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भारत में क्यों नहीं लागू हो सकता ‘वन रेट, वन जीएसटी’, पूर्व वित्त मंत्री जेटली ने बताई ये वजह

जेटली ने दोहराया कि एक दर वाली GST व्यवस्था केवल बहुत सम्पन्न देश में ही संभव है जहां कोई गरीब नहीं है.

July 1, 2019 5:36 PM
arun jaitley says GST may become two-tier tax after merging 12% 18% slabsएक दर वाली GST व्यवस्था केवल बहुत सम्पन्न देश में ही संभव है जहां कोई गरीब नहीं है

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा कि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के राजस्व में सुधार होने पर आगे चल कर 12 फीसदी और 18 फीसदी दरों को मिला कर एक किया जा सकता है. इसके बाद GST में सिर्फ 2 टैक्स रेट रह जाएंगे.
देश में GST के दो साल पूरे होने के मौके पर फेसबुक पर अपने एक पोस्ट में अरुण जेटली ने कहा कि नयी प्रणाली में 20 राज्यों के राजस्व में पहले ही 14 फीसदी सालाना से अधिक की वृद्धि हो रही है. इससे इन राज्यों को केंद्र से रेवेन्यू कंपनसेशन की आवश्यकता नहीं है.
भाजपा नेता जेटली ने अपनी खराब सेहत के चलते नई सरकार में कोई जिम्मेदारी नहीं ली है. उन्होंने फेसबुक पर लिखा है कि कंज्यूमर्स की जरूरत के ज्यादातर सामान अब 18 फीसदी, 12 फीसदी या यहां तक की 5 फीसदी कर के दायरे में ला दिए गए हैं.

केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में GST परिषद ने पिछले दो साल में समय-समय पर कई चीजों पर वस्तुओं और सेवाओं पर GST दरें कम करने के जो निर्णय किए हैं उससे 90,000 करोड़ रुपये के राजस्व का त्याग करना पड़ा है.

सभी प्रकार के गुड्स पर एक साथ कम नहीं हो सकता GST

अरुण जेटली ने लिखा है कि अब केवल लग्जरी की चीजों और कुछ हानिकारक वस्तुओं पर ही GST की सबसे ऊंची 28 फीसदी की दर लागू है. शून्य और 5 फीसदी की दरें हमेशा रहेंगी. आगे राजस्व में सुधार हुआ तो इससे पॉलिसी को नेगोशिएट कर 12 फीसदी और 18 फीसदी की दरों को आपस में मिला कर एक करने का अवसर मिल सकता है. इस प्रकार GST दो दरों वाली प्रणाली बन जाएगी. उन्होंने कहा कि सभी प्रकार के गुड्स पर दरें एक झटके से कम नहीं की जा सकतीं क्यों कि इससे सरकार को राजस्व की भारी हानि हो सकती है. यह काम तो राजस्व में वृद्धि के साथ ‘‘धीरे धीरे ही किया जा सकता है.’’ GST एक जुलाई 2017 को लागू हुआ था. पहले फाइनेंशियल ईयर के आठ महीनों (जुलाई-मार्च 2017-18) में GST की एवरेज रेवन्यू हर महीने 89,700 करोड़ रुपये रही. साल 2018-19 में यह औसतन 10 फीसदी बढ़ कर 97,100 करोड़ रुपये मासिक पर पहुंच गई.

भारत में नहीं होना चाहिए एक दर एक GST

उन्होंने कहा कि ‘पांच साल बाद राजस्व का क्या होगा.’ GST में पहले पांच साल तक राज्यों को सालाना 14 फीसदी राजस्व वृद्धि की गारंटी दी गयी है. इसमें कमी की भरपाई केंद्र की जिम्मेदारी है. इसके लिए GST में राजस्व क्षतिपूर्ति उपकर की व्यवस्था की गयी है.
जेटली ने कहा कि GST के दूसरे साल में ही 20 राज्यों में राजस्व वृद्धि 14 फीसदी से अधिक रही है. उनके लिए राजस्व क्षतिपूर्ति कोष की जरूरत नहीं है. जेटली ने अपने इस कथन को दोहराया है कि एक दर वाली GST व्यवस्था केवल बहुत सम्पन्न देश में ही संभव है जहां कोई गरीब नहीं है. उन्होंने कहा कि ऐसे देश जहां बड़ी संख्या में लोग गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हों उनमें कोई एक दर रखना अनुचित होगा.
GST में केन्द्र और राज्यों में लगने वाले 17 करों को शामिल किया गया है. इनडायरेक्ट टैक्स की इस व्यवस्था को एक जुलाई 2017 को लागू किया गया है. इसमें फिलहाल चार दरें हैं — 5, 12, 18 और 28 फीसदी– हैं. सबसे ऊंची दर में शामिल वस्तुओं में वाहनों, लक्जरी सामानों और हानिकारक वस्तुओं पर 28 फीसदी के ऊपर सेस भी लगाया जाता है.

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