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Global Funds: क्या आपका निवेश भविष्य के लिए पर्याप्त है? नहीं है, तो ग्लोबल फंड दूर करेंगे टेंशन

Global Funds/Future Portfolio: हम तेजी के साथ ग्लोबलाइज्ड दुनिया की तरफ आगे बढ़ रहे हैं.

August 26, 2020 8:05 AM
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Global Funds/Future Portfolio: हम तेजी के साथ ग्लोबलाइज्ड दुनिया की तरफ आगे बढ़ रहे हैं. एक भारतीय उपभोक्ता के रूप में हम भारत के बाहर बनने वाली विभिन्न प्रकार की हाई क्वालिटी वाली वस्तुओं और सेवाओं का लाभ ले रहे है. लेकिन घरेलू स्तर पर उनका प्रोडक्शन नहीं होता है. मोबाइल से लेकर लग्जरी कारें तमाम ऐसे उदाहरण हैं, जो हम बाहर से ही इंपोर्ट करते हैं. दुनिया के किसी भी कोने में एक में एक से अधिक देशों या विश्व स्तर पर इस्तेमाल होने वाली कमोडिटी में अस्थिरता हमारे घरेलू पोर्टफोलियो में अस्थिरता लाती हैं. वह भू राजनीतिक जोखिम हो या पूरी तरह से अकल्पनीय कोरोना वायरस के प्रकोप।

रिस्क खत्म नहीं हो सकता

एक सवाल जो मुझसे बहुत बार पूछा जाता है कि निवेशकों को निवेश से जोखिम कैसे खत्म करना चाहिए? तथ्य यह है कि जोखिम को समाप्त नहीं किया जा सकता है, लेकिन विविधीकरण द्वारा कम किया जा सकता है. एसेट्स क्लास में निवेश विविधता और इसके भीतर के जोखिम का प्रबंधन भी महत्वपूर्ण है. एक निवेशक के रूप में आप सोच रहे होंगे कि आपके इक्विटी निवेश जैसे म्यूचुअल फंड, स्टॉक, पीएमएस भी काफी विविधतापूर्ण हैं.

ग्लोबल बाजारों का साइज बड़ा, मौके भी ज्यादा

क्या आपने इस बात पर विचार किया है कि भारत का बाजार पूंजीकरण 2 लाख करोड़ डॉलर है, जबकि शेष विश्व का बाजार पूंजीकरण 87 लाख करोड़ डॉलर है. इसलिए अगर आप भारत के बाहर ग्लोबल बाजारों में निवेश नहीं करते हैं, तो आप एक ऐसे अवसर की अनदेखी कर रहे हैं, जो लगभग 43 गुना बड़ा है.

इसके अलावा, विश्व स्तर पर कई तरह के इनोवेशन यानी नवाचार हो रहे हैं जो विभिन्न उद्योगों को बाधित कर हमारे जीवन को रोज प्रभावित कर रहे हैं और निवेश के लिहाज से काफी निहितार्थ होंगे. कुछ ऐसे ही ट्रेंड सामने उभरकर सामने आए हैं.

1. मोबाइल फोन: मोबाइल फोन की पहुंच बढ़ने के साथ ही मांग अर्थव्यवस्था में बढ़ोत्तरी हुई है. आज अपने मोबाइल का उपयोग करके आप कैब चला सकते हैं या नेटफ्लिक्स पर पसंदीदा शो देख सकते हैं या अपनी सुविधानुसार खाना ऑर्डर कर कर सकते हैं. यह होटल, कंटेंट प्रोवाइडर्स और दूसरे सर्विस प्रोवाइडर्स के बिजनेस मॉडल में बदलाव ला रहा है.

2. ई-कॉमर्स और ग्लोबल ब्रांड: ऑनलाइन शॉपिंग एक उभरता हुआ ट्रेंड है. इसके साथ ही ग्लोबल ब्रांड्स का भी उदय हुआ है. एक संपन्न परिवार के व्यक्ति के घरेलू ब्रांड की जगह पॉपुलर ग्लोबल ब्रांड की ओर आकर्षित ज्यादा होने की संभावना है.

