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UPA और NDA के दौर में 2.5% तक बढ़ा-चढ़ाकर पेश की GDP ग्रोथ रेट: पूर्व CEA अरविंद सुब्रमण्यम

पिछले कुछ समय से कई अर्थशास्त्री लगातार जीडीपी डेटा पर संदेह जताते रहे हैं.

Updated: Jun 11, 2019 5:03 PM
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पिछले कुछ समय से GDP डेटा के आंकड़ों पर लगातार विवाद रहा है. अब पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) अरविंद सुब्रमण्यम का भी मानना है कि जीडीपी को लेकर 2.5 फीसदी से अधिक का अनुमान पेश किया गया. जीडीपी का यह ओवरएस्टीमेट डेटा करीब 2.5 फीसदी तक अधिक था. पूर्व सीईए का मानना है कि UPA और NDA दोनों सरकारों के दौरान के जीडीपी आंकड़ों का अनुमान 2.5 फीसदी तक अधिक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया. 2011-12 और 2016-17 के बीच वास्तविक ग्रोथ 7 फीसदी से कम है जो करीब 4.5 फीसदी के करीब बैठता है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, अरविंद सुब्रमणियन ने यह खुलासा हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एक रिसर्च पेपर में किया है. रिसर्च पेपर में की गई एनालिसिस 17 मुख्य आर्थिक संकेतकों पर आधारित है जो जीडीपी ग्रोथ से सीधे जुड़ा हुआ है. पिछले कुछ समय से कई अर्थशास्त्री लगातार जीडीपी डेटा पर संदेह जताते रहे हैं.

मापने के तरीकों में बदलाव से GDP ग्रोथ

पूर्व सीईए के रिसर्च पेपर के मुताबिक जीडीपी के आंकड़ों को मापने के लिए सबसे अधिक गलती मैनुफैक्चरिंग के कैलकुलेशन में हुई. अरविंद सुब्रमणियन का दावा है कि ओवरएस्टीमेशन की एक वजह जीडीपी के आंकड़ों को मापने के लिए तरीकों में बदलाव है. रिसर्च पेपर के मुताबिक 2011 से पहले नेशनल अकाउंट्स में जिस मैनुफैक्चरिंग वैल्यु को जोड़ा जाता था, वह आइआइपी के मैनुफैक्चरिंग कंपोनेंट और मैनुफैक्चरिंग एक्सपोर्ट्स से सीधे जुड़ा होता था. पूर्व सीईए का दावा है कि अब यह लिंक टूट गया है.

GDP ग्रोथ को फिर से बढ़ाने पर जोर देने का सुझाव

रिसर्च पेपर में अरविंद सुब्रमणियन ने भारत की ग्रोथ परफॉरमेंस को सुधारने के लिए सुझाव भी दिया है. उन्होनें सुझाव दिया है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कारण जो नए अवसर बने हैं उन्हें भुनाने के लिए नेशनल इनकम अकाउंट्स के एस्टीमेशन में पूरी तरह बदलाव किया जाना चाहिए. इसके अलावा पूर्व सीईए ने जोर दिया है कि सरकार का मुख्य जोर जीडीपी ग्रोथ को अर्जेंट बेसिस पर रिस्टोर करने की कोशिश पर होनी चाहिए.

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