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कोरोना संकट: लिक्विड फंड में क्यों पैसे लगा रहे हैं निवेशक? ये हो सकता है निवेश और मुनाफे का गणित

Liquid Fund Investment: कोरोना वायरस महामारी के दौर में कम रिटर्न देने के बाद भी निवेशकों ने डेट म्यूचुअल फंड कैटेगरी में लिक्विड फंडों पर भरोसा जताया है.

Updated: May 17, 2021 1:19 PM
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Liquid Fund Investment: कोरोना वायरस महामारी के दौर में कम रिटर्न देने के बाद भी निवेशकों ने डेट म्यूचुअल फंड कटेगिरी में लिक्विड फंडों पर भरोसा जताया है. बीते महीने यानी अप्रैल में लिक्विड फंड सेग्मेंट में 41507 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया है. ओवरआल डेट कटेगिरी में 1 लाख करोड़ से ज्यादा का शुद्ध निवेश हुआ है. आखिर जब लिक्विड फंडों का रिटर्न बहुत कम हुआ है तो निवेशकों ने इस सेग्मेंट में सबसे ज्यादा क्यों निवेश किया. इस पर एक्सपर्ट का कहना है कि निवेशक अभी ज्यादा लालच की बजाए लिक्विड फंड में अपने पैसे पार्क कर रहे हैं, जिससे आगे इक्विटी का रिटर्न सुधरे तो वे यहां से धीरे धीरे पैसे शिफ्ट कर सकें.

लिक्विड फंड में 41,507 करोड़ रुपये का निवेश

बीते अप्रैल महीने की बात करें तो डेट फंड के हर सेग्मेंट में निवेश देखने को मिला है. लिक्विड फंड में अप्रैल में 41,507 करोड़ का नेट इनफ्लो, मनी मार्केट फंड और ओवरनाइट फंड में 20,287 करोड़ और 18,492 करोड़ का नेट इनफ्लो, लो ड्यूरेशन फंड में 9,322 करोड़, शॉर्ट ड्यूरेशन फंड में 1,246.52 करोड़ और अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड में 8919 करोड़ का नेट इनफ्लो आया है. जबकि फ्लोटर फंड में 3,352 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो हुआ है. वहीं इस दौरान बैंकिंग एंड PSU फंड में 150.91 करोड़ का आउटफ्लो हुआ है. डायनमिक बांड फंड में सबसे ज्यादा 2,103.01 करोड़ का आउटफ्लो हुआ है.

लिक्विड फंड में निवेश सबसे ज्यादा क्यों

BPN फिनकैप के डायरेक्टर एके निगम का कहना है कि कोविड 19 की दूसरी लहर के चलते अभी निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं. इक्विटी मार्केट को लेकर एक शंका बनी हुई है. बीते दिनों बाजार में उतार चढ़ाव को देखकर उनका डर और बढ़ा है. इस वजह से बहुत से निवेशक 91 दिनों की मेच्योरिटी पीरियड वाले लिक्विड फंडों में अपना पैसा डाल रहे हैं. असल में लिक्विड फंडों में बचत खाते से ज्यादा रिटर्न मिलता है, वहीं मेच्योरिटी भी 3 महीने की ही होती है. ऐसी उम्मीद है कि आगे 3 महीने बाद बाजार में स्टेबिलिटी आएगी. ऐसे में निवेशक लिक्विड फंड से आसानी से पैसे निकालकर इक्विटभ् की ओर शिफ्ट कर सकेंगे. जहां तक रिटर्न की बात है, उन्हें बचत खाते में पैसे रखने से ज्यादा लाभ लिक्विड फंड में होगा. वैसे भी अभी यही ट्रेंड है कि ज्यादातर निवेश अब फिक्स्ड इनकम सिक्युरिटीज में पैसा लगाने वाले डेट फंड में लग रहा है. इनमें भी निवेशकों की पहली पसंद लिक्विड फंड रहा है.

लिक्विड फंड्स क्या हैं?

लिक्विड फंड, डेट फंड का ही सबसेट है. लिक्विड फंड फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं, जिसकी मेच्योरिटी अवधि बहुत कम होती है. इन सिक्योरिटीज की मेच्योरिटी 91 दिनों से कम या उसके बराबर होती है. ये गवर्नमेंट सिक्युरिटीज, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट, ट्रेजरी बिल्स, कमर्शियल पेपर्स और दूसरे डेट इंस्टू्मेंट्स में निवेश करते हैं. इनमें डेट फंड की दूसरी कटेगिरी की तुलना में जोखिम कम होता है, वहीं लिक्विडिटी अधिक. लिक्विड फंड का दूसरा नाम है कैश फंड और इसका मकसद ज्यादा लिक्विडिटी, कम जोखिम और स्थिर रिटर्न है.

कितना मिल रहा है रिटर्न

लिक्विड फंड बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट या सेविंग अकाउंट में निवेश की तुलना में अधिक रिटर्न देने की क्षमता के कारण रिटेल निवेशकों के बीच लोकप्रिय हैं. वहीं, इनकी अधिक लिक्विडिट उन्हें सेविंग अकाउंट का बेहतर विकल्प बनाती है. पिछले कुछ साल का औसत रिटर्न देखें तो लिक्विड फंड ने औसतन बीते 1 साल में 3.25 फीसदी, 3 साल में 5.29 फीसदी और 5 साल में 6 फीसदी रिटर्न दिए हैं.

लिक्विड फंडों के लाभ

लिक्विड फंडों की मेच्योरिटी 91 दिनों की होती है. इनमें लिक्विडिटी की समस्या नहीं है. निवेशकों को इनमें बचत खाते से ज्यादा ब्याज मिलता है. वहीं यह सेविंग्स अकाउंट की तरह भी काम करता है. लिक्विड फंड सेफ माने जाते हैं क्योंकि ये शॉर्ट टर्म के लिए बॉन्डों में निवेश करते हैं. लिक्विड फंडों पर ब्‍याज दर के उतार-चढ़ाव का जोखिम सबसे कम होता है, क्‍योंकि प्राथमिक रूप से ये अल्‍पावधि की मेच्‍योरिटी वाले फिक्‍स्‍ड इनकम सिक्‍युरिटीज में निवेश करते हैं.

कम होता है रिस्क

लिक्विड फंड के मामले में रिस्क फैक्टर कम है. ऐसा इसलिए है क्योंकि ये जिन सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं, उनकी मेच्योरिटी बहुत कम होती है. इन फंड में स्थिर रिटर्न मिलता है, जबकि अन्य डेट फंड में ब्याज दर आउटलुक के हिसाब से उतार चढ़ाव रहता है. हालांकि ऐसा नहीं है कि ये पूरी तरह से रिस्क फ्री हैं. अंतिम पेमेंट पर डिफाल्ट रूप से डेट सिक्योरिटी जारी करने की संभावना हमेशा बनी रहती है.

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