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FY20 में ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 5% ​गिरा; कॉरपोरेट टैक्स में कटौती और आयकर में राहत के कदम बने वजह

वित्त वर्ष 2019-20 में वास्तविक ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 4.92 फीसदी गिरकर 12.33 लाख करोड़ रुपये रहा.

Updated: Jun 07, 2020 6:52 PM
actual Gross direct tax collection dips 4.92 pc to 12.33 lakh cr Rs in FY20 due to reduction in corp tax, increased standard deduction and personal Income Tax exemption limitयदि व्यक्तिगत आयकर और कॉरपोरेट आयकर को पुरानी दरों से वसूला जाता तो 2019-20 के दौरान ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन आठ फीसदी बढ़ सकता था. (Image: PTI)

वित्त वर्ष 2019-20 में वास्तविक ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 4.92 फीसदी गिरकर 12.33 लाख करोड़ रुपये रहा. इसकी प्रमुख वजह कॉरपोरेट कर की दरों में कटौती, स्टैंडर्ड डिडक्शन और व्यक्तिगत आयकर की छूट की सीमा बढ़ाया जाना है. आयकर विभाग ने रविवार को कहा कि यदि व्यक्तिगत आयकर और कॉरपोरेट आयकर को पुरानी दरों से वसूला जाता तो 2019-20 के दौरान ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन के आठ फीसदी बढ़कर 14.01 लाख करोड़ रुपये हो सकता था.

वित्त वर्ष 2018-19 में ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 12,97,674 करोड़ रुपये था. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने एक बयान में कहा, ‘‘यह एक वास्तविकता है कि 2019-20 में शुद्ध डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 2018-19 के मुकाबले कम रहा. लेकिन इसका अनुमान पहले से था. इसकी प्रमुख वजह 2019-20 के दौरान ऐतिहासिक कर सुधार करना है, जिसके चलते ज्यादा रिफंड जारी किए गए.

5.55 लाख करोड़ का आयकर आया

वित्त वर्ष 2019-20 में वास्तविक कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन 6.78 लाख करोड़ रुपये और व्यक्तिगत आयकर कलेक्शन 5.55 लाख करोड़ रुपये रहा. इस प्रकार 2019-20 के लिए वास्तविक टैक्स कलेक्शन 12,33,720 करोड़ रुपये रहा. वित्त वर्ष के दौरान कॉरपोरेट कर की दर में कटौती से टैक्स कलेक्शन में 1.45 लाख करोड़ रुपये की कमी आई. वहीं व्यक्तिगत आयकर की छूट सीमा पांच लाख रुपये तक बढ़ाने और स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा 50,000 रुपये तक बढ़ाने से भी 23,200 करोड़ रुपये कम टैक्स कलेक्शन हुआ.

यदि यह नहीं हुआ होता तो 2019-20 में कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन 8.23 लाख करोड़ रुपये और व्यक्तिगत आयकर कलेक्शन 5.78 लाख करोड़ रुपये होता. इस तरह ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 14.01 लाख करोड़ रुपये होता, जो 2018-19 के मुकाबले 8.03 फीसदी अधिक रहता. वित्त वर्ष 2019-20 में प्रचलित मूल्य पर देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.20 फीसदी रही. वित्त वर्ष 2019-20 में सीबीडीटी ने 1.84 लाख करोड़ रुपये के कर रिफंड जारी किए. यह 2018-19 के 1.61 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 14 फीसदी अधिक है.

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टैक्स के मोर्चे पर सरकार ने क्या दी राहत

सरकार ने पिछले साल सितंबर में किसी तरह की कर छूट इस्तेमाल नहीं करने वाली सभी घरेलू कंपनियों के लिए कर की दर घटाकर 22 फीसदी कर दी थी. इस तरह की कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) के भुगतान से भी राहत दी गई थी. वहीं किसी विशेष कर छूट का लाभ नहीं लेने वाली नई घरेलू विनिर्माण कंपनियों के लिए कर की दर घटाकर 15 फीसदी कर दी गई थी. इन्हें भी मैट से छूट दी गई थी, जबकि मैट के तहत कर छूटों का लाभ उठाकर कर भुगतान करने वाली कंपनियों के लिए मैट की दर भी 18.5 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी कर दी गई. इसी तरह व्यक्तिगत आयकर से छूट की सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये और स्टैंडर्ड डिडक्शन 40,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये किया गया है.

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