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ADB ने घटाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, कोरोना की दूसरी लहर का असर

Asian Development Bank के ताजा अनुमानों के मुताबिक भारत की जीडीपी विकास दर चालू वित्त वर्ष यानी 2021-22 में 11 फीसदी की बजाय 10 फीसदी रहेगी, जबकि 2022-23 में इसके 7.5 फीसदी रहने के आसार हैं.

Updated: Sep 22, 2021 6:42 PM
ADB scales down India’s economic growth forecastADB ने देश के आर्थिक विकास दर का अनुमान घटाकर 10 फीसदी कर दिया.

एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने भारत में महामारी की दूसरी लहर से हुए नुकसान के कारण चालू वित्त वर्ष (2021-22) के लिए देश के आर्थिक विकास दर (GDP) का अनुमान घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया है. इसके पहले ADB ने अप्रैल में अनुमान लगाया था कि 2021-22 में भारत की जीडीपी विकास दर 11 फीसदी रहने की उम्मीद है. लेकिन ADB ने बुधवार को अपने ताजा इकनॉमिक आउटलुक में वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत के विकास दर पूर्वानुमान को कम कर दिया है. एडीबी के मुताबिक इस साल मई में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के कारण अनुमानों में कटौती करनी पड़ी है.

चालू वित्त वर्ष की बाकी तीन तिमाहियों में अच्छी रिकवरी के आसार

एडीबी का यह भी मानना है कि भारत में कोरोना की तीसरी लहर पर काबू पाए जाने के बाद हालात तेजी से सामान्य हुए हैं. यही वजह है कि विकास दर के अनुमान में कटौती के बावजूद ADB को अब भी भरोसा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में चालू वित्त वर्ष की बाकी तीन तिमाहियों के दौरान अच्छी रिकवरी देखने को मिलेगी. जिससे पूरे वित्त वर्ष की विकास दर 10 फीसदी के स्तर पर बनी रहेगी. लेकिन उसके अगले साल यानी अप्रैल 2022 से मार्च 2023 के दरम्यान विकास दर में कुछ नरमी आएगी और यह 7.5 फीसदी रह सकती है. एडीबी का विकास दर का अनुमान काफी हद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रोजेक्शन से मेल खाता है. RBI ने भी जून में अपने संशोधित अनुमानों में चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की जीडीपी विकास दर 9.5 फीसदी रहने की उम्मीद जाहिर की है.

पिछले वित्त वर्ष के दौरान 7.3 फीसदी गिर गई थी देश की जीडीपी

9.5 फीसदी हो या 10 फीसदी, वित्त वर्ष 2021-22 के लिए जीडीपी विकास दर के ये अनुमान पहली नजर में काफी अच्छे दिखते हैं. लेकिन यहां ध्यान रखना जरूरी है कि 9.5 फीसदी या 10 फीसदी की विकास दर की सबसे बड़ी वजह वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान आई आर्थिक गिरावट है. पिछले कारोबारी साल के दौरान देश की जीडीपी बढ़ने की बजाय 7.3 फीसदी गिर गई थी. इस लिहाज से देखा जाए तो 9.5 फीसदी विकास दर का मतलब असल में 2019-20 के मुकाबले महज 2.2 फीसदी की ग्रोथ है.

एडीबी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में आर्थिक रिकवरी के दौरान कंजप्शन डिमांड को बढ़ने में अभी और वक्त लगेगा. लिहाजा चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक विकास को मजबूती देने में सरकारी खर्च और एक्सपोर्ट्स का योगदान ज्यादा महत्वपूर्ण होगा.  एडीबी ने पूरे एशिया के लिए भी अपने विकास दर अनुमान को 7.3 फीसदी से घटाकर 7.1 फीसदी कर दिया है. हालांकि उसने चीन के विकास दर अनुमान को अब भी 8.1 फीसदी पर बरकरार रखा है.

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