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73वां स्वतंत्रता दिवस: जानिए कहां बनता है देश का तिरंगा

क्‍या आप जानते हैं वे कौन से हाथ हैं, जो देश की आन, बान और शान कहे जाने वाले तिरंगे को बनाते हैं?

Updated: Aug 15, 2019 10:21 AM

Indian national flag Tiranga manufacturing place

73rd Independence Day: पूरे देश में आज 73वें स्‍वतंत्रता दिवस का जश्‍न मनाया जा रहा है. दोबारा सत्ता में आने यानी मोदी 2.0 के बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर 15 अगस्‍त को दिल्‍ली के लाल किले पर राष्‍ट्रीय ध्‍वज ‘तिरंगा’ फहराएंगे. लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि देश के लाल किले, राष्‍ट्रपति भवन, संसद भवन, हर सरकारी बिल्डिंग पर, हमारी सेना द्वारा फ्लैग होस्टिंग के वक्‍त यहां तक कि विदेश में मौजूद इंडियन एंबेसीज में फहराए जाने वाले झंडे कहां बनते हैं? वे कौन से हाथ हैं, जो देश की आन, बान और शान कहे जाने वाले तिरंगे को बनाते हैं?

कर्नाटक के हुबली शहर के बेंगेरी इलाके में स्थित कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्‍त संघ (फेडरेशन) यानी KKGSS राष्ट्रध्वज ‘तिरंगा’ बनाती है. KKGSS खादी व विलेज इंडस्‍ट्रीज कमीशन द्वारा सर्टिफाइड देश की अकेली ऑथराइज्‍ड नेशनल फ्लैग मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट है. यानी इसके अलावा राष्ट्रीय ध्वज कोई और नहीं बनाता है. इसे हुबली यूनिट भी कहा जाता है.

कब से बना रही तिरंगा

KKGSS की स्‍थापना नवंबर 1957 में हुई थी. इसने 1982 से खादी बनाना शुरू किया. 2005-06 में इसे ब्‍यूरो ऑफ इंडियन स्‍टैंडर्ड्स (BIS) से सर्टिफिकेशन मिला और इसने राष्‍ट्रीय ध्‍वज बनाना शुरू किया. देश में जहां कहीं भी आधिकारिक तौर पर राष्‍ट्रीय ध्‍वज इस्‍तेमाल होता है, यहीं के बने झंडे की सप्‍लाई की जाती है. विदेशों में मौजूद इंडियन एंबेसीज यानी भारतीय दूतावासों के लिए भी यहीं से तिरंगे बनकर जाते हैं. कोई भी ऑर्डर कर कुरियर के जरिए ​राष्ट्रीय ध्वज KKGSS खरीद सकता है.

धागा व कपड़ा बनाने की यूनिट अलग

KKGSS की बागलकोट यूनिट भी है. यहां हाई क्‍वालिटी के कच्‍चे कॉटन से धागा बनाया जाता है. धागा हाथ से मशीनों ओर चरखा चलाकर बनाया जाता है. गाडनकेरी, बेलॉरू, तुलसीगिरी यूनिट में कपड़ा तैयार होता है. फिर हुबली यूनिट में कपड़े की डाइंग व अन्य प्रॉसेस की जाती है. तिरंगे के लिए तैयार किया जाने वाला कपड़ा जीन्स से भी ज्यादा मजबूत होता है. KKGSS में बनने वाले झंटे केवल कॉटन और खादी के होते हैं.

टेबल से लेकर राष्‍ट्रपति भवन तक के लिए अलग-अलग साइज के झंडे

Indian national flag Tiranga manufacturing place

1- सबसे छोटा 6:4 इंच- मीटिंग व कॉन्‍फ्रेंस आदि में टेबल पर रखा जाने वाला झंडा
2- 9:6 इंच- VVIP कारों के लिए
3- 18:12 इंच- राष्‍ट्रपति के VVIP एयरक्राफ्ट और ट्रेन के लिए
4- 3:2 फुट- कमरों में क्रॉस बार पर दिखने वाले झंडे
5- 5.5:3 फुट- बहुत छोटी पब्लिक बिल्डिंग्‍स पर लगने वाले झंडे
6- 6:4 फुट- मृत सैनिकों के शवों और छोटी सरकारी बिल्डिंग्‍स के लिए
7- 9:6 फुट- संसद भवन और मीडियम साइज सरकारी बिल्डिंग्‍स के लिए
8- 12:8 फुट- गन कैरिएज, लाल किले, राष्‍ट्रपति भवन के लिए
9- सबसे बड़ा 21:14 फुट- बहुत बड़ी बिल्डिंग्‍स के लिए

आसान नहीं होता देश का राष्‍ट्रीय ध्‍वज बनाना

KKGSS में बनने वाले राष्ट्रीय ध्वज की क्वालिटी को BIS चेक करता है और इसमें थोड़ा सा भी डिफेक्ट होने पर रिजेक्ट कर देता है. बनने वाले तिरंगों में से लगभग 10 फीसदी रिजेक्‍ट हो जाते हैं. हर सेक्‍शन पर कुल 18 बार तिरंगे की क्‍वालिटी चेक की जाती है. राष्ट्रीय ध्वज को कुछ मानकों पर खरा उतरना होता है, जैसे- KVIC और BIS द्वारा निर्धारित रंग के शेड से तिरंगे का शेड अलग नहीं होना चाहिए; केसरिया, सफेद और हरे कपड़े की लंबाई-चौड़ाई में नहीं जरा सा भी अंतर नहीं होना चाहिए; अगले-पिछले भाग पर अशोक चक्र की छपाई समान होनी चाहिए.

फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 के प्रावधानों के मुताबिक, झंडे की मैन्‍युफैक्‍चरिंग में रंग, साइज या धागे को लेकर किसी भी तरह का डिफेक्‍ट एक गंभीर अपराध है और ऐसा होने पर जुर्माना या जेल या दोनों हो सकते हैं.

कितने लोगों की है मेहनत

Indian national flag Tiranga manufacturing place

KKGSS के तहत तिरंगे के लिए धागा बनाने से लेकर झंडे की पैंकिंग तक में लगभग 250 लोग काम करते हैं. इनमें लगभग 80-90 फीसदी महिलाएं हैं. तिरंगे को इतने चरणों में बनाया जाता है- धागा बनाना, कपड़े की बुनाई, ब्‍लीचिंग व डाइंग, चक्र की छपाई, तीनों पटिृयों की सिलाई, आयरन करना और टॉगलिंग (गुल्‍ली बांधना).

अन्‍य उत्‍पाद भी बनाता है KKGSS

KKGSS का प्रमुख उत्‍पाद राष्‍ट्रीय ध्‍वज है. इसके अलावा KKGSS खादी के कपड़े, खादी कारपेट, खादी बैग्‍स, खादी कैप्‍स, खादी बेडशीट्स, साबुन, हाथ से बना कागज और प्रोसेस्‍ड शहद भी बनाता है.

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