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RBI के एलानों से बांड मार्केट में आएगी मजबूती, म्यूचुअल फंड निवेशकों को क्या करना चाहिए?

Bond Market: केंद्रीय बैंक ने सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने के उपायों का भी एलान किया. आरबीआई ओएमओ के जरिए सरकारी बांडों की खरीददारी अगले हफ्ते ​करेगा.

October 10, 2020 8:12 AM
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Debt Mutual Fund: साल 2020 में अबतक दरों में 115 बेसिस प्वॉइंट कटौती के बाद लगातार दूसरी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. रेपो रेट पहले की तरह 4 फीसदी पर बना रहेगा. वहीं, सीआरआर 3.35 फीसदी, बैंक रेट 4.25 फीसदी और कैश रिजर्व रेश्यो 3 फीसदी पर बरकरार है. जहां ब्याज दरें ​नीचे बनी हुई हैं, वहीं, केंद्रीय बैंक ने सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने के उपायों का भी एलान किया. आरबीआई ओएमओ के जरिए सरकारी बांडों की खरीददारी अगले हफ्ते ​करेगा. फिलहाल लिक्विडिटी के उपायों से बांड मार्केट को स्टेबल रखने के उपाय किए गए हैं. आखिर आरबीआई के इन उपायों का म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए क्या मायने हैं.

2 बड़े एलान

आरबीआई ने ओएमओ और एलटीआरओ जैसे 2 बड़े उपाय किए हैं. आरबीआई ओएमओ के जरिए सरकारी बांड खरीदेगा. आरबीआई का लक्ष्य सिस्टम में 20 हजार करोड़ की लिक्विडिटी डालना है. अभी 10 साल के सरकारी बॉन्‍ड की यील्‍ड 5.92 फीसदी तक पहुंच गई है. 20,000 करोड़ रुपये के ओएमओ के बाद यह और घटेगी.

वहीं, आरबीआई ने ऑन-टैप टीएलटीआरओ का एलान किया है. इसका मकसद कर्ज देने के लिए बैंकों के हाथों को खोलना है. इस स्‍कीम के जरिये बैंकों को 1 लाख करोड़ रुपये तक उधार लेने की व्‍यवस्‍था की जाएगी. इस फंड का इस्‍तेमाल कुछ सेक्‍टरों के कॉरपोरेट बॉन्‍ड और अन्‍य डेट इंस्‍ट्रूमेंट में निवेश के लिए किया जा सकेगा.

बांड मार्केट के लिए पॉजिटिव

सरकार द्वारा लिक्विडिटी के जो उपाय किए गए हैं, वे बांड मार्केट के लिए पॉजिटिव हैं. बाजार की आगे भी आरबीआई से इस तरह के उपायों की उम्मीद हैं. आरबीआई ने अपन रुख नरम रखा है. इसलिए आने वाले दिनों में दरों में और कटौती देखने को मिल सकती है. आज पॉलिसी एलान में कहा भी कहा गया है कि जरूरत हुई तो आगे आरबीआई हर संभव उपाय करेगी. इसका असर नियर टर्म में बांड यील्ड पर पड़ेगा. इसका फायदा डेट म्यूचुअल फंड्स को पहुंचने की उम्मीद है.

बीएनपी फिनकैप के डायरेक्टर एके निगम का कहना है कि निश्चित तौर पर आरबीआई के इन उपायों से बांड मार्केट पर पॉजिटिव इंपैक्ट होगा. उनका कहना है कि आरबीआई ने फाइनेंशियल कंडीशन को स्टेबल करने और सिस्टम में तरलता लाने के लिए बड़ा एलन किया है. सिस्टम में 20 हजार करोड़ आने की बात कही गई है. सरकार के इन उपायों से डेट मार्केट में भी स्थिरता बढ़ेगी. फंडिंग चैनल आपरेशन को बनाए रखने में मदद मिलेगी और साथ ही वित्तीय अव्यवस्था को कम करने में भी मदद मिलेगी. लेकिन यह ध्यान रखने की बात है कि जब सिस्टम में पैसा आएगा तो इसका फायदा सिर्फ डेट मार्केट को ही नहीं, इक्विटी को भी मिलेगा. इसलिए दोनों कटेगिरी पर निवेशकों को फोकस करना चाहिए.

कौन सी स्कीम बेस्ट?

उनका कहना है कि डेट फंडों में अभी मिड ड्युूरेशन से लांग ड्यूरेशन वाली स्कीम बेहतर दिख रही है. इसके अलावा गवर्नमेंट बांड पर फोकस करना चाहिए. इसके अलावा बैंकिंग एंड पीएसयू फंड भी आकर्षक दिख रहे हैं, क्योंकि ये सेफ माने जाते हैं. लेकिन यहां पूरी तरह से आंख मूंदकर खरीददारी नहीं की जा सकती है. निवेश के पहले सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए हाई क्वालिटी वाले पेपर जरूर जांच लें.

वहीं इक्विटी में मल्टी कैप इक्विटी फंड अभी भी पहली प्रथमिकता है. इसके अलावा लॉर्जकैप में अचछी स्कीम चुन सकते हैं. हालांकि इक्विटी में निवेशकों को कम से कम 5 साल निवेश का नजरिया रखना होगा.

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