FDI in India: पिछले साल 30% कम आया एफडीआई, फिर भी टॉप 10 देशों में बना रहा भारत

FDI in India: पिछले साल भारत में 30 फीसदी कम एफडीआई आया लेकिन एफडीआई आकर्षित करने में यह टॉप 10 देशों में बना हुआ है.

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FDI in India: संयुक्त राष्ट्र ने आज गुरुवार (9 जून) कहा कि पिछले साल 2021 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) सालाना आधार पर 1900 करोड़ डॉलर घट गया. हालांकि इसके बावजूद एफडीआई को आकर्षित करने के मामले में यह दुनिया के टॉप 10 देशों में बना रहा. भारत में पिछले साल 4500 करोड़ डॉलर (3.50 लाख करोड़ रुपये) एफडीआई आया जबकि वर्ष 2020 में 6400 करोड़ डॉलर (4.98 लाख करोड़ रुपये) की एफडीआई हासिल किया था. संयुक्त राष्ट्र की विश्व निवेश रिपोर्ट के अनुसार एफडीआई हासिल करने के मामले में अमेरिका, चीन, हांगकांग, सिंगापुर, कनाडा और ब्राजील के बाद भारत सातवें स्थान पर है. दक्षिण अफ्रीका, रूस और मेक्सिको भी एफडीआई पाने के मामले में शीर्ष 10 देशों में शामिल हैं.

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भारत के लिए ये रहा पॉजिटिव

यूएन (संयुक्त राष्ट्र) की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल एफडीआई में गिरावट रही लेकिन नए इंटरनेशनल प्रोजेक्ट को लेकर कई सौदे हुए. इसके तहत 108 परियोजनाओं के लिये समझौते हुए जबकि पिछले 10 साल में इसकी संख्या औसतन 20 थी. सबसे अधिक सौदे रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की 23 परियोजनाओं को लेकर हुए. बड़ी परियोजनाओं की बात करें तो आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील के 1350 करोड़ डॉलर (1.05 लाख करोड़ रुपये) के निवेश से भारत में एक स्टील और सीमेंट कारखाना लगा और सुजुकी मोटर ने 240 करोड़ डॉलर (18.7 हजार करोड़ रुपये) के निवेश से एक नये कार विनिर्माण संयंत्र का निर्माण किया.

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पिछले साल बेहतर रही वैश्विक FDI लेकिन इस साल निगेटिव आसार

व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की विश्व निवेश रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर पिछले साल एफडीआई सुधरकर महामारी से पहले स्तर पर आ गया और करीब 1.60 लाख करोड़ डॉलर (124.50 लाख करोड़ रुपये) रहा.हालांकि एफडीआई को लेकर इस साल संभावना अच्छी नहीं है. इस साल रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण सुरक्षा और मानवीय संकट, युद्ध के चलते आर्थिक झटकों, ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी और निवेशकों में अनिश्चितता से एफडीआई प्रभावित होगा. रिपोर्ट के मुताबिक रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते सभी देशों में आर्थिक विकास और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को लेकर अंतरराष्ट्रीय निवेश के मामले में दूरगामी प्रभाव होंगे. यह स्थिति ऐसे समय उत्पन्न हुई है जब दुनिया कोरोना महामारी के प्रभाव से उबर रही थी.

(इनपुट: पीटीआई)

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