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Noida Property : नोएडा-ग्रेटर नोएडा में तेज हुई प्रॉपर्टी फ्री-होल्ड करने की मांग, यूपी सरकार को इसी महीने करना है इस पर फैसला

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी को लीज़-होल्ड की जगह फ्री-होल्ड करने की मांग लंबे समय से उठती रही है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को इस बारे में फैसला लेने के लिए 9 अक्टूबर तक की मोहलत दी थी.

Updated: Oct 05, 2021 9:54 PM
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी को फ्री-होल्ड करने के फैसले को जल्द मंजूरी दे सकती है यूपी सरकार

उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी को फ्री-होल्ड किए जाने पर फैसले का वक्त जैसे-जैसे करीब आ रहा है, इलाके के लोगों की तरफ से यह मांग जोर पकड़ रही है. इलाके के लोगों को उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश सरकार चुनावी माहौल में उनकी इस बरसों पुरानी मांग पर जरूर कोई सकारात्मक फैसला करेगी. होम ओनर्स के साथ ही साथ इलाके के डेवलपर भी प्रॉपर्टी को फ्री-होल्ड किए जाने के पक्ष में हैं.

दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 9 सितंबर को इस मसले पर हुई सुनवाई में राज्य सरकार को एक महीने में फैसला करने के लिए कहा था. कन्फेडरेशन ऑफ एनसीआर रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन यानी CONRWA ने जनहित याचिका दायर करके नोएडा में लीज होल्ड प्रॉपर्टी को फ्री होल्ड करने की मांग की थी. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार 9 अक्टूबर तक यह बता दे कि वह क्या फैसला करने जा रही है. बाद में 14 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कुछ और वक्त मांगते हुए कहा कि इस प्रस्ताव पर गंभीरता के साथ विचार किया जा रहा है. फिलहाल इस मामले में अक्टूबर के मध्य तक कोई ठोस फैसला लिए जाने के आसार हैं.

दस साल से अटकी प्रॉपर्टी फ्री-होल्ड करने की मांग

नोएडा में फ्री होल्ड प्रॉपर्टी की मांग पिछले दस साल से अटकी हुई है. फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन यानी FONRWA प्रॉपर्टी फ्री होल्ड करने पर नोएडा अथॉरिटी बोर्ड की मंजूरी ले चुका है. बोर्ड ने पहले 2018 और फिर 2020 में इसके लिए हामी भर दी थी. लेकिन राज्य सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी. नोएडा में रहने वालों का कहना है कि यहां लंबे समय से प्रॉपर्टी फ्री होल्ड करने की मांग की जा रही है लेकिन राज्य सरकार इस मामले को लटकाए हुए है.

‘दिल्ली में प्रॉपर्टी फ्री-होल्ड तो यहां क्यों नहीं?’

CONRWA के सेक्रेट्री और नोएडा एक्सप्रेस-व्यू अपार्टमेंट्स सेक्टर-93 रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सुजीत पांडे का कहना है कि नोएडा के अलावा दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में प्रॉपर्टी फ्री-होल्ड है, फिर यहां लोगों को इससे वंचित क्यों किया जा रहा है. आखिर 90 साल के बाद प्रॉपर्टी मालिक के बच्चों को क्या मिलेगा. अक्सर फ्री-होल