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Stock Market: मंदी के दौर में भी भरेगी आपकी जेब, शेयर बाजार में ऐसे करें कारोबार

पिछले कुछ तिमाही से भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर चिंता बढ़ी है.

Published: August 28, 2019 6:40 AM
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पिछले कुछ तिमाही से भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर चिंता बढ़ी है. जब स्लोडाउन की स्थिति हो तो सवाल उठता है कि क्या आपको एक निवेशक होने के नाते अपनी निवेश की रणनीति को बदलने की जरूरत है. असल में पिछले कुछ तिमाही से निवेशकों को इक्विटी मार्केट में निवेश करने पर नुकसान हुआ है. कई कंपनियों के शेयरों में गिरावट रही है. ऐसे में यह सवाल उठना वाजिब भी है. जानते हैं कि मौजूदा स्थिति में निवेशकों को क्या करना चाहिए…..

क्या है स्लेडाउन

इन्वेस्टमेंट साइंस लिटरेचर के अनुसार स्लोडाउन का मतलब है कि पिछले सालों की तुलना में जीडीपी विकास की दर कम हो गई है. इसका मतलब है कि देश में पिछले कुछ सालों की तुलना में प्रोडक्शन और अर्निंग उस गति से नहीं बढ़ रही है. आमतौर पर 6 से 7 साल की तेजी के बाद इकोनॉमिक स्लोडाउन की स्थिति बनना सामान्य है. उदाहरण के लिए, चीनी अर्थव्यवस्था, जिसने कुछ साल पहले प्रभावशाली जीडीपी वृद्धि देखी थी. लेकिन अब वहां मंदी की स्थिति है और जीडीपी की रफ्तार पिछले 7 सालों में सबसे कम है.

निवेश की रणनीति

जब आप अर्थव्यवस्था में मंदी का सामना कर रहे हों तो यह सवाल उठता है कि आपके निवेश का तरीका क्या होना चाहिए. आमतौर पर मंदी में बहुत से लोग अपना पूरा पैसा शेयर बाजार से निकाल लेते हैं या निकालने की सोचते हैं. पैसा बनाने के लिए शेयर बाजार में होना महत्वपूर्ण है, इसलिए बेहतर शेयरों का चुनाव कर निवेश करना जारी रखना चाहिए. निवेशकों को टेम्परेरी मंदी से चिंतित नहीं होना चाहिए.

पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाई करने का समय

स्लोडाउन अपने पोर्टफोलियो का समीक्षा कर उसे डाइवर्सिफाई करने का बेहतर समय है. आपको अपना पूरा निवेश एक ही इंडस्ट्री की अलग अलग कंपनियों के शेयरों में नहीं रखना चाहिए. मसलन, किसी के पोर्टफोलियो में सिर्फ टेक या ऑटो सेक्टर के शेयर हों. क्योंकि अगर वह इंडस्ट्री किसी वजह से दबाव में आती है तो आपका निवेश डूब सकता है. ऐसे में डाइवर्सिफिकेशन जरूरी है.

पोर्टफोलियो में विविधता लाने का एक आसान तरीका है कि अलग अलग इंडस्ट्री के बेहतर कंपनियों के शेयरों में निवेश करें. ऐसे में एक इंडस्ट्री में गिरावट आती है तो दूसरे इंडस्ट्री की तेजी आपके नुकसान को बैलेंस कर सकती है. वैसे भी इस समय कई अच्छे स्टॉक गिरावट की वजह से कम कीमत पर उपलब्ध हैं. ऐसे में आपको इस गिरावट का फायदा उठाना चाहिए.

क्या वाकई इन सेक्टर्स में है मंदी

इस समय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के स्लोडाउन की चर्चा ज्यादा है. ऑटो सेकटर में दबाव के पीछे कई कारण है, जैसे लिक्विडिटी क्राइसिस और BS-VI मानदंडों की ओर शिफ्टिंग. इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में ज्यादा निवेश. यात्री कारों की बिक्री धीमी हो रही है, लेकिन कमर्शियल व्हीकल्स की बिक्री वित्त वर्ष 2019 में 17 फीसदी बढ़ी है.

वहीं लोगों का दावा है कि रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में सुस्ती है. लेकिन सीमेंट प्रोडक्शन देखें तो यह वित्त वर्ष 2019 में 13.3 फीसदी बढ़ा है. इसलिए किसी एक सेग्मेंट को देखकर दूर नहीं जाना चाहिए. मंदी में भी हमेशा विकास की संभावनाएं होती हैं.

कंजम्पशन पैटर्न में शिफ्टिंग

देश के कंजम्पशन पैटर्न में एक शिफ्टिंग दिख रही है. मसलन बहुत से लोग नई कार खरीदने और उसे मेनटेन करने की बजाए टैक्सी एग्रीगेटर्स की सर्विस लेने पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं. वे छुट्टियों और अन्य बाहरी गतिविधियों का अनुभव लेने में ज्यादा इंटरेस्टेड हैं.

नुकसान में हैं तो शेयर में बने रहें

निष्कर्ष यह है कि जब मंदी होती है, तो यह महत्वपूर्ण है कि अपने निवेश को लेकर पैनिक न हों और पूरा निवेश बाहर न निकाल लें. वह भी खासतौर से तब आपके द्वारा निवेश किए गए शेयरों में गिरावट आ गई हो. यह रणनीति अपनाकर आप खुद का पैसा डुबो सकते हैं. ऐसे समय में बेहतर यह है कि आप निवेश में बने रहें और शेयर में रिकवरी आने का इंतजार करें. क्योंकि मंदी स्थाई नहीं होती है.

Writer: P. Saravanan, professor of finance & accounting, IIM Tiruchirappalli

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