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Share Buyback: TCS के बायबैक से 10% रिटर्न पाने का मौका, कंपनियां क्यों खरीदती हैं अपना शेयर

TCS Share Buyback: देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी ने बुधवार को नतीजे घोषित करने के साथ ही शेयर बायबैक का एलान किया है.

October 8, 2020 8:43 AM
TCS Share BuybackTCS Share Buyback: टाटा कंसल्टेंसी मौजूदा भाव से करीब 10 फीसदी प्रीमियम पर शेयर बायबैक करेगी.

TCS Share Buyback: देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी ने बुधवार को नतीजे घोषित करने के साथ ही शेयर बायबैक का एलान किया है. टीसीएस प्रति शेयर 3,000 रुपये के भाव पर 5,33,33,333 शेयर बायबैक करेगी. इस तरह से टीसीएस अपने बायबैक प्रोग्राम पर करीब 16 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी. बुधवार को कंपनी का बाजार पूंजीकरण 10,27,177.79 करोड़ रुपये था. इस तरह कंपनी बायबैक पर अपने बाजार पूंजीकरण का करीब 1.55 फीसदी खर्च करेगी.

9.6 फीसदी प्रीमियम पर बायबैक

बुधवार को 2737.40 रुपये के भाव पर बंद हुआ. जबकि टीसीएस ने 3000 रुपये पर शेयर बायबैक का एलान किया है. यह करंट प्राइस के मुकाबले 62.60 रुपये या 9.6 फीसदी ज्यादा है. यानी निवेशक बायबैक में हिस्सा लेकर करीब 10 फीसदी रिटर्न कमा सकते हैं. इसके पहले साल 2018 में भी टीसीएस 16 हजार करोड़ रुपये का ही शेयरबायबैक लेकर आई थी. तब 2100 रुपये प्रति शेयर के भाव पर कंपनी ने 7.61 करोड़ शेयर खरीदे थे.

क्या होता है शेयर बायबैक

कंपनी जब अपने ही शेयर निवेशकों से खरीदती है तो इसे बायबैक कहते हैं. आप इसे आईपीओ का उलट भी मान सकते हैं. बायबैक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन शेयरों का वजूद खत्म हो जाता है. बायबैक के लिए मुख्यत: दो तरीकों-टेंडर ऑफर या ओपन मार्केट का इस्तेमाल किया जाता है.

कंपनियां क्यों करती हैं बायबैक

इसकी सबसे बड़ी वजह कंपनी की बैलेंसशीट में अतिरिक्त नकदी का होना है. कंपनी के पास बहुत ज्यादा नकदी का होना अच्छा नहीं माना जाता है. इससे यह माना जाता है कि कंपनी अपने नकदी का इस्तेमाल नहीं कर पा रही है. शेयर बायबैक के जरिए कंपनी अपने अतिरिक्त नकदी का इस्तेमाल करती है. कई बार कंपनी को यह लगता है कि उसके शेयर की कीमत कम है (अंडरवैल्यूड) तो वह बायबैक के जरिए उसे बढ़ाने की कोशिश करती है.

क्या है प्रक्रिया

सबसे पहले कंपनी का बोर्ड शेयर बायबैक के प्रस्ताव को मंजूरी देता है. इसके बाद कंपनी बायबैक के लिए कार्यक्रम का एलान करती है. इसमें रिकार्ड डेट और बायबैक की अवधि का जिक्र होता है. रिकॉर्ड डेट का मतलब यह है कि उस दिन तक जिन निवेशकों के पास कंपनी के शेयर होंगे, वे बायबैक में हिस्सा ले सकेंगे.

बायबैक का शेयर पर असर

बायबैक का कंपनी और उसके शेयर पर कई तरह से असर पड़ता है. शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिए मौजूद कंपनी के शेयरों की संख्या घट जाती है. इससे प्रति शेयर आय (ईपीएस) बढ़ जाती है. शेयर का पीई भी बढ़ जाता है. इससे कंपनी के कारोबार में कोई बदलाव नहीं आता है.

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