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क्रूज मिसाइल से लड़ाकू हेलीकॉप्टर, इन 101 रक्षा उपकरणों के आयात पर रोक; अब घर में बनेंगे

आर्टिलरी गन से लेकर लड़ाकू हेलीकॉप्टर तक, इन 101 रक्षा उपकरणों के आयात पर रोक

August 9, 2020 5:43 PM
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Make in India in Defence: रक्षा विभग का जोर अब मेक इन इंडिया पर होगा. देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत बड़ी घोषणा भी की है. देश में रक्षा उपकरणों का उत्पादन बढ़ाने के लिए 101 उपकरणों के आयात पर रोक लगाई जाएगी. इनमें
क्रूज मिसाइल, आर्टिलरी गन से लेकर लड़ाकू हेलीकॉप्टर तक शामिल हैं. रक्षामंत्रालय ने 101 उत्पादों की लिस्ट जारी की है. राजनाथ सिंह ने कहा है कि रक्षा मंत्रालय में मेक इन इंडिया को बूस्ट देने के हर संभव उपाय किए जाएंगे. इसके तहत रक्षा उत्‍पादन के स्‍वदेशीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा.

इन रक्षा उपकरणों के आयात पर रोक

आर्टिलरी गन्स जैसे हाईटेक हथियार
असॉल्ट राइफल
कोरवेट्स और सोनार सिस्टम
परिवहन विमान
हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (एलसीएच)
रडार समेत रक्षा सेवाओं की कई अन्य जरूरी वस्तुएं
पहियों वाले बख्तरबंद लड़ाकू वाहन (एएफवी)
पनडुब्बियां और टोएड आर्टिलरी बंदूकें
कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें
क्रूज मिसाइलें और मिसाइल पोत
फ्लोटिंग डॉक, पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर
कम दूरी के समुद्री टोही विमान
हल्के रॉकेट लॉन्चर, मल्टी बैरल रॉकेट लांचर
मिसाइल डेस्ट्रॉयर, रॉकेट
हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें अस्त्र-एमके 1
जहाजों पर लगने वाली मध्यम श्रेणी की बंदूकें

सभी स्टेकहोल्डर्स से बात चीत के बाद निर्णय

राजनाथ सिंह ने कहा कि 101 उत्‍पादों की सूची को सभी हितधारकों से, जिनमें सशस्‍त्र बल, सार्वजनिक व निजी इंडस्‍ट्री हैं, कई स्‍तर की वार्ता और विचार विमर्श के बाद तैयार किया गया है. ऐसा भविष्‍य में गोला बारूद और रक्षा उत्‍पादों के निर्माण की भारतीय इंडस्‍ट्री की क्षमता को बढ़ाने के लिए किया गया है. इन 101 वस्तुओं में सिर्फ आसान वस्तुएं ही शामिल नहीं हैं बल्कि कुछ उच्च तकनीक वाले हथियार सिस्टम भी हैं जैसे आर्टिलरी गन, असॉल्ट राइफलें, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, LCHs, रडार और कई अन्य आइटम.

भारतीय कंपनियों को होगा फायदा

मंत्रालय ने 2020-21 के कैपिटल प्रोक्योरमेंट बजट में घरेलू और विदेशी कैपिटल प्रोक्योरमेंट के लिए भी बंटवारा कर दिया है. साथ ही चालू वित्त वर्ष में घरेलू पूंजीगत खरीद के लिए लगभग 52,000 करोड़ रुपये का एक अलग बजट बनाया गया है. 101 रक्षा उपकरणों के आयात पर लगे इस नए प्रतिबंध के चलते अनुमान है कि अगले 5 से 7 साल के भीतर घरेलू उद्योग में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के अनुबंध किए जाएंगे. अनुमानित तौर पर इसमें से सेना और वायु सेना के लिए लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये के उपकरण और 1.4 लाख करोड़ रुपये के उपकरण नौसेना के लिए होंगे.

आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम

राजनाथ सिंह ने कहा कि यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है. यह भारतीय रक्षा उद्योग को इस सूची में शामिल वस्तुओं का अपने स्वयं के डिजाइन व विकास क्षमताओं का उपयोग करके या डीआरडीओ द्वारा विकसित व डिजाइन की गयी प्रौद्योगिकियों को अपनाकर मौके का फायदा उठाने का अवसर देता है.

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