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Punjab Congress Crisis : पंजाब में कांग्रेस का सियासी संकट जारी, दिल्ली में अमित शाह से मिले कैप्टन अमरिंदर

नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपे जाने और कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बावजूद अचानक प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्षता से इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है.

Updated: Sep 30, 2021 12:27 AM

चंद दिनों पहले ही पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने उनके आवास पहुंच गए. इसके साथ ही कैप्टन के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें और तेज हो गईं. मंगलवार को पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था. कांग्रेस के लिए यह दोहरा झटका माना जा रहा है.

पंजाब में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किए जाने के बाद भी अमरिंदर सिंह ने कहा था कि उनके लिए विकल्प खुले रहेंगे. उसी वक्त से यह कयास लगाया जाने लगा था कि कैप्टन बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. हालांकि मंगलवार को दिल्ली आने के बाद कैप्टन ने कहा था कि वे राजधानी में किसी राजनेता से मिलने नहीं आए हैं, लेकिन बुधवार को उन्होंने तमाम अटकलों को सही साबित करते हुए अमित शाह से मुलाकात कर ली. मुलाकात के बारे में अमरिंदर सिंह के करीबी लोगों के हवाले से मीडिया में कहा गया कि कैप्टन ने गृह मंत्री से किसानों के मसले पर बात की है. लेकिन मौजूदा हालात में इस मुलाकात के सियासी मायने लगाए जा रहे हैं.

अमरिंदर ने कहा था, सिद्धू स्थिर व्यक्ति नहीं हैं

सिद्धू के इस्तीफा देने के बाद पंजाब के नए सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा था कि यह ईगो की लड़ाई नहीं है. वह सिद्धू की नाराजगी दूर करने के लिए तैयार हैं. वह पार्टी नेताओं और सिद्धू को लेकर बातचीत को तैयार हैं. सिद्धू सरकार को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते. इस्तीफा देने के बाद वह उनसे बात कर चुके हैं. अमरिंदर ने सिद्धू के इस्तीफे के बाद कहा था कि वह स्थिर व्यक्ति नहीं है. पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य के लिए तो वह बिल्कुल भरोसे के काबिल नहीं है.

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चन्नी मंत्रिमंडल में अपनी पसंद के मंत्री चाहते थे सिद्धू

सिद्धू ने इस्तीफा देते हुए कहा था कि वह चरित्र के साथ समझौता नहीं कर सकते. पंजाब की खुशहाली और विकास में बाधा आए, वह बर्दाश्त नहीं कर सकते. इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं. हालांकि वह पार्टी की सेवा करते रहेंगे. दरअसल सिद्धू चरणजीत सिंह चन्नी मंत्रिमंडल में कुछ लोगों के शामिल होने से नाराज थे. राज्य के एडवोकेट जनरल के पद पर भी वह अपनी मर्जी का कैंडिडेट देखना चाहते थे.

सिद्धू राणा गुरजीत सिंह को नहीं चाहते थे क्योंकि साल 2018 में बालू खनन मामले के आरोपों के बाद गुरजीत को अमरिंदर सिंह के मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा देना पड़ा था और उनको चन्नी की कैबिनेट में शामिल किया गया था. इसके अलावा यह भी कहा गया है कि वो एपीएस देओल को एडवोकेट जनरल नियुक्त करने के खिलाफ थे और दीपिंदर सिंह पटवालिया को इसकी जगह चाहते थे. सिद्धू के अचानक इस्तीफे से कांग्रेस नेतृत्व भौचक रह गया. हालांकि उसने अभी तक सिद्धू का इस्तीफा मंजूर नहीं किया है. सिद्धू को मनाने की कोशिश जारी है.

 

 

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