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क्या फ्रैंकलिन संकट से दूसरे म्यूचुअल फंड पर होगा असर, निवेशकों को क्या करना चाहिए?

क्या फ्रैंकलिन संकट से दूसरे फंड पर असर होगा. ऐसे में निवेशकों को क्या करना चाहिए.

April 24, 2020 4:56 PM
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कोरोना वायरस महामारी से पैदा हुए लिक्विडिटी संकट के चलते देश के जाने माने म्युचुअल फंड हाउस फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया ने अपने 6 डेट फंड बंद कर दिए हैं. इसके साथ ही इन फंड में निवेशकों के करीब 26 हजार करोड़ रुपए अटक गए हैं. फ्रैंकलिन टेम्पलटन के इस फैसले के बाद से म्यूचुअल फंड के डेट कटेगिरी में निवेश करने वाले डरे हैं. उन्हें अपने फंड पर भी असर पड़ने का डर है. फ्रैंकलिन टेम्पलटन ने ये फंड बेहद कम लिक्विडिटी और यील्ड में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए बंद किए हैं. क्या फ्रैंकलिन संकट से दूसरे फंड पर असर होगा. ऐसे में निवेशकों को क्या करना चाहिए.

क्यों सामने आया संकट

सैमको सिक्युरिटीज के रिसर्च हेड-रैंक MF, ओमकेश्वर सिंह का कहना है कि कॉरपोरेट्स और हाई नेटवर्थ इन्वेस्टर्स का डेट फंड में निवेया ज्यादा होता है. लेकिन कोविड 19 के चलते लॉकडाउन की वजह से ज्यादातर कॉरपोरेट्स को लिक्विडिटी संकट का सामना करना पड़ रहा है. इसलिए कैश के लिए वे आक्रामक रूप से डेट म्यूचुअल फंड को भुना रहे हैं. हाई नेटवर्थ इन्वेस्टर्स भी इसी वजह से कैश निकाल रहे हैं.

क्या दूसरे फंड पर भी असर

ओमकेश्वर सिंह का कहना है कि फ्रेंकलिन टेम्प्लेटन रिडंप्शन के लिए फंड देने में सक्षम नही थीं. यानी, कंपनी निवेशकों की यूनिट को बेचने पर पैसा नहीं दे पा रही थी और इसलिए रिडम्पशन के दबाव में कंपनी ने 6 स्कीम को समेट लिया यानी बंद कर दिया. अब जैसे ही पैसा मिलेगा उसे यूनिट होल्डर्स के खाते में दे दिया जाएगा. उनका कहना है कि क्राइसिस की स्थिति में अधिक कर्ज जोखिम वाली सिक्युरिटीज में लिक्विडिटी का जोखिम हो सकता है. इन पर प्रतिकूल असर होगा.

बीएनपी कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर एके निगम का कहना है कि यहां यह बात ध्यान रखने वाली है कि ज्यादातर म्यूचुअल फंड भी अधिक जोखिम वाली कर्ज सिक्योरिटीज या ऐसी डेट स्कीम में निवेश से बचते हैं, जिनकी रेटिंग कम हो. इसलिए सभी डेट फंड निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है.

क्या करें निवेशक

  • रिटेल निवेशकों को डेट फंड में निवेश करते समय विवेकपूर्ण होना चाहिए. उन्हें सिर्फ पोर्टफोलियो की गुणवत्ता के लिए देखना चाहिए. निवेश करते समय फंड के पिछले प्रदर्शन, बड़े नामों और बड़े ब्रांडों की पूरी तरह से अनदेखी करनी चाहिए.
  • रैंकमएफ में अभी सिर्फ ओवरनाइट और लिक्विड फंडों के अलावा 5 श्रेणियों पर नजर रखनी चाहिए. मसलन मनी मार्केट फंड (1 साल तक के निवेश के लिए), शॉर्ट ड्यूरेशन फंड (1 से 3 साल के लिए निवेश के लिए), कॉर्पोरेट बांड फंड्स (किसी भी अवधि के लिए) पीएसयू और बैंकिंग फंड (किसी भी अवधि के लिए) और गिल्ट फंड (शॉर्ट से मिड टर्म के लिए). इसमें भी स्कीम हाई क्वालिटी वाली होनी चाहिए.
  • फिलहाल निवेशकों के पास कोई विकल्प नहीं है, लेकिन उन्हें लिक्विडिटी लौटने का इंतजार करना चाहिए.

ये 6 स्कीम बंद हुईं

फ्रैंकलिन ने जिन 6 स्कीम को बंद किया है उनमें फ्रैंकलिन इंडिया टेम्पलटन लो ड्यूरेशन फंड, फ्रैंकलिन इंडिया टेम्पलटन शॉर्ट बॉन्ड फंड, फ्रैंकलिन इंडिया टेम्पलटन शॉर्ट टर्म इनकम प्लान, फ्रैंकलिन इंडिया टेम्पलटन क्रेडिट रिस्क फंड, फ्रैंकलिन इंडिया टेम्पलटन डायनामिक एक्यूरियल फंड, फ्रैंकलिन इंडिया टेम्पलटन इनकम ऑपरच्यूनिटी फंड शामिल हैं. कंपनी का कहना है कि कोरोना संकट की वजह से लोगों ने तेजी से अपना पैसा निकाला है, जिससे कंपनी के पास कैश की कमी हुई है. रिडंप्शन का दबाव बढ़ने से अब इन सभी फंड की सिक्युरिटीज बेची जाएंगी. कंपनी का कहना है कि डेट फंड्स में रकम फंसने का डर बढ़ा है. कोरोना संकट के चलते दूसरे म्यूचुअल फंड पर भी दबाव बढ़ेगा. डेट फंड्स में नकदी का संकट बढ़ सकता है.

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