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इक्विटी में निवेश का है प्लान; कौन सा शेयर re-rating को है तैयार? ऐसे करें पहचान

Re-Rating of Stocks: शेयर में री-रेटिंग का मतलब है कि निवेशक उन शेयरों की अधिक कीमत चुकाने को तैयार हैं, जिनसे भविष्य में अधिक कमाई की उम्मीद है.

March 23, 2021 1:50 PM
Re-Rating of StocksRe-Rating of Stocks: शेयर में री-रेटिंग का मतलब है कि निवेशक उन शेयरों की अधिक कीमत चुकाने को तैयार हैं, जिनसे भविष्य में अधिक कमाई की उम्मीद है.

Stock Re-Rating: अगर आपका शेयर बाजार को लेकर इंटरेस्ट है तो शेयर की री-रेटिंग टर्म के बारे में बारे में अक्सर सुना होगा. कई बार एनालिस्ट भी यह कहते हैं यह शेयर री-रेटिंग के लिए तैयार है या इन शेयर की री-रेटिंग हो सकती है. शेयर बाजार की रिपोर्ट पढ़ते हुए भी आपने यह शब्द कहीं न कहीं पढ़ा होगा. निवेशक आमतौर पर पूरी तरह से यह नहीं समझ पाते हैं कि इसका मतलब क्या है और इसका क्या महत्व है. आइए इस बात पर चर्चा करें कि री-रेटिंग का क्या मतलब है. वहीं निवेशकों को उच्च रिटर्न हासिल करने के लिए अपने पोर्टफोलियो को किस तरह से व्यवस्थित करना चाहिए.

क्या है re-rating

शेयर बाजार में री-रेटिंग का मतलब है कि निवेशक उन शेयरों की अधिक कीमत चुकाने को तैयार हैं, जिनसे भविष्य में अधिक कमाई की उम्मीद है. इस तरह का पूर्व अनुमान निवेशक के सेंटीमेंट और कंपनी की भविष्य को लेकर संभावना की वजह से होता है. इसे एक आसान उदाहरण से ऐसे समझ सकते हैं कि किसी कंपनी का शेयर 10 गुना अर्निंग प्रति शेयर (EPS) के साथ 100 रुपये प्रति शेयर के भाव पर कारोबार कर रहे हैं. इसका मतलब है कि प्राइस टु अर्निंग रेश्यो (P/E) 10 है.

जब शेयर की कीमत 200 रुपये तक बढ़ जाती है और ईपीएस भी 15 हो जाता है, तो नया P/E 13.3 होगा, जो पिछली अवधि में 10 से अधिक है. अगर बाजार कंपनी के शेयरों के लिए आय की तुलना में अधिक कीमत देने को तैयार है, तो उसे बाजार द्वारा ‘शेयरों की पुनः रेटिंग’ के रूप में जाना जाता है. मूल रूप से, कंपनी की कमाई के लिए दीर्घकालिक संभावनाओं की वजह से निवेशक के सेंटीमेंट में बदलाव से शेयर की रेटिंग फिर से हो जाती है.

कई वजह से होती है re-rating

इस उदाहरण से यह साफ है कि जब कंपनी को फिर से रेट किया जाता है, तो इसका P/E फंडामेंटल में एक महत्वपूर्ण सुधार के साथ एक्सपैंड करता है. निवेशकों द्वारा देखा जाने वाला प्रमुख प्वॉइंट यह है कि हालांकि आय में सुधार होता है, P/E वृद्धि अकेले निवेशकों के लिए दौलत बनाती है. P/E में बढ़ोत्तरी के कई कारण हैं.

सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब री-रेटिंग होती है, तो आमतौर पर संस्थागत निवेशक कंपनी की संभावनाओं से उत्साहित होते हैं और शेयर खरीदना शुरू करते हैं. कभी-कभी, उस योयर या उससे जुड़े सेक्टर को फिर से रेट किया जा सकता है, जिससे सेंटीमेंट बेहतर होते हैं. उदाहरण के लिए, बैंकिंग और पीएसयू जैसे सेक्टर में री रेटिंग की वजह से फ्रेश बॉइंग दिख रही है.

ग्रोथ से जुडी होती है री-रेटिंग

आम तौर पर, जब कोई कंपनी लगातार ग्रोथ दिखाती है, तो फिर से रेटिंग होती है. साथ ही, अगर बिजनेस की संभावनाओं के बारे में अनिश्चितता होती है, तो डी-रेटिंग होती है. री-रेटिंग से पहले शेयर की पहचान करना कोई आसान काम नहीं है, हालांकि, कोई कम P/E अनुपात वाली कंपनी की पहचान कर सकता है. उन शेयरों की री रेटिंग नहीं होती जो हाई मल्टीपल पर ट्रेड कर रहे होते हैं. जिन कंपनियों ने लंबी अवधि के लिए अनुमान की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है, वे फिर से रेटिंग दर्ज कर सकते हैं.

उन कंपनियों का मूल्यांकन करने के लिए जिनमें सबसे अधिक संभावना है कि वे फिर से रेटेड हो सकते हैं, किसी को मूल्यांकन की पूरी समझ होनी चाहिए. इसके अलावा उस कंपनी के महत्वपूर्ण सफल फैक्टर्स की पहचान करने की क्षमता होनी चाहिए.

(लेखक: P Saravanan, professor of finance & accounting, IIM Tiruchirappalli

&

Aghila Sasidharan, assistant professor at Jindal Global Business School, Sonipat)

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