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GDP बैक सीरीज डाटा: जानें क्यों उठा विवाद और क्या है पूरा मामला

बुधवार को केन्द्रीय सांख्यिकी मंत्रालय (CSO) द्वारा GDP बैक सीरीज डाटा जारी किए जाने के बाद UPA कार्यकाल के सभी ग्रोथ रेट आंकड़े घट गए हैं.

November 30, 2018 7:12 AM
all you need to know about gdp back series data rowCSO ने जनवरी 2015 से लागू किया कि GDP कैलकुलेशन पुरानी बेस ईयर 2004-05 के बजाय नई 2011-12 बेस ईयर के आधार पर होगी. (Representational Image)

बुधवार को केन्द्रीय सांख्यिकी मंत्रालय (CSO) द्वारा GDP बैक सीरीज डाटा जारी किए जाने के बाद यूपीए कार्यकाल के सभी ग्रोथ रेट आंकड़े घट गए हैं. इसी के साथ ही इस पर बहस भी शुरू हो गई है. विपक्ष का कहना है कि चुनावों से ठीक पहले इन आंकड़ों को जारी किया जाना मोदी सरकार की एक सोची-समझी रणनीति है. वहीं, सरकार का कहना है कि CSO का कामकाज वित्त मंत्रालय के अधीन नहीं है, उसकी अपनी साख है.

अब मुद्दा यह है कि आखिर ये GDP बैक सीरीज डाटा है क्या, इसे क्यों जारी किया गया और इसके मायने क्या हैं? लेकिन इसे जानने से पहले यह जानना जरूरी है कि GDP बैक सीरीज डाटा आया कहां से?

नई बेस ईयर हुई है लागू

दरअसल, CSO ने जनवरी 2015 से लागू किया कि GDP कैलकुलेशन पुरानी बेस ईयर 2004-05 के बजाय नई 2011-12 बेस ईयर के आधार पर होगी. नई बेस ईयर में मिनिस्ट्री आॅफ कॉरपोरेट अफेयर्स के डाटाबेस में मौजूद कॉरपोरेट इन्फॉर्मेशन को शामिल किया गया है. वहीं पुरानी बेस ईयर में कंपनी के फाइनेंसेज पर RBI स्टडी से मिले रिजल्ट्स को आधार बनाया जाता था. इस बदलाव के चलते आंकड़ों में ज्यादा सटीकता आई है. साथ ही यह सिस्टम आॅफ नेशनल अकाउंट्स-2008 में मौजूद यूनाइटेड नेशंस गाइडलाइंस के अनुरूप भी है.

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GDP बैक सीरीज

चूंकि बेस ईयर बदला गया तो पुराने GDP आंकड़ों को नई बेस ईयर के हिसाब से संशोधित किया जा रहा है. ताकि इकोनॉमी को लेकर ज्यादा सटीक आंकड़े सामने आ सकें. इसके तहत इस बार वित्त वर्ष 2004-05 से 2011-12 तक के संशोधित आंकड़ों को जारी किया गया है. नए आंकड़ों में UPA कार्यकाल के दौरान में 2010-11 के तहत जो GDP 10.3 फीसदी के पीक पर रही थी, वह अब 8.5 फीसदी पर आ गई है.इसी तरह 2011-12 में नई सीरीज से GDP ग्रोथ रेट घटकर 5.2 फीसदी रह गई, जो पुरानी सीरीज के आधार पर 6.6 फीसदी थी. 2005-06 और 2006-07 के 9.3- 9.3 फीसदी के ग्रोथ रेट के आंकड़ों को घटाकर क्रमश: 7.9 और 8.1 फीसदी किया गया है. इसी तरह 2007-08 के 9.8 फीसदी के ग्रोथ रेट के आंकड़े को घटाकर 7.7 फीसदी किया गया है.

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all you need to know about gdp back series data rowSource: CSO

क्या थी बेस ईयर बदलने की जरूरत?

ऐसा इकोनॉमी में लगातार होते बदलावों के चलते किया गया. ताकि आर्थिक मोर्चे पर ज्यादा सटीक सूचना मिल सके. पुरानी 2004-05 बेस ईयर पर बेस्ड GDP आज के आर्थिक परिदृश्य की सही तस्वीर पेश नहीं कर पा रही थी. वहीं, नई बेस ईयर कॉरपोरेट सेक्टर के साथ अनआॅर्गनाइज्ड सेक्टर को लेकर भी बेहतर अनुमान लगाने में मददगार है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

HDFC बैंक के इकोनॉमिस्ट पैनल द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट के में कहा गया है कि दोनों सीरीज में आंकड़ों के कलेक्शन के लिए अलग-अलग मेथोडोलॉजी का इस्तेमाल हुआ है. साथ ही सरकार के अधिकारियों और डाटा को लेकर जारी की गई रिलीज के आधार पर यही निष्कर्ष निकलता है कि पुरानी और नई सीरीज के डाटा की तुलना नहीं की जा सकती है और न ही इसकी जरूरत है.

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लेकिन नेशनल स्टेटिस्टिकल कमीशन (NSC) द्वारा तैयार एक अन्य GDP बैक सीरीज के साथ इस नई सीरीज के आंकड़ों की तुलना ​की जा सकती है. NSC ने डॉ. सुदीप्तो मंडल की अध्यक्षता में रियल सेक्टर स्टेटिस्टिक्स पर एक कमेटी गठित की थी. इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट अगस्त 2018 में सौंपी है.

 

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