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क्यों गिर रहा है रुपया? 4 बड़ी वजहें

इस साल जनवरी में जहां एक डॉलर के लिए 63.64 रुपये देने होते थे वहां अब 72 रुपये देने होते हैं. इस तरह रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है.

September 14, 2018 9:04 AM
Indian Rupees, US Dollar, why rupee is falling against dollar 2018, indian rupee news today, will rupee fall further against dollar, will rupee fall further against dollar 2018, why is the value of indian rupee falling, Crude, Export Importइस साल जनवरी में जहां एक डॉलर के लिए 63.64 रुपये देने होते थे वहां अब 72 रुपये देने होते हैं. इस तरह रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है.

केंद्र सरकार ने रुपये की गिरावट को थामने की हरसंभव कोशिश करने का भरोसा दिलाया है. इसका असर पिछले कारोबारी सत्र में देखने को मिला कि डॉलर के मुकाबले रुपये में जबरदस्त रिकवरी आई. हालांकि रुपये में और रिकवरी की अभी आवश्यकता है.

डॉलर के मुकाबले रुपया बुधवार को रिकॉर्ड 72.91 के स्तर तक लुढ़कने के बाद संभला और 72.19 रुपये प्रति डॉलर के मूल्य पर बंद हुआ. इससे पहले मंगलवार को 72.69 पर बंद हुआ था. इस साल जनवरी में जहां एक डॉलर के लिए 63.64 रुपये देने होते थे वहां अब 72 रुपये देने होते हैं. इस तरह रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है.

डॉलर की मांग और आपूर्ति बढ़ी

दुनिया के देशों से लेन-देन के लिए आमतौर पर डॉलर की जरूरत होती है ऐसे में डॉलर की मांग बढ़ने और आपूर्ति कम होने पर स्थानीय करंसी कमजोर होती है. एंजेल ब्रोकिंग के करेंसी एनालिस्ट अनुज गुप्ता ने रुपये में आई हालिया गिरावट पर कहा, “भारत को कच्चे तेल का आयात करने के लिए काफी डॉलर की जरूरत होती है और हाल में तेल की कीमतों में जोरदार तेजी आई है जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है. वहीं, विदेशी निवेशकों द्वारा निवेश में कटौती करने से देश से डॉलर का आउटफ्लो बढ़ गया है। इससे डॉलर की आपूर्ति घट गई है.”

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निर्यात घटना भी बड़ी वजह

उन्होंने बताया कि आयात ज्यादा होने और निर्यात कम होने से चालू खाते का घाटा बढ़ गया है, जोकि रुपये की कमजोरी की बड़ी वजह है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू खाता घाटा तकरीबन 18 अरब डॉलर हो गया है. जुलाई में भारत का आयात बिल 43.79 अरब डॉलर और निर्यात 25.77 अरब डॉलर रहा. दूसरी ओर, विदेशी मुद्रा का भंडार लगातार घटता जा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार 31 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह को 1.19 अरब डॉलर घटकर 400.10 अरब डॉलर रह गया.

राजनीतिक अस्थिरता भी बिगाड़ रही रुपये का बाजार

गुप्ता बताते हैं, “राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनने से भी रुपये में कमजोरी आई है. आर्थिक विकास के आंकड़े कमजोर रहने की आशंकाओं का भी असर है कि घरेलू करंसी डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रही है. जबकि विश्व व्यापार जंग के तनाव में दुनिया की कई उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं.”

अमेरिकी की मजबूती से लग रहा है झटका

अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगातार मजबूती के संकेत मिल रहे हैं जिससे डॉलर दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ है. अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती आने से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल कर ले जा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि संरक्षणवादी नीतियों और व्यापारिक हितों के टकराव के कारण अमेरिका और चीन के बीच पैदा हुई व्यापारिक जंग से वैश्विक व्यापार पर असर पड़ा है.

(इनपुट: आईएएनएस)

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