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Covid-19 क्राइसिस में कैसे चूक गए वॉरेन बफे? क्या निवेशकों का कायम रहेगा भरोसा

इस साल वॉरेन बफे ने कोरोना वायरस की वजह से मार्केट क्रैश होने के बाद शेयरों में अपना निवेश नहीं बढ़ाया है.

Published: June 26, 2020 3:11 PM
इस साल वॉरेन बफे ने कोरोना वायरस की वजह से मार्केट क्रैश होने के बाद शेयरों में अपना निवेश नहीं बढ़ाया है.

दिग्गज निवेशक और बर्कशायर हैथवे (Berkshire Hathaway) के सीईओ वॉरेन बफे (Warren Buffet) ने कोरोना संकट के दौरान थोड़ा हटकर काम किया. वैसे तो वॉरेन बफे का सबसे बड़ा मंत्र है कि शेयर बाजार में बड़ी गिरावट निवेश के नए मौके लाती है. बाजार की गिरावट में जब लोग घबराकर बिकवाली करते हैं, उस दौरान स्मार्ट निवेशक सस्ते वैल्युएशन का फायदा उठाते हैं. लेकिन मार्च में गिरावट के दौरान जब स्टॉक के वैल्यूएशन में कमी आने लगी, बफेट अपेक्षाकृत शांत दिखे. यह बहुत से निवेशकों के लिए हैरानी भरी बात थी. असल में बर्कशययर की ग्रोथ की सूई आगे बए़ती रही, इसके लिए कंपनी को बड़े निवेश की जरूरत होती है.

इस साल वॉरेन बफे ने कोरोना वायरस की वजह से मार्केट क्रैश होने के बाद शेयरों में अपना निवेश नहीं बढ़ाया है. मई में हुई सालाना मीटिंग में कंपनी ने यह जानकारी भी दी कि गिरावट में बफे अच्छे शेयर की तलाश में थे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं मिला, जिसमें वो बड़ा निवेश करें. कंपनी के पास कैया तो पर्याप्त था, लेकिन कैश का इस्तेमाल शेयर खरीदने में नहीं हुआ. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की ओर से करीब 600 करोड़ डॉलर के शेयर अप्रैल में बेचे गए हैं. एजीएम में यह बताया गया है इस साल कंपनी ने अपनी होल्डिंग कम की है.

बर्कशायर का आपरेटिंग बिजनेस

मैन्युफैक्चरिंग
सर्विस एंड रिटेल
इंश्योरेंस
रेल रोड, यूटिलिटीज और एनर्जी

निवेशकों के मन में सवाल

मार्च में बाजार में गिरावट के दौरान भी स्टॉक वैल्यूएशन में कमी आने लगी, वॉरेन बफे ने निवेश नहीं किया. बर्कशायर भाी निवेया से ग्रोथ करने वाली कंपनी है. ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल उठने लगा कि अगर वे बर्कशायर में पैसा लगाते हैं तो आगे चलकर उन्हें क्या मिलेगा. पहले इन्हीं निवेशकों ने बर्कशायर के निवेश करने की अनोखी क्षमता का जमकर लाभ उठाया था. इससे बफे के शांत रहने से उनके मन में सवाल उठना लाजिमी था. बर्कशायर हो​ल्डिंग्स की कई कंपनियों के स्टॉक्स में निवेश है, मसलन अमेरिकन एक्सप्रेस, बैंक आफ अमेरिका, वेल्स फार्गो, डेल्टा, साउथवेस्ट और यूनाइटेड एयरलाइंस आदि.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक
Keefe Bruyette & Woods के एक विश्लेषक, मेयर शील्ड्स का कहना है कि बर्कशायर हाथवे का लोगों के लिए इसका एक अलग मूल्य प्रस्ताव है. यह एक ऐसा समूह है जिसने बीते दिनों बेजोड़ रिटर्न दिया और शानदार लाभ हासिल करने में सक्षम था. लेकिन वैसा फिर देख पाना मुश्किल लग रहा है.

कंपनी के पास भारी भरकम कैश

बफे ने पहली तिमाही के अंत में रिकॉर्ड 137 बिलियन डॉलर नकद रखा था और कहा कि वह बर्कशायर को “फाइनेंशियल फॉरट्रेस” यानी वित्तीय किले के रूप में रखेंगे. एजीएम में जानकारी दी गई थी कि इस साल कैश में 1000 करोड़ डॉलर की बढ़ोत्तरी हुई है. मार्च तिमाही में भारी भरकम घाटे के बाद भी कैश बढ़ने के पीछे कारण यह है कि कंपनी ने इस साल भारी मात्रा में शेयर बेचे और नए निवेश में सतर्कता बरती.

1965 के बाद से 20.3% सालाना रिटर्न देने वाली कंपनी

31 दिसंबर 2019 तक की बात करें तो वॉरेन बफे की कंपनी बर्कशायर हैथवे ने निवेशकों को 20.3 फीसदी सालाना के हिसाब से रिटर्न दिया है. जबकि इस दौरान S&P 500 इंडेक्स ने महज 10 फीसदी सालाना रिटर्न दिया. कंपनी की कुल मार्केट वैल्यू 44100 करोड़ डॉलर है और यह में इकलौती कंपनी है, जिसे टेक्नोलॉजीर जियांट के रूप में क्लासीफाइड किया गया है. यहां तक कि जब 2008 में मंदी आई तो S&P 500 इंडेक्स 38 फीसदी से ज्यादा गिर गया, तो बर्कशायर सिर्फ 32 फीसदी नीचे आया.

मार्च तिमाही में घाटा

बर्कशायर हैथवे को मार्च तिमाही में करीब 4970 करोड़ डॉलर यानी करीब 3.7 लाख करोड़ का घाटा हुआ है. एक साल पहले सामान अवधि में कंपनी को 2166 करोड़ डॉलर (करीब 1.62 लाख करोड़ रुपये) का मुनाफा हुआ था. कोरोना वायरस महामारी की वजह बफे होल्डिंग स्टॉक्स में भारी गिरावट आई. हालांकि, बर्कशायर हैथवे का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 6 फीसदी बढ़कर 587 करोड़ डॉलर (करीब 44.05 हजार करोड़ रुपये) हो गया है.

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