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क्या होते हैं इंटरनेशनल फंड? 1 साल में निवेशकों को 46% तक मिला है रिटर्न

इक्विटी इंटरनेशनल फंडों ने कोरोना संकट में शानदार प्रदर्शन किया है.

Published: June 21, 2020 10:24 AM
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इक्विटी इंटरनेशनल फंडों ने कोरोना संकट में शानदार प्रदर्शन किया है. वहीं इस सेग्मेंट में लांग टर्म रिटर्न भी बेहद शानदार रहा है. पूरे सेग्मेंट की बात करें तो पिछले कुछ सालों से इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड बेहतर प्रदर्शन देते आ रहे हैं. रिटर्न के मामले में टॉप फंड्स में इस कटेगिरी की कई स्कीम शामिल है. अगर आप भी अपना निवेश डाइवर्सिफाई कर बैलेंस रखना चाहते हैं तो इंटरनेशनल फंड को पोर्टफोलियो में शामिल कर सकते हैं. हालांकि निवेशकों को अपने कुल पोर्टफोलियो का 10 फीसदी ही इन फंडों में निवेश करना चाहिए.

क्या हैं इंटरनेशनल फंड?

इंटरनेशनल फंड या ओवरसीज फंड फंड अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश करते हैं. इन फंडों का निवेश इक्विटी या डेट में हो सकता है. ये अन्य एसेट क्लास में मसलन कमोडिटीज, रियल एस्टेट आदि में भी निवेश करते हैं. सेबी के नियमों के अनुसार जो म्यूचुअल फंड दूसरे देशों की इक्विटी या इक्विटी रिलेटेड इक्यूपमेंट में 80 फीसदी से अधिक निवेश करते हैं, वह इंटरनेशनल फंड की कटेगिरी में आते हैं.

ग्लोबल मार्केट में निवेश करने का अवसर देने के अलावा ये फंड्स लोगों को जियोग्राफिकल डाइवर्सिफिकेशन हासिल करने में भी मदद करते हैं और कई बार अगर घरेलू करंसी में गिरावट हो तो एक हेज के रूप में काम करते हैं.

1 साल में बेस्ट रिटर्न देने वाले फंड

मोतीलाल ओसवाल नैसडेक 100 FOF: 46 फीसदी

DSP वर्ल्ड गोल्ड: 45 फीसदी

PGIM इंडिया ग्लोबल इक्विटी अपॉर्चुनिटी: 40 फीसदी

फ्रैंकलिन फीडर US अपॉर्चुनिटी: 33 फीसदी

ICICI प्रू ब्लूचिप इक्पिटी: 25 फीसदी

निप्पॉन इंडिया US इक्विटी अपॉर्चुनिटी: 22 फीसदी

ABSL ग्लोबल इमर्जिंग अपॉर्चुनिटी: 21 फीसदी

निवेश का तरीका

कुछ इंटरनेशनल फंड सीधे इंटरनेशनल इक्विटी में निवेश करते हैं. वहीं कुछ फंड हैं जो इंटरनेशनल इंडेक्स मसलन नैसडैक या एसएंडपी 500 में निवेश करते हैं. कुछ ऐसे भी हैं जो फीडर फंड के रूप में काम करते हैं और इंटरानेशनल मार्केट में एक आइडेंटिफाई म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं. फिर फंड ऑफ फंड्स हैं जो इंटरनेशनल फंड की यूनिट में निवेश करते हैं.

लेकिन ध्यान रहें ये बातें

निवेश के पहले फंड से जुड़े देश के साथ अगर कोई निगेटिव इश्यू यानी रिस्क जुड़ा है तो उसकी जानकारी लें. मसलन जिस देश की इक्विटी में आपका निवेश हैं और वहां जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ती है तो रिटर्न प्रभावित हो सकता है.

करंसी में होने वाले मूवमेंट का इनके रिटर्न पर असर पड़ता है. मसलन अगर रुपया मजबूत होता है तो इन फंड का रिटर्न घट सकता है. वहीं रुपये के कमजोर होने से इनका रिटर्न बढ़ सकता है.

आपको इन फंडों में निवेश करते समय कुल खर्चों पर नजर रखना भी जरूरी है.

क्या आपको करना चाहिए निवेश

BPN फिनकैप कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्‍टर एके निगम का कहना है कि इंटरनेशनल फंड के जरिए निवेशक विदेशी शेयर बाजारों में पैसा लगा सकते हैं. इससे निवेशकों को जियोग्राफिकल बेसिस पर भी अपना पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाई करने में मदद मिल जाती है. पिछले दिनों की बात करें तो रुपये में कमजोरी की वजह से भी इंटरनेशनल फंडों में अच्छा रिटर्न मिला. रुपये में गिरावट आने पर यह हेज के रूप में काम करते हैं. हालांकि निवेशकों को इन फंडों में 10 फीसदी से ज्यादा निवेश नहीं करना चाहिए. एक और बात का ध्यान रखना जरूरी है कि फंड जिस देश में निवेश करता है, निवेशकों को पैसा लगाने के पहले उस देश से जुड़े रिस्क को जानना जरूरी है.

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