3. कैशलेस सोसाइटी: कई तरह के ट्रांजेक्शंस ऑप्शन उभरकर सामने आए हैं. जैसे क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, पर्स, नेट बैंकिंग, विश्व स्तर पर नकदी का उपयोग हमारे दैनिक जीवन में कम हो रहा है.

4. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स: कंप्यूटर में शतरंज खेलने लेकर ड्राइवरलेस कार और सर्जरी करने वाले रोबोट तक ग्लोबल लेवल पर कुछ आकर्षक काम किए जा रहे हैं. अगर आपको लगता है कि आप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो दोबारा विचार करें गूगल मैप्स आपके सामने हैं. जोकि एक जीता जागता उदाहरण हैं, जिसे आप दैनिक जीवन में रोज इस्तेमाल कर रहे हैं.

5. हेल्थकेयर और थेरेप्युटिक्स: इस सेक्टर में प्रमुख इनोवेशन बीमारियों का पता लगाने और प्रबंधन को अधिक से अधिक सरल बना रहे हैं. हाल ही में एक चिप लांच की गई जो पेशेंट ब्लड शुगर लेवल 24X7 मॉनिटर करती रहती है. उसे जांचने की आवश्यकता को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है.

6. डाटा: जैसे ही कोई व्यक्ति डिजिटल दुनिया से जुड़ता है, वह मेल, ट्वीट, मैसेज, ऑनलाइन सर्फिंग के माध्यम से डाटा जेनरेट करना शुरू कर देता है. इस विशाल डाटा के स्टोर करने की काफी जरुरत है. इसलिए क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे न्यू उरा सॉल्यूशन सामने आ रहे हैं.

ग्लोबल फंड के क्या हैं लाभ

इस समय भारतीय शेयर बाजारों में बहुत कम डिस्रप्टिव इनोवेटर्स लिस्टेड हैं. यह भी नहीं है कि सभी काम अमेरिका में हो रहे हैं. चीन, यूरोप, मध्य पूर्व, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की कंपनियां कुछ अत्याधुनिक काम कर रही हैं. इसलिए अगर आप भविष्य के लिए रोमांचक विषयों में भाग लेना चाहते हैं तो ग्लोबल फंड के माध्यम से निवेश करने का एकमात्र विकल्प है.

ग्लोबल फंडों में निवेश करने से आपको रुपए में गिरावट का लाभ लेने में मदद मिलती है. पिछले 35 साल में रुपए में औसतन 6 फीसदी की गिरावट आई है. इसलिए अगर आप विदेश में अपनी बेटियों या बेटों की शिक्षा के लिए योजना बना रहे हैं, तो आपको आने वाले कुछ सालों में अपने अकाउंट को बढ़ाना होगा. विदेशों में एजुकेशन फीसदी में इजाफा देखने को मिल रहा है साथ रुपए में गिरावट भी देखने को मिल रही है. यह बात ध्यान देने वाली है कि रुपए में गिरावट आपके पक्ष में काम करती है, वहीं रुपए में बढ़ोतरी रिटर्न का एक हिस्से को हटा देती है.

इसके अलावा ग्लोबल फंड डेट टैक्सेशन के अधीन हैं. लाभ पर टैक्स अधिक हो सकता है. आपको लांग टर्म कैपिटल गेन के लिए 3 साल तक लगातार निवेश करने की जरुरत है. जैसा कि आप जोखिम को कम करने के बारे में सोचते हैं, आपका ध्यान मुख्य रूप से डाइवर्सिफिकेशन पर होना चाहिए और अपने पोर्टफोलियो में ग्लोबल फंड निश्चित रूप से जोड़ सकते हैं.

(लेखक: अजीत मेनन, सीईओ, पीजीआईएम इंडिया म्यूचुअल फंड)

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