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बैंकों के NPA में आ सकता है तगड़ा उछाल, RBI की रिपोर्ट में आशंका

RBI की ओर से जारी फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों का NPA चालू वित्त वर्ष के अंत तक बढ़कर 12.5 फीसदी हो सकता है.

Published: July 24, 2020 7:34 PM
Banks' gross NPA may rise to 12.5% by March 2021 says RBI FSRकोरोना महामारी के चलते लंबे समय तक जारी लॉकडाउन की वजह से बिजनेस काफी प्रभावित हुआ है

देश में कोरोना महामारी (coronavirus pandemic) के मौजूदा दौर के बीच रिजर्व बैंक (RBI) की एक रिपोर्ट ने बैंकिंग सिस्टम को एक बड़े खतरे के प्रति आगाह किया है. रिजर्व बैंक की ओर से जारी फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट (FSR) के मुताबिक बैंकों का फंसा कर्ज यानी ग्रास गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) चालू वित्त वर्ष के अंत तक बढ़कर 12.5 फीसदी हो सकती है. यह मार्च 2020 में 8.5 फीसदी थी. इससे साफ जाहिर होता है कि कोरोना महामारी के चलते लंबे समय तक जारी लॉकडाउन की वजह से बिजनेस काफी प्रभावित हुआ है और बारोअर्स के रिपेमेंट की स्थिति बिगड़ी है.

रिजर्व बैंक की FSR के अनुसार, बहुत गंभीर दबाव वाली स्थिति में ग्रास एनपीए मार्च 2021 तक 14.7 फीसदी तक जा सकता है. इसमें कहा गया है, ‘‘स्ट्रेस टेस्ट से यह पता चलता है कि सभी कॉमर्शियल बैंकों का ग्रास एनपीए अनुपात मार्च 2020 के 8.5 फीसदी से बढ़कर मार्च 2021 में 12.5 फीसदी तक हो सकता है. यह आकलन बेसलाइन स्थिति के आधार पर किया गया है.’’ बैंकिंग सेक्टर में दो साल के संकट के कारण इसमें खासी बढ़ोतरी हुई.

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘अगर माइक्रोइकोनॉमिक हालात और बिगड़ते हैं तो यह अनुपात 14.7 फीसदी तक जा सकता है.’’ इसमें कहा गया है कि माइक्रोइकोनॉमिक दबाव के दौर में देश के बैंकों की मजबूती का परीक्षण किया गया. यह परीक्षण व्यापक दबाव वाले परीक्षण के जरिये किया गया. इसमें इस बात का आकलन किया गया कि जो भी दबाव होंगे, उसका बैंकों के बही-खातों पर क्या असर होगा.

बैंकों की लोन बुक की हालत और यदि बिगड़ती है, तो इससे कैपिटल बफर प्रभावित होगा और बैंकों के लिए जरूरत के समय कंपनियों को कर्ज देना मुश्किल हो जाएगा. लोग रिपेमेंट में मोहलत यानी लोन मॉरे​टोरियम से कंपनियों को कुछ राहत मिली है लेकिन अगस्त में इस मोहलत के खत्म होने के बाद कई बैंकों के लोन एनपीए में बदल सकते हैं.

आरबीआई की रिपोर्ट में इसके अलावा ग्रास एनपीए और जोखिम भारांश संपत्ति अनुपात के रूप में पूंजी (सीआरएआर) का आकलन किया गया. इसमें तुलनात्मक आधार के साथ तीन परिस्थितियों…मध्यम, गंभीर और बहुत गंभीर… के अंतर्गत परिदृश्य की गणना की गई. रिपोर्ट के अनुसार तुलनात्मक परिदृश्य का आकलन जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि, जीडीपी के अनुपात के रूप में सकल राजकोषीय घाटा और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति समेत अन्य वृहत आर्थिक चरों के अनुमानित मूल्यों के आधार पर किया गया है.

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