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राहत पैकेज और रेट कट के बाद भी बाजार में क्यों आई गिरावट, निवेशकों के लिए अब क्या हैं विकल्प?

राहत पैकेज और दरों में कटौती जैसे उपाय भी बाजार के सेंटीमेंट को बूस्ट करने में कामयाब नहीं हुए.

March 30, 2020 4:58 PM
RBI Rate Cut, Stimulus Package, stock market sentiments, lift stock market sentiment, COVID-19 outbreak, coronavirus, global economy, cut growth predictionराहत पैकेज और दरों में कटौती जैसे उपाय भी बाजार के सेंटीमेंट को बूस्ट करने में कामयाब नहीं हुए.

Stock Market Fall Even Rate Cut & Relief Package: पिछले हफ्ते सरकार ने कोरोना वायरस से आर्थिक नु​कसान को देखते हुए 2 बड़े फैसले लिए. सबसे पहले गुरूवार को सरकार ने 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का एलान किया. वहीं, शुक्रवार को आरबीआई ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ऐतिहासिक रेट कट किया और रेपो रेट में 75 बेसिस प्वॉइंट की कटौती की. इन उपायों के बाद भी सोमवार को बाजार में भारी गिरावट आ गई. सेंसेक्स करीब 1375 अंक टूटकर बंद हुआ तो निफ्टी भी 8300 के नीचे फिसल गया. राहत पैकेज के बाद आखिर बाजार के सेंटीमेंट क्यों खराब बने हुए हैं. ऐसी दशा में निवेशकों के सामने कनफ्यूजन है कि उन्हें क्या करना चाहिए.

अर्थव्यवस्था को लेकर बाजार की चिंता बढ़ी

फॉर्चून फिस्कल के डायरेक्टर जगदीश ठक्कर का कहना है कि सरकार ने 75 बेसिस प्वॉइंट रेट कट और सीआरआर में 1 फीसदी कटौती कर लिक्विडिटी के उपाय किए हैं. वहीं, राहत पैकेज का भी एलान किया गया. लेकिन कोरोना वायरस को लेकर बाजार की उम्मीदें कुछ ज्यादा हैं. अमेरिका में भी राहत पैकेज के बाद बाजार पर दबाव बना हुआ है. देखें तो अब बाजार की निगाहें कोरोना वायरस ग्राफ पर है. बाजार की असल चिंता अब कोरोना आउटब्रेक के चलते अर्थव्यवस्था पर असर है. अर्थव्यवस्था में कैसे ग्रोथ आएगी, इसकी तस्वीर साफ न होने के चलते निवेशक डरे हुए हैं.

बैंक शेयरों में बिकवाली

एंजेल ब्रोकिंग के इक्विटी टेक्निकल एनालिस्ट रुचित जैन का कहना है कि ग्लोबल स्तर पर कोरोना वायरस को लेकर अभी कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है. अब अन्य किसी खबर की तुलना में बाजार कोरोना वायरस से जुड़ी खबरों पर ज्यादा रिएक्ट कर रहा है. यह सिर्फ मानव जीवन ही नहीं, बल्कि ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है. इस वजह से आज घरेलू बाजार में बैंक और फाइनेंशियल सेक्टर में जमकर बिकवाली हुई. निफ्टी पर दोनों इंडेक्स 6 और 7 फीसदी टूट गए. आने वाले दिनों में भी बाजार में वौलैटिलिटी हावी रहेगी.

ग्रोथ अनुमान घटा

रेटिंग एजेंसी फिच ने अगले वित्त वर्ष यानी 2020-21 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को कम कर 4.6 फीसदी कर दिया है. कोरोना वायरस महामारी के चलते निजी खपत कमजोर पड़ने और निवेश में कमी को देखते हुए एजेंसी ने ऐसा किया है. फिच ने मंगलवार को समाप्त हो रहे चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर के 4.9 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. वहीं, इंडिया रेटिंग्स ने भी अगले वित्त वर्ष के लिये आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को कम कर 3.6 फीसदी कर दिया है.

निवेशकों के सामने क्या है विकल्प

सैमको सिक्युरिटीज के फाउंडर और सीईओ जिमित मोदी का कहना है कि बाजार में इन दिनों ओवरसोल्ड की स्थिति है. आने वाले दिनों में कुछ बाउंसबैंक की भी उम्मीद है. इंडिया विक्स अभी हाई है और इसी लेवल पर बने रहने की उम्मीद है. ऐसे में ट्रेडर्स के पास सबसे बेहतर विकल्प है कि वे वेट एंड वाच की स्थिति में रहे. ट्रेड कर भी रहे हैं तो स्टॉप लॉस लगाकर करें. वहीं रैली आने पर बिकवाली और गिरावट पर खरीददारी जैसे विकल्प भी बाजार में मौजूद हैं. बस आपको सही शेयरों की पहचान करनी जरूरी है. कई मजबूत शेयर करेक्शन में काफी सस्ते हो गए हैं, जिनमें गिरावट पर खरीददारी करनी चाहिए तो कुछ को तेजी आने पर बेच कर निकल जाना चाहिए.

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