अरहर के दाम पर नियंत्रण के लिए केंद्र का कदम, ट्रेडर्स के स्टॉक की निगरानी और आवश्यक वस्तु कानून लागू करने का निर्देश

केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे अपने इलाके में अरहल दाल के स्टॉक का ब्योरा व्यापारियों से लेकर कंज्यूमर अफेयर्स मंत्रालय के पोर्टल पर अपडेट करे.

अरहर के दाम पर नियंत्रण के लिए केंद्र का कदम, ट्रेडर्स के स्टॉक की निगरानी और आवश्यक वस्तु कानून लागू करने का निर्देश
पिछले दो महीने से अरहर दाल की खुदरा कीमत 100 रुपये प्रति किलो के आसपास चल रही थी. लेकिन इस शुक्रवार को ये कीमत बढ़कर 111 रुपये प्रति किलो हो गई.

Tur Dal Prices: अरहर दाल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी को रोकने के लिए केन्द्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों से कहा है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में तूर यानी अरहर दाल के स्टॉक की निगरानी करें और राज्य के सभी व्यापारियों द्वारा जमा किए गए स्टॉक की जानकारी लेकर केंद्र सरकार को सौंपें. केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वे अपने क्षेत्र में मौजूद अरहर स्टॉक के आंकड़े डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स के ऑनलाइन मॉनिटरिंग पोर्टल के जरिए अपडेट करते रहें. सरकार ने अरहल दाल की कीमतों पर काबू पाने के लिए सभी राज्य सरकारों से आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 (Essential Commodities Act, 1955) के प्रावधानों को लागू करने के लिए भी कहा है.

इसके अलावा सरकार ने केंद्र सरकार ने इस महीने से शुरू हो रहे त्योहारों के सीजन के दौरान दालों की कीमतों को और बढ़ने से रोकने के लिए भी जरूरी कदम उठाया है. इसके तहत सरकार ने बफर स्टॉक में रखी 38 लाख टन दालों को घरेलू आपूर्ति के लिए खुले बाजार में जारी करने का फैसला किया है. इस स्टॉक में 3 लाख टन चना भी शामिल है.

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कीमतों में बढ़ोतरी की क्या है वजह

कंज्यूमर अफेयर्स डिपार्टमेंट के मुताबिक अरहर दाल की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण पिछले साल की अपेक्षा इस बार दाल की पैदावार में कमी आने की आशंका है. इसकी मुख्य वजह देश में सबसे ज्यादा दाल की पैदावार करने वाले कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भारी बारिश और जलभराव है. दरअसल खराब मौसम के कारण इन राज्यों में खरीफ की बुवाई में देरी हुई है. यही कारण है कि जुलाई के दूसरे सप्ताह से अरहर की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है.

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अरहर की खेती का रकबा हुआ 11 फीसदी कम

कृषि मंत्रालय ने शुक्रवार को खरीफ फसलों की बुवाई से संबंधित आंकड़े जारी किए हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक इस साल महज 42 लाख हेक्टेयर इलाके में अरहर की बुवाई की गई है, जबकि पिछले साल इसकी बुवाई 47 लाख हेक्टेयर में हुई थी. यानी पिछले सीजन के मुकाबले इस सीजन में अरहर की खेती का रकबा 11 फीसदी कम हो गया है.उपभोक्ता मामलों के विभाग के प्राइस म़ॉनिटरिंग सेल के मुताबिक पिछले दो महीने से अरहर दाल की खुदरा कीमत 100 रुपये प्रति किलो के आसपास चल रही थी. लेकिन इस शुक्रवार को ये कीमत बढ़कर 111 रुपये प्रति किलो हो गई.
(Article : Sandip Das)

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