की अंतिम सूची शनिवार को जारी कर दी गई. इसमें 19 लाख से अधिक आवेदक अपना स्थान बनाने में विफल रहे. इससे सूची से बाहर रखे गए आवेदकों का भविष्य अधर में लटक गया है क्योंकि यह सूची असम में वैध भारतीय नागरिकों की पुष्टि से संबंधित है.

एनआरसी के राज्य समन्वयक कार्यालय ने एक बयान में कहा कि 3,30,27,661 लोगों ने NRC में शामिल होने के लिए आवेदन दिया था. इनमे से 3,11,21,004 लोगों को दस्तावेजों के आधार पर एनआरसी में शामिल किया गया है और 19,06,657 लोगों को बाहर कर दिया गया है. शामिल किए गए और बाहर किए गए नामों को लोग NRC की वेबसाइट www.nrcassam.nic.in पर देख सकते हैं.

120 दिन के अंदर विदेशी न्यायाधिकरण में कर सकते हैं अपील

जिन लोगों का नाम राष्ट्रीय नागरिक पंजी से बाहर रखा गया है, वे इसके खिलाफ 120 दिन के भीतर विदेशी न्यायाधिकरण में अपील दर्ज करा सकते हैं. असम सरकार पहले ही कह चुकी है जिन लोगों को NRC सूची में शामिल नहीं किया गया उन्हें किसी भी स्थिति में हिरासत में नहीं लिया जाएगा, जब तक विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) उन्हें विदेशी न घोषित कर दे.

बयान में कहा गया कि सुबह 10 बजे अंतिम सूची प्रकाशित की गई. शामिल किए गए लोगों की पूरक सूची एनआरसी सेवा केंद्रों (एनएसके), उपायुक्त के कार्यालयों और क्षेत्राधिकारियों के कार्यालयों में उपलब्ध है, जिसे लोग कामकाज के घंटों के दौरान देख सकते हैं. सूची जारी किए जाने की सूचना मिलने के बाद सैकड़ों की संख्या में लोग कार्यालयों के बाहर जमा होना शुरू हो गए. जिन लोगों का नाम सूची में था, वे प्रसन्न थे और जिनका नाम नहीं था, वे दुखी थे.

बीजेपी और कांग्रेस दोनों असंतुष्ट

सत्तारूढ़ भाजपा, विपक्षी कांग्रेस और ऑल असम स्टूडेंट यूनियन ने कहा है कि वे अंतिम नागरिकता सूची से असंतुष्ट हैं. असम सरकार में वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ मंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कहा कि 1971 से पहले बांग्लादेश से भारत आए कई शरणार्थियों को NRC सूची से बाहर निकाला गया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को सीमावर्ती जिलों में कम से कम 20 प्रतिशत और शेष असम में 10 प्रतिशत के पुन: सत्यापन की अनुमति देनी चाहिए. सरमा ने कहा कि जैसा कि कई लोगों ने आरोप लगाया है, विरासत संबंधी आंकड़ों से छेड़छाड़ की गई.

आसू जाएगी सुप्रीम कोर्ट

ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) NRC से बाहर रखे गए नामों के आंकड़े से खुश नहीं है और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी. आसू के महासचिव लुरिनज्योति गोगोई ने कहा, ‘‘हम इससे बिल्कुल खुश नहीं हैं. ऐसा लगता है कि अपडेशन प्रक्रिया में कुछ खामियां हैं. हम मानते हैं कि NRC अपूर्ण है. हम एनआरसी की खामियों को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अपील करेंगे.’’

स्थानीय लोगों को ही नहीं मिली जगह

बारपेटा से कांग्रेस सांसद अब्दुल खालीक ने कहा कि वह पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है. काफी संख्या में वैध नामों को हटा दिया गया है. इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट में मूल याचिकाकर्ता द असम पब्लिक वर्क्स (एपीडब्ल्यू) ने कहा कि अंतिम एनआरसी त्रुटिपूर्ण दस्तावेज है. भाजपा के पूर्व सांसद रमन डेका ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में बांग्लादेश से आए अवैध मुस्लिमों को स्थान मिल गया लेकिन काफी स्थानीय लोग बाहर रह गए.

NRC मसौदे के हिस्से के तौर पर 31 दिसम्बर 2017 की आधी रात को 1.9 करोड़ लोगों के नाम इसमें शामिल किए गए थे. गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई में NRC के अंतिम मसौदे से 3,29,91,384 करोड़ लोगों में से 40,07,707 लोगों को बाहर कर दिया गया था. इसके बाद जून में 1,02,462 लोगों को बाहर कर दिया गया था.

20वीं सदी से अवैध घुसपैठियों की समस्या से जूझ रहा असम

करीब 20वीं सदी की शुरुआत से ही बांग्लादेश से अवैध घुसपैठियों की समस्या से जूझ रहा असम अकेला राज्य है, जहां पहली बार 1951 में राष्ट्रीय नागरिक पंजी तैयार की गई थी. तब से ऐसा पहली बार है जब NRC को अपडेट किया गया है.

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