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दिवाली ने भी बाजार में नहीं फूंकी जान, देश की GDP ग्रोथ रेट और घटेगी: रिपोर्ट

ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (BofA-ML) का कहना है कि सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद दिवाली पर बाजार में डिमांड कमजोर रही.

Updated: Nov 04, 2019 6:32 PM
Indian economy, GDP growth rate,BofA-ML Report, Muted Diwali demand, RBI, GVA growth, FY20 GDP, FY19 GDPब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (BofA-ML) का कहना है कि सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद दिवाली पर बाजार में डिमांड कमजोर रही.

आ​र्थिक विकास दर में लगातार गिरावट और सुस्ती के दौर से गुजर रही भारतीय अर्थव्यवस्था को दिवाली ने ज्यादा निराश किया है. हालात यह बन रहे हैं की आने वाले दिनों में जीडीपी ग्रोथ रेट और घट सकती है. एक ग्‍लोबल फाइनेंशियल सर्विस प्रोवाइडर ने एक रिपोर्ट में यह आशंका जताई है. ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (BofA-ML) का कहना है कि सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद दिवाली पर बाजार में डिमांड कमजोर रही. जिसके चलते चालू वित्त वर्ष 2019-20 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 0.30 फीसदी घटकर 5.8 फीसदी पर आने का अनुमान है.

विदेशी ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (BofA-ML) ने सोमवार को अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिसंबर में अपनी मौद्रिक समीक्षा नीति के बाद नीतिगत ब्याज दरों में 0.25 फीसदी से अधिक कटौती करने की उम्मीद है. जबकि, फरवरी की समीक्षा के बाद वह 0.15 फीसदी की कटौती और कर सकती है.

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5% तक आ गई GDP ग्रोथ रेट

अप्रैल-जून तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि दर गिरकर पांच प्रतिशत तक आ गयी जो पिछले छह साल में सबसे निचला तिमाही आंकड़ा है. वृद्धि दर में यह गिरावट जुलाई-सितंबर अवधि में भी जारी रहने की आशंका है. इसकी प्रमुख वजहों में एक उपभोग में कमी आना है. सरकार और रिजर्व बैंक ने वृद्धि को संबल देने के लिए कई नीतियां शुरू की हैं. हालांकि रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के दौरान देश की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया है.

कर्ज महंगा होना डिमांड में बड़ी बाधा?

बोफा-एमएल के एनॉलिस्ट ने कहा, ‘‘बुरी खबर यह है कि कर्ज की ब्याज दरें अभी भी ऊंची हैं और दिवाली मांग कमजोर रहने से 2019-20 में आर्थिक वृद्धि दर में 0.30 फीसदी की और गिरावट आने की आशंका है. 2019-20 में इसके 5.8 फीसदी पर रहने का अनुमान है.’’ उन्होंने कहा कि मौजूदा नरमी से बाहर आने का एकमात्र रास्ता ब्याज दरों में कटौती करना है.

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