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सरकार की पॉलिसी ने बदला गेहूं का ‘खेल’, जून तक 2250 रुपये/क्विंटल जा सकते हैं भाव

इस बार देश में रिकॉर्ड मात्रा में गेहूं के उत्पादन का अनुमान है लेकिन इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि अगले महीने के अंत तक यह 2250 रुपये प्रति कुंतल के स्तर को छू सकता है.

May 17, 2019 12:02 PM
wheat, wheat bumper production, wheat price, wheat price boom, wheat price up, commodity news, kedia commodity, ajay kedia, wheat procurement, australia, australia wheat import, msp, wheat mspरकबे में गिरावट के बावजूद बंपर उत्पादन का अनुमान है.

अर्थशास्त्र का एक साधारण सा नियम है कि जिस भी चीज की आपूर्ति जितनी अधिक होगी, उसकी कीमत उतनी ही कम होगी. हालांकि, इस सत्र गेहूं  (Wheat) के मामले में यह पूरी तरह फिट नहीं बैठ रहा है. बंपर उत्पादन के बावजूद गेहूं की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है. गेहूं का हाजिर भाव इस समय 2026 रुपये प्रति क्विंटल पर है जो इस साल के न्यूनतम स्तर 1770 रुपये प्रति क्विंटल से 226 रुपये अधिक है. इस बार देश में रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन का अनुमान है लेकिन इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि अगले महीने के अंत तक यह 2250 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को छू सकता है.

सरकारी नीतियों से Wheat के भाव को मिल रही मजबूती

केडिया कमोडिटी के निदेशक अजय केडिया के मुताबिक गेहूं के लिए सरकार की न्यूनतम समर्थन राशि (MSP) नीति के कारण इसके भाव में तेजी देखी जा रही है. इस साल अप्रैल-जून के लिए गेहूं की MSP 2080 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया. इसके बाद हर तिमाही इसकी एमएसपी 55 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ती जाएगी.

इस वजह से आटा मिल भविष्य में इसकी कीमतों के बढ़ने की संभावना को देखते हुए खरीदारी कर रहे हैं. आटा मिल की खरीदारी के कारण गेहूं की कीमतें जल्द ही बढ़ेंगी और अजय केडिया के मुताबिक अगले महीने के अंत तक यह 2250 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर पहुंच जाएगा. अभी भी इसके भाव MSP से ऊपर हैं.

रकबे कम रहने के बावजूद बंपर उत्पादन का अनुमान

इस रबी सत्र में 8 लाख हेक्टेअर कम खेत में बुवाई के बावजूद गेहूं के बंपर उत्पादन का अनुमान लगाया गया है. इस बार 296 हेक्टेअर में गेहूं की बुवाई हुई है. बेहतर मौसम के कारण इस बार प्रति हेक्टेअर 50 क्विंटल गेहूं अधिक उपज होने का अनुमान है. इस बार भारत गेहूं उत्पादन में एक और माइलस्टोन छू सकता है.

डायरेक्टरोट ऑफ इकोनॉमिक्स एंड स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों के सेकंड एडवांस्ड एस्टीमट के मुताबिक इस बार 9.91 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हुआ है. सबसे अधिक गेहूं उत्तर प्रदेश में 3.2 करोड़ टन में हुआ है. उत्तर प्रदेश के बाद पंजाब में 1.71 करोड़ टन, हरियाणा में 1.13 करोड़ टन और मध्य प्रदेश में 1.72 करोड़ टन गेहूं की पैदावार हुई है.

सरकार बढ़ा सकती है अपना भंडारण लक्ष्य

इस साल बंपर उत्पादन के कारण सरकार गेहूं के भंडारण का अपना लक्ष्य बढ़ा सकती है. 10 मई तक 2.92 करोड़ टन गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है जोकि पूरे साल के खरीद लक्ष्य 3.57 करोड़ टन का करीब 81 फीसदी है. पिछले साल 3.2 करोड़ टन के लक्ष्य की तुलना में 3.55 करोड़ टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई थी. पिछले साल 9.71 करोड़ टन गेहूं की पैदावार हुई थी.

15 जून तक गेहूं की सरकारी खरीद संभव

अधिकतर राज्यों में 1 अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है और अनुमान लगाया जा रहा है कि यह 15 जून तक जारी रहेगा. सबसे अधिक सरकारी खरीद हरियाणा और पंजाब में हुई है जिन्होंने अब तक 2.11 करोड़ टन गेहूं का भंडारण कर लिया है. यह पूरे देश में गेहूं की सरकारी खरीद का 72 फीसदी है.

ऑस्ट्रेलिया में 12 साल बाद गेहूं के आयात का फैसला

वैश्विक स्तर पर गेहूं के उत्पादन की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया 12 साल में पहली बार गेहूं का आयात करेगा. ऑस्ट्रेलिया सरकार ने कनाडा से एक जहाज के जरिए गेहूं के आयात को मंजूरी को दी है ताकि घरेलू बाजार में उसकी कीमतों के उछाल को रोका जा सके. ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट पर 12 साल के सबसे बड़े सूखे से उपज प्रभावित हुई है.

ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ एग्रिकल्चरल एंड रिसोर्स इकोनॉमिक्स का अनुमान है कि वहां 20 साल के औसत उत्पादन की तुलना में इस बार 20 फीसदी कम गेहूं उत्पादित होगा. अनुमान के मुताबिक इस बार ऑस्ट्रेलिया में 2.93 करोड़ टन गेहूं की पैदावार होगी.

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