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क्या 74 प्रति डॉलर तक टूटेगा रुपया! किन सेक्टर्स को होगा फायदा और किसे नुकसान

रुपये की कमजोरी से सभी सेक्टर को नुकसान नहीं होता है.

August 24, 2019 8:08 AM
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आमतौर पर रुपये में जब बड़ी कमजोरी आती है तो यह माना जाता है कि यह इंडस्ट्री के साथ देश की अर्थव्यवस्थ के लिए बुरा है. वैसे रुपये में कमजोरी से कई ऐसे सेक्टर हैं, जिन्हें नुकसान होता है. लेकिन वहीं कुछ ऐसे भी सेक्टर हैं, जिन्हें रुपये में कमजोरी का फायदा मिलता है. फिलहाल हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को रुपया इंट्राडे में फिसलकर 72.03 प्रति डॉलर तक आ गया. एक्सपर्ट आगे भी इसमें गिरावट की आशंका जता रहे हैं.

रुपया 9 माह के लो पर

शुक्रवार को साल 2019 में रुपया पहली बार 72 डॉलर के नीचे आया और यह 9 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट है. एक्सपर्ट का कहना है कि पिछले दिनों बाजार में ऐसे कई फैक्टर रहे हैं, जिनकी वजह से रुपये में गिरावट आई है. वहीं यह गिरावट अभी आगे भी जारी रहने की उम्मीद है. अगले 15 दिनों की बात करें तो यह 73 और साल के अंत तक 74 प्रति डॉलर तक कमजोर हो सकता है. फिलहाल रुपये की कमजोरी से जहां कुछ सेक्टर्स को नुकसान होता है, वहीं कुछ को सपोर्ट मिलता है.

रुपये की कमजेारी के पीछे फैक्टर

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि ट्रेड वार के चलते पिछले 20 दिनों में एशियन करंसी में बड़ी गिरावट रही है. युआन अपने 11 साल के लो पर आ गया है. एशियन करंसी के खराब प्रदर्शन के लपेटे में घरेलू करंसी भी आ गई है. वहीं, मॉनूसन के रिकवरी की बात कही जा रही है, लेकिन 14 राज्यों में बाढ़ की स्थिति से फसलों का भी नुकसान हुआ है. यह भी रुपये के लिए निगेटिव सेंटीमेंट हैं.

बजट के बाद से बात करें तो विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे रुपया टूट गया है. बजट में इंडस्ट्री को बूस्ट देने वाली कोई बात साफ तौर पर नहीं कही गई, जिससे सेंटीमेंट खराब हुए. इक्विटी मार्केट में करेक्शन का भी असर रुपये पर हुआ. ग्लोबली स्लोडाउन भी इसके पीछे वजह रही है.

आईटी और फार्मा सेक्टर को फायदा

जिन कंपनियों का रेवेन्यू मुख्य तौर पर एक्सपोर्ट बेस है, उन्हें फायदा होगा. डॉलर के मजबूत होने का सबसे ज्यादा फायदा आईटी और फॉर्मा सेक्टर को होगा. इसमें टीसीएस, इंफोसिस, अरबिंदो फार्मा, कैडिला और विप्रो जैसी कंपनियां शामिल हैं. दरअसल आईटी कंपनियों की बड़ी कमाई एक्सपोर्ट से होती है, ऐसे में कमजोर रुपये से फायदा मिलेगा.

रुपये में कमजोरी से फार्मा कंपनियों को भी फायदा होगा. फार्मा कंपनियों के कारोबार में एक्सपोर्ट बड़ा हिस्सा है और डॉलर में आमदनी का बड़ा हिस्सा है.

ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज और ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसे गैस प्रोड्यूसर्स को भी डॉलर में तेजी का फायदा मिलेगा.

ऑटो, मैन्युुैक्चरिंग, बैंकिंग सेक्टर को नुकसान

कमजोर रुपये से ऑटो, मैन्युुैक्चरिंग, बैंकिंग और कंजम्पशन सेक्टर को नुकसान होता है. असल में आटो कंपनियां कई पार्ट का इंपोर्ट करती हैं. रुपये में कमजोरी से इंपोर्ट महंगा हो जाता है. वहीं, रुपये में कमजोरी से महंगाई बढ़ने का डर होता है, जो बैंकों के लिए निगेटिव फैक्टर है.

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए क्रूड का इंपोर्ट करना महंगा होता है, जिससे उनके मार्जिन पर दबाव बढ़ता है. रॉ मैटेरियल का इंपोर्ट महंगा होने की वजह से रुपये की कमजोरी पेंट कंपनियों के लिए भी निगेटिव है.

जिन कंपनियों पर विदेशी लोन होता है उन्हें भी ज्यादा ब्याज चुकाने से नुकसान होता है.

महंगा होगा पेट्रोल-डीजल, बढ़ेगी महंगाई

भारत अपनी जरूरतों का 82 फीसदी क्रूड दूसरे देशों से खरीदता है, जिसके बदले डॉलर में पेमेंट करना होता है. रुपये में गिरावट से क्रूड इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जिससे तेल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बनेगा. ऐसे में तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमतें और बढ़ा सकती हैं.

पेट्रोल और डीजल का सीधा संबंध महंगाई से है. अगर ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा तो रोजमर्रा काम आने वाली चीजें भी महंगी होंगी. जो कंपनियां अपने प्रोडक्ट बनाने में क्रूड का इस्तेमाल करती हैं, उनके प्रोडक्ट भी महंगे हो जाएंगे, मसलन साबुन, शैंपू, पेंट्स जैसे प्रोडक्ट की कीमतें बढ़ेंगी.

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