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बैंकों के बाद अब NBFCs, HFCs के लोन रेट्स पर RBI की नजर, ये है प्लान

कुल कर्ज बाजार में HFC और NBFC क्षेत्र की 20 प्रतिशत से अधिक भागीदारी है.

September 19, 2019 11:42 AM
After banks, RBI plans to structure loan rates of NBFCs, HFCsImage: Reuters

बैंकों को ​नए रिटेल लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ने का निर्देश देने के बाद अब रिजर्व बैंक (RBI) हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) और नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) के लिए ब्याज दर स्ट्रक्चर को व्यवस्थित करने की योजना बना रहा है. कुल कर्ज बाजार में इस क्षेत्र की 20 प्रतिशत से अधिक भागीदारी है.

एक सूत्र के मुताबिक, HFC या NBFC के लिए मुख्य दर अथवा एक समान ब्याज दर की कोई व्यवस्था नहीं है. इन कंपनियों के लिए रिजर्व बैंक की तरफ से ऐसा कोई नियम नहीं बनाया गया है. आगे कहा कि जब बैंकों के लिए किसी एक्सटर्नल बेंचमार्क से ब्याज दर को जोड़ने की चर्चा हो रही थी, उसी समय HFC और NBFC ब्याज दरों को भी एक एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ने के विषय पर चर्चा हुई. सूत्र ने कहा, ‘‘हमें NBFC और HFC को शिक्षित करने की जरूरत है और उनकी ब्याज दरों में पारदर्शिता की जांच हो रही है. हमें इसे आगे बढ़ाना होगा. हम इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि वे ब्याज दर कैसे निर्धारित करते हैं और यह देखते हैं कि क्या इसके लिए किसी आदेश या संरचना की जरूरत है.’’

अलग हैं बैंक और HFC/NBFC के ऑपरेशन वाले मार्केट

सूत्र ने कहा कि HFC और NBFC उस बाजार में परिचालन नहीं करते हैं, जहां बैंक करते हैं. इन निकायों के लिए कोई मुख्य दर तय करते समय इस पहलू पर ध्यान देना आवश्यक होगा. यह गौर करने की बात है कि NBFC जहां रिजर्व बैंक के नियमन दायरे में हैं, वहीं वित्त वर्ष 2019- 20 का बजट आने तक हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां राष्ट्रीय आवास बैंक के नियमन के तहत थीं.

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बैंकों को RBI का यह है निर्देश

रिजर्व बैंक ने सभी कमर्शियल बैंकों से 4 सितंबर को कहा कि वह फ्लोटिंग दर वाले सभी नए व्यक्तिगत और रिटेल लोन और MSME को दिए जाने वाले फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज को 1 अक्टूबर से किसी एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट से जोड़ें. एक्सटर्नल बेंचमार्क में रेपो रेट, 3 या 6 माह वाले ट्रेजरी बिल यील्ड्स या फाइनेंशियल बेंचमार्क इंडिया द्वारा प्रकाशित कोई अन्य बेंचमार्क ब्याज दर शामिल है.

यह भी कहा गया था कि बैंक ऐसे एक्सटर्नल बेंचमार्क से लिंक्ड लोन को अन्य तरह के कर्जदारों को भी ऑफर कर सकते हैं. बता दें कि देश के कई बैंकों ने सितंबर माह से ही रेपो रेट से लिंक्ड रिटेल लोन देना शुरू कर दिया है.

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