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Mutual Funds: क्या होते हैं फ्लोटर फंड, हाई रिटर्न की उम्मीद में निवेशक लगा रहे हैं दांव

Floater Funds: म्यूचुअल फंड की कटेगिरी फ्लोटर फंड में निवेशकों का आकर्षण हाल में बढ़ा है.

March 1, 2021 4:21 PM
Floater FundsFloater Funds: म्यूचुअल फंड की कटेगिरी फ्लोटर फंड में निवेशकों का आकर्षण हाल में बढ़ा है.

Floater Funds: म्यूचुअल फंड की कटेगिरी फ्लोटर फंड में निवेशकों का आकर्षण हाल में बढ़ा है. एसोसिएशन आफ म्यूचुअल फंड्स आफ इंडिया यानी AMFI के आंकड़ों को देखें तो जनवरी में जहां निवेशकों ने डेट म्यूचुअल फंड से 33,408 करोड़ रुपये निकाले, फ्लोटर फंड में 3,128 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो रहा है. जनवरी में इक्विटी में भी निवेशकों ने बिकवाली की थी. असल में आगे ब्याज दरें बढ़ने की संभावना के साथ, स्मार्ट निवेशक म्यूचुअल फंड के फ्लोटर फंड में निवेश कर रहे हैं. इस श्रेणी में एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) मई 2020 में करीब 32,481 करोड़ रुपये की तुलना में बढ़कर जनवरी 2021 में 62,638 करोड़ रुपये हो गई है.

क्या होते हैं फ्लोटर फंड

फ्लोटर फंड फ्लोटिंग रेट इंस्ट्रूमेंट्स में अपनी कुल संपत्ति का कम से कम 65 फीसदी निवेश करते हैं. इन फंड्स को बढ़ रहे ब्याज दर के परिदृश्य में फायदा मिलता है. क्योंकि जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स पर कूपन को ऊपर की ओर समायोजित किया जाता है. भारतीय डेट मार्केट में फ्लोटिंग रेट इंस्ट्रूमेंट्स की कमी को देखते हुए, ये फंड आम तौर पर फिक्स्ड कूपन बॉन्ड में निवेश करते हैं. और फिक्स्ड रेट रिसीवेबल्स को फ्लोटिंग-रेट में बदलने के लिए ब्याज दर स्वैप जैसे डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स का इस्तेमाल करते हैं.

क्यों बढ़ सकता है रिटर्न

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर (इंडिया), इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी, धवल कपाड़िया का कहना है कि हाल के दिनों में, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दरों में लगातार कटौती और अन्य उपायों के बाद ब्याज दरें कई साल के लो पर हैं. आने वाले दिनों में आरबीआई द्वारा दिए जा रहे इस तरह के सपोर्ट में कटौती की संभावना हैं. इससे ब्याज दरों में बए़ोत्तरी देखने को मिल सकती है. इसी चिंता ने फ्लोटर फंड कटेगिरी के आकर्षण को बढ़ा दिया है. नतीजा यह है कि इस श्रेणी में पिछले 6-8 महीनों में आकर्षण बढ़ा है. गवर्नमेंट बॉरोइंग प्रोग्राम को लेकर हालिया बजट घोषणाओं ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चिंताओं को और बढ़ा दिया है.

फंड से कितना मिल रहा है रिटर्न

फ्लोटिंग रेट फंड AAA-रेटेड इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं. इस कटेगिरी में औसतन एक साल का रिटर्न 7.8 फीसदी रहा है. 2 साल का औसत रिटर्न 8.48 फीसदी और 3 साल के लिए औसत रिटर्न 8.19 फीसदी रहा है. मौजूदा समय की बात करें तो ये फंड नियर टर्म में और बेहतर रिटर्न दे सकते हैं.

MyWealthGrowth के को-फाउंडर हर्षद चेतनवाला का कहना है कि ट्रेडिशनली जब भी ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो फ्लोटर फंड का रिटर्न भी बढ़ जाता है. क्योंकि ये फंड मुख्य रूप से फ्लोटिंग रेट इंस्ट्रूमेंट में निवेश करते हैं. उनका कहना है कि आने वाली तिमाहियों में ब्याज दरों में धीरे-धीरे बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है, इसलिए ब्याज दर बढ़ने का लाभ फ्लोटर फंड को भी मिलेगा.

फंड और 1 से 3 साल का रिटर्न

फंड                                       1 साल      2 साल      3 साल        फंड साइज( jan 2021, Cr Rs)

Aditya BSL FRF                     6.98%      8.00%     8.04%        9684
फ्रैंकलिन इंडिया फ्लोटिंग रेट     5.60%       6.95%     7.11%         236
HDFC फ्लोटिंग रेट डेट            8.25%       8.51%     8.26%        16001
ICICI प्रू फ्लोटिंग इंटरेस्ट           9.04%       0.40%     8.78%        13323
कोटक फ्लोटिंग रेट                  8.49%        –             –                4721
निप्पॉन इंडिया FRF                  8.94%       9.55%     8.75%        16057
UTI फ्लोटर                            7.29%       8.45%      –                2538

(source: morningstar india)

निवेश के प​हले किन बातों का रखें ध्यान

फ्लोटर फंड एक नई श्रेणी हैं और वर्तमान में इसमें 8 फंड हैं. इस श्रेणी में ज्यादातर कॉरपोरेट्स और एचएनआई का वर्चस्व है, ऐसे में रिटेल निवेशकों को डिफाल्ट या क्रेडिट रिस्क को समझना चाहिए.

BellWether Advisors LLP के मैनेजिंग पार्टनर बृजेश दामोदरन का कहना है कि डेट स्कीमों में निवेश करते समय चाहे ये लिक्विड, फ्लोटर या ड्यूरेशन फंड्स हों, किसी निवेशक को उससे जुड़े जोखिम को देखना चाहिए. फ्लोटर फंड ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील होते हैं और इसलिए जब ब्याज दर में बदलाव होता है तो रिटर्न में उतार-चढ़ाव होता है.

चेतनवाला का कहना है कि फ्लोटर फंड से मिलने वाला रिटर्न आगे बढ़ने की उम्मीद है. लेकिन निवेश के पहले निवेशकों को फंड के पोर्टफोलियो को देखना चाहिए और उस फंड की क्वालिटी देखनी चाहिए. गिल्ट फंड को छोड़कर हर डेट फंड की तरह, यहां तक ​​कि फ्लोटर फंड भी सरकार के साथ निजी संस्थानों के डेट इंस्ट्रूमेंट में निवेश कर सकते हैं. इसलिए फ्लोटर फंड डिफॉल्ट या क्रेडिट रिस्क लेते हैं.

(लेखक: Saikat Neogi)

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