कमोडिटी की कीमतों में भारी गिरावट, रिकॉर्ड हाई से 56% तक टूटा भाव, कैसे बनाएं मुनाफे की स्ट्रैटेजी?

एक्सपर्ट का कहना है कि कमोडिटी में गिरावट का ट्रेंड आगे भी जारी रहने का अनुमान है. निवेशकों को जल्दबाजी की बजाए कीमतें स्टेबल होने का इंतजार करना चाहिए.

कमोडिटी की कीमतों में भारी गिरावट, रिकॉर्ड हाई से 56% तक टूटा भाव, कैसे बनाएं मुनाफे की स्ट्रैटेजी?
पिछले कुछ दिनों से एग्री कमोडिटी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है. (File)

Commodity Prices Fall: पिछले कुछ दिनों से एग्री कमोडिटी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है. साल के पहले कुछ महीनों में जहां कमोडिटी इनफ्लेशन ने चिंता बढ़ाई थी, अब उनमें नरमी आने लगी है. चना, अरहर (लाल), उड़द, सोयाबीन, कॉटन और चावज जैसी कमोडिटी की कीमतें रिकॉर्ड हाई से 58 फीसदी टूट गई हैं. साल 2022 के हाई से भी इनमें बड़ी गिरावट आई है. एक्सपर्ट का कहना है कि कमोडिटी की कीमतों में गिरावट का बड़ा कारण इस साल बेहतर मॉनसून का अनुमान है. अबतक बुआई एरिया में ग्रोथ देखने को मिली है और पैदावार बंपर रहने का अनुमान हैं. वहीं सरकार ने कमोडिटी पर कंट्रोल के लिए हाल फिलहाल में जो कदम उठाए हैं , उनका भी फायदा मिल रहा है.

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कमोडिटी में बड़ी गिरावट

कॉटन की कीमतों 24 मई 2022 के रिकॉर्ड हाई 48285 रुपये से करीब 9 फीसदी गिरावट आई है. 2 जुलाई को यह 43982 रुपये के भाव पर आ गया है.

सोयाबीन में आलटाइम हाई से करीब 38 फीसदी गिरावट आई है. यह 10200 रुपये के भाव से घटकर 6350 रुपये पर आ गया है. सोया ऑयल में रिकॉर्ड हाई से 22 फीसदी गिरावट आई है.

सरसों का भाव आलटाइम हाई से करीब 23 फीसदी टूट गया है. सरसों तेल भी करीब 23 फीसदी डिस्काउंट पर आ गया है.

चना अक्टूबर 2016 में आलटाइम हाई 11000 रुपये से 56 फीसदी टूटकर 4818 रुपये पर आ गया है. साल 2022 में चना का हाई 5292 रुपये है.

अरहर (लाल) भी अक्टूबर 2016 में आलटाइम हाई 15300 रुपये से 56 फीसदी टूटकर 6700 रुपये पर आ गया है. साल 2022 में चना का हाई 6900 रुपये है.

उड़द भी अक्टूबर 2016 में आलटाइम हाई 14000 रुपये से 44 फीसदी टूटकर 7850 रुपये पर आ गया है. साल 2022 में चना का हाई 7950 रुपये है.

CPO अप्रैल 2022 में अपने रिकॉर्ड हाई 1617 रुपये से 30 फीसदी टूटकर 1138 रुपये पर आ गया है. जबकि मक्का 25 मार्च 2022 में अपने रिकॉर्ड हाई 2450 रुपये से 8 फीसदी टूटकर 2250 रुपये पर आ गया है. गेहूं इस साल अपने हाई से 6 फीसदी टूटा है, जबकि चावल फ्लैट रहा है.

(source: ओरिगो कमोडिटीज)

कैसे बनाएं निवेश की रणनीति

IIFL के VP-रिसर्च, कमोडिटी, अनुज गुप्ता का कहना है एग्री कमोडिटी में गिरावट बेहतर मॉनसून अनुमान के चलते है. अबतक मॉनसून की प्रोग्रेस अच्छी दिख रही है. बुआई का रकबा भी इस साल बढ़ा है. पैदावार बेहतर रहने की उम्मीद है. दूसरी ओर सरकार ने बढ़ रही कमोडिटी की कीमतों को कंट्रोल करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं. मसलन एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाना, ड्यूटी फ्री इंपोर्ट. इन सबके चलते भी कीमतें कंट्रोल हुई हैं. वहीं रीसेशन के डर के चलते चीन सहित कई देशों से डिमांड कम हुई है.

उनका कहना है कि अभी ये ट्रेंड आगे भी जारी रहने का अनुमान है. ऐसे में निवेशकों को किसी तरह की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. कीमतें एक बार स्टेबल होने का इंतजार करना चाहिए. अभी अगर पैसा लगाना है तो उन कमोडिटी में लगाएं, जिनमें आगे डिमांड बढ़ने की उम्मीद है. मसलन एडिबल आयल जिसकी याादिशें में जमकर डिमांड रहती है. वहीं सोना और चांदी निवेश के लिए सही विकल्प हैं. गिर रहे इक्विटी मार्केट के दौर में इनमें सेफ हैवन का भी सेंटीमेंट है.

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