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एक्सपेंस रेश्यो: म्यूचुअल फंड में पुराना रिटर्न देख ना लगाएं पैसे, चेक करें निवेश की लागत; बढ़ जाएगा रिटर्न

Mutual Fund Investment Tips: म्यूचुअल फंड का एक्सपेंस रेश्यो ही यह तय करता है कि उस स्कीम में निवेश करना आपको सस्ता पड़ेगा या महंगा.

Updated: Apr 29, 2021 2:32 PM
Mutual Fund Investment TipsMutual Fund Investment Tips: म्यूचुअल फंड का एक्सपेंस रेश्यो ही यह तय करता है कि उस स्कीम में निवेश करना आपको सस्ता पड़ेगा या महंगा.

Mutual Fund Investment Tips: म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने के पहले आमतौर पर एक निवेशक की नजर सबसे पहले इस बात पर जाती है कि इस फंड का प्रदर्शन कैसा रहा है. लेकिन अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सोच रहे हैं तो सिर्फ फंड के अबतक के प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि उसके एक्सपेंस रेश्यो (Expense Ratio) यानी निवेश की लागत पर भी नजर डालिए. असल में फंड का एक्सपेंस रेश्यो ही यह तय करता है कि उस स्कीम में निवेश करना आपको सस्ता पड़ेगा या महंगा. एक्सपेंस रेश्यो का ज्यादा या कम होना आपके रिटर्न पर भी सीधे असर डालता है.

आपका निवेश मैनेज करने पर खर्च

म्यूचुअल फंड के प्रबंधन पर जो खर्च आता है, इसी खर्च का अनुपात एक्सपेंस रेश्यो कहलाता है. फंड को मैनेज करने के लिए फंड हाउसेज के तमाम खर्च होते हैं. फंड हाउस में प्रोफेशनल्स की टीम होती है जो मार्केट पर नजर रखती है. इसमें ट्रांसफर और रजिस्ट्रार से संबंधित खर्च भी शामिल होते हैं. एक्सपेंस रेश्यो एक सालाना फीस होती है. यह प्रति यूनिट आने वाले खर्च को दिखाता है. एक्सपेंस रेश्यो फंड हाउस द्वारा ली जा रही एक सालाना फीस होती है. इसलिए फंड में निवेश के वक्त एक्सपेंस रेश्यो देखें.

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एक्सपेंस रेश्यो से तय होता है असल रिटर्न

इसे ऐसे समझ सकते हैं कि आपने निवेश के लिए कोई म्यूचुअल फंड स्कीम चुनी है, जिसका एक्सपेंस रेश्यो 1.5 फीसदी है. वहीं, आपने इसमें 1 लाख रुपये निवेश किया है. इसका मतलब हुआ कि इस फंड के मैनेजमेंट के लिए आपको सालाना 1500 रुपये चुकाने होंगे. इसी तरह से अगर इस फंड ने कुल 12 फीसदी रिटर्न दिया तो आपको 10 फीसदी रिटर्न असल में मिलेगा.

वहीं अगर इसका एक्सपेंस रेश्यो 0.75 फीसदी होता तो आपको इसके मैनेजमेंट के लिए 752 रुपये सालाना फीस देनी होगी. वहीं इगर फंड ने 12 फीसदी रिटर्न दिया तो आपका असल रिटर्न 11.25 फीसदी होगा. यहां साफ है कि एक्सपेंस रेश्यो जितना ज्यादा होगा, आपका खर्च उतना ही ज्यादा बढ़ेगा.

(नोट: हालांकि यहां यह बात ध्यान देने की होती है कि कम या ज्यादा एक्सपेंस रेश्यो से रिटर्न की गारंटी नहीं तय होती है. कई बार ज्यादा एक्सपेंस रेश्यो वाले फंड कम एक्सपेंस रेश्यो वाले फंड के मुकाबले ज्यादा रिटर्न देते हैं.)

कम एक्सपेंस रेश्यो वाले बेहतर फंड

Axis फोकस्ड 25 फंड: 0.65%
Axis ब्लूचिप फंड: 0.46%
केनरा रोबेको इमर्जिंग इक्विटीज फंड: 0.87%
Axis मिडकैप फंड: 0.51%
Kotak इमर्जिंग इक्विटी फंड: 0.55%
Kotak स्मालकैप फंड: 0.60%
PGIM इंडिया मिडकैप अपॉर्चुनिटी फंड: 0.55%
मिरे एसंट लॉर्जकैप फंड: 0.54%
मिरे एसेट्स इमर्जिंग ब्लूचिप फंड: 0.92%
SBI स्मालकैप फंड: 0.93%

(source: Value Research)

कितना हो सकता है एक्सपेंस रेश्यो

पिछले दिनों मार्केट रेगुलेटर सेबी ने एक्सपेंस रेश्यो की सीमा तय की है. जिस म्यूचुअल फंड स्कीम का AUM 500 करोड़ रुपये है वे एक्सपेंस रेश्यो के रूप में अधिकतम 2.25 फीसदी चार्ज कर सकती हैं. इसी तरह 500-750 करोड़ रुपये AUM वाली स्कीम के लिए एक्सपेंस रेश्यो 2 फीसदी हो सकता है. 750-2000 करोड़ रुपये वाले फंड के लिए एक्सपेंस रेश्यो 1.75 फीसदी, 2000-5000 करोड़ AUM वाली स्कीम के लिए 1.6 फीसदी और 5000-10,000 करोड़ रुपये AUM वाले फंड के लिए एक्सपेंस रेश्यो 1.5 फीसदी हो सकता है.

सेबी के निर्देश के मुताबिक, 10-50,000 करोड़ AUM वाली स्कीम के लिए एक्सपेंस रेश्यो हर 5000 करोड़ रुपये बढ़ने के बाद 0.05 फीसदी कम होता चला जाएगा. अगर किसी म्यूचुअल फंड स्कीम का AUM 50,000 करोड़ से अधिक है तो उसके लिए AMC एक्सपेंस रेश्यो के रूप में 1.05 फीसदी चार्ज ले सकती हैं.

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