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गगनयान मिशन के लिए चुने गए 12 IAF पायलट, डेंटल प्रॉब्लम की वजह से रिजेक्ट हुए कई लोग

भारत की पहली स्पेस फ्लाइट गगनयान के लिये 12 IAF पायलट फाइनल ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिये जाने के लिये चुने गए हैं.

November 16, 2019 7:42 PM
Representational Image

भारत की पहली स्पेस फ्लाइट गगनयान के लिये 12 IAF पायलट फाइनल ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिये जाने के लिये चुने गए हैं. पायलटों का चयन 60 कैंडिडेट्स के बीच से हुआ है जो रुस की स्टार सिटी में Yuri Gagarin Cosmonaut ट्रेनिंग सेंटर में 45 दिन चले ट्रेनिंग प्रोग्राम का हिस्सा थे. अभी तक सात IAF पायलट ने अपनी ट्रेनिंग पूरी की है. इन सात पायलट का समूह अब भारत वापस आएगा जहां ये लोग मुश्किल ट्रेनिंग से गुजरेंगे और कई कठिन टेस्ट का सामना करेंगे जिसमें मिशन केंद्रित ट्रेनिंग भी शामिल होगी. एक बार प्रक्रिया के पूरे हो जाने पर तीन अंतरिक्ष यात्रियों का फाइनल सिलेक्शन होगा. ये 2022 में प्रस्तावित भारत के स्पेश मिशन पर जाएंगे.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, बहुत सारे IAF पायलेट के प्राइमेरी फिजिकल टेस्ट में फेल होने की वजह डेंटल इश्यू थे. IAF के इंस्ट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन(IAM) के एक्सपर्ट्स ने यह जानकारी इंडियन सोसायटी ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन की सालाना कॉन्फ्रेंस में दी.

रुसी एक्सपर्ट्स की टीम ने किया चयन

IAM भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चुनने की यह प्रक्रिया तीन दशक बाद कर रहा है. इसने 1982 में राकेश शर्मा और 1984 में रवीश मलहोत्रा को रुस के Soyuz T-11 मिशन को चुना था. रिपोर्ट के मुताबिक, IAM ने 24 टेस्ट पायलट में से 16 पायलट को चुना था. IAM ने इस प्रक्रिया में माइनर फिजिकल स्थितियों को नजरअंदाज किया था लेकिन रुस के एक्सपर्ट्स की टीम ने इन पायलट को डेंटल मुद्दों को लेकर रिजेक्ट कर दिया. इस टीम को एयरोस्पेस मेडिसिन में बहुत अनुभव है और उन्होंने कुल मिलाकर स्पेस में 560 दिन बिताए हैं.

ग्रुप कैप्टन एम एस नटराज, जो अंतरिक्ष यात्रियों को चुनने के लिये टॉप सिलेक्शन ऑफिसर थे, उन्होंने बताया कि उन लोगों ने 16 डोजियर तैयार किये थे और उन्हें रुस के एक्सपर्ट्स की टीम के सामने पेश किया गया. सिलेक्शन की प्रक्रिया में सिर्फ 16 लोग ही पास हुए थे. उन्होंने जो छोटी चीज समझी, उससे बड़ा फर्क आ गया. डेंटल चीजें अंतरिक्ष में बड़ी मुश्किलें पैदा करती हैं. रुसी एक्सपर्ट्स ने इस बात की पुष्टि की, कि कोई डेंटल प्रोब्लम्स नहीं होनी चाहिए.

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अंतरिक्ष यात्रियों के लिये अच्छी डेंटल हेल्थ जरूरी

यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) के मुताबिक अंतरिक्ष यात्रियों के लिये अच्छी डेंटल हेल्थ होना बहुत जरूरी है क्योंकि अंतरिक्ष में एक्सलरेशन और वाइब्रेशन्स बहुत ज्यादा होती हैं और इससे थोड़े से भी खराब दात अपनी जगह से हिल सकते हैं. दबाव से दांतों में दर्द भी हो सकती है. रुसी अंतरिक्ष यात्री Yuri Romenenko को 1978 में Salyut 6 मिशन के कमांडर के तौर पर दांतों में बहुत दर्द की मुश्किल हुई थी. दांतों से जुड़ी दिक्कतों के अलावा सुनने और देखने में परेशानी की भी जांच की गई.

(Story: Tarun Bhardwaj)

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