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क्या ​होते हैं बैंकिंग और PSU फंड? 1, 3 और 5 साल में FD से ऊंचा दे रहे हैं रिटर्न, चेक करें डिटेल

बैंकिंग और पीएसयू फंड्स एक फिक्सड इनकम फंड होते हैं, जो डेट और मनी मार्केट में निवेश करते हैं.

Updated: Jul 02, 2020 4:32 PM
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बैंकिंग और पीएसयू फंड्स एक फिक्सड इनकम फंड होते हैं, जो डेट और मनी मार्केट में निवेश करते हैं. इन्हें बैंक, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) और पब्लिक फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस (PFI) द्वारा जारी किया जाता है. सिक्यु​रिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड आफ इंडिया (SEBI) के नियमों के मुताबिक बैकिंग और पीएसयू फंड्स को अपने कुल एसेट्स का कम से कम 80 फीसदी हिस्सा इसी तरह के संस्थाओं में निवेश करना होता है. डेट और मनीमार्केट के तहत जो बैंक और पीएसयू फंड्स जारी किए जाते हैं, उनकी क्रेडिट क्वालिटी दूसरे निजी इंस्ट्रूमेंट से कही ज्यादा होती है. 31 मई 2020 तक करीब 19 बैकिंग और पीएसयू डेट स्कीम उपबल्ध है, जिनकी एयूएम 89,962 करोड़ रुपए की है.

निवेश की रणनीति

इस तरह के निवेश में 4 तरह की रणनीति अहम होती है.

हाई क्रेडिट क्वालिटी मेनटेन करना: इस तरह के स्कीम्स ज्यादातर हाई क्वालिटी वाले पेपर्स में निवेश का लक्ष्य रखती हैं.

शॉर्ट टु मॉडरेट ड्यूरेशन प्रोफाइल: इन स्कीम्स में मॉडरेट इंटरेस्ट रेट रिस्क होता है. बैकिंग और पीएसयू फंड्स के पोर्टफोलियों की अवधि 2 से 5 साल के लिए होती है.

मेच्योरिटी तक रखें: इस तरह की योजनाओं को मेच्योरिटी तक रोक कर रखना चाहिए. ये आम तौर पर मेच्योरिटी के लिए ही धारण की जाती हैं. डेट औऱ मनी मार्केट से इस तरह की योजनाओं में मेच्योरिटी पर ब्याज के साध मूलधन प्राप्त होता है.

मध्यम अवधि के लिए सक्रिय प्रबंधन: निधि प्रबंधक अपनी ब्याज दर आउटलुक के आधार पर सक्रिय अवधि कॉल करते हैं. पिछले एक साल में ब्याज दरें गिरने के चलते इस तरह की योजनाओं में डबल डिजिट का ग्रोथ मिला है.

बैंकिंग और पीएसयू फंड्स में क्यों निवेश करें?

बैंकिंग और पीएसयू फंड्स में इंटरेस्ट रिस्क समान्य तौर पर मॉडरेट होते हैं. कम ब्याज दरों के बाद भी आपकी धनराशि लाभान्वित होती है. बढ़ती ब्याज दर के माहौल में नकारात्मक जोखिम सीमित होता है. ये योजनाएं आम तौर पर एक अच्छी क्रेडिट गुणवत्ता होने के कारण मेच्योरिटीपर आकर्षक रिटर्न देती हैं.

सबसे पहले, सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक जिसने बैंकिंग और पीएसयू फंड को अच्छा रिटर्न देने में सक्षम बनाया है, वह है बेहतर क्रेडिट गुणवत्ता’. ऐसे इंस्ट्रूमेंट जिनमें ये योजनाएं सेबी के निर्देश के अनुसार निवेश करती हैं, वे स्वाभाविक रूप से हाई क्रेडिट क्वालिटी की होती हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि सॉवरेन स्टेटस की वजह से इन्हें सरकार का समर्थन है. बैंक (सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र दोनों) को हाई क्रेडिट रेटिंग मिली होती है क्योंकि वे रेगुलेटगेड एंटीटीज हैं और अच्छी तरह से कैपिटलाइज होते हैं.

दूसरी बात यह है कि बैंकिंग और पीएसयू फंड ने ज्यादातर डेट फंड श्रेणियों को बेहतर बनाया है. मेच्योरिटी प्रोफाइल स्पेक्ट्रम भर में बैंकिंग और पीएसयू फंड श्रेणी के मुकाबले कई अन्य डेट फंड श्रेणियों का औसत वार्षिक रिटर्न बेहतर रहा है. बैंकिंग और पीएसयू फंड स्पष्ट रूप से अधिकांश डेट फंड श्रेणियों से बेहतर प्रदर्शन करते हैं.

डेट फंड श्रेणी का रिटर्न

(15 जून 2020 को समाप्त होने वाली अवधि तक)

कटेगिरी                                                            1 साल रिटर्न       3 साल रिटर्न        5 साल रिटर्न

Banking and PSU Funds                             10.6%               8.2%                   8.4%
Dynamic Bond Funds                                  5.0%                 8.6%                   5.9%
Gilt Funds                                                      11.9%                7.8%                    9.3%
Corporate Bond Funds                                10.8%               7.3%                    7.9%
Credit Risk Funds                                         -2.8%               0.9%                   4.0%
Short Duration Funds                                  7.6%                 5.6%                    6.8%
Low Duration Funds                                    3.8%                 3.9%                    5.4%
Money Market Funds                                   7.4%                 7.2%                    7.3%

Source: Advisorkhoj research, as on 15th June 2020.

नोट: इन फंड में पिछला प्रदर्शन भविष्य में बरकरार रह भी सकता है और नहीं भी. डेटा/ प्रदर्शन योजनाओं के वर्ग से संबंधित है और किसी भी तरह से फंड की किसी भी व्यक्तिगत योजना के प्रदर्शन का आंकलन नहीं करता है.

क्यों बढ़ रहा है इन फंडों का आकर्षण

बाजार के मौजूदा आर्थिक माहौल को देखते हुए कहा जा सकता है कि विकास की गति धीमी रह सकती है. आरबीआई आगे भी ब्याज दरों में कटौती कर सकती है. ऐसे में डेट म्यूचुअल फंडों द्वारा बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद बढ़ जाती है. ये ट्रेडिशनल फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट मसलन एफडी आदि से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. मौजूदा परिस्थितियों में बैंकिंग और पीएसयू फंड अच्छी तरह से अनुकूल हैं क्योंकि उनके पास अट्रैक्टिव यील्ड, मॉडरेट इंटरेस्ट रिस्क और सबसे महत्वपूर्ण बात हाई क्रेडिट क्वालिटी है.

ये फंड्स मॉडरेट जोखिम वाले निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं. अगर निवेशक 3 साल से अधिक समय तक निवेश करते रहे तो लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ का आनंद ले सकते हैं. अगर बैंकिंग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अपनी निवेश जरूरतों के लिए उपयुक्त हैं, तो निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करना चाहिए.

(लेखक: श्री वैभव शाह, हेड, प्रोडक्ट्स, मिराए एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स इंडिया प्रा. लिमिटेड)

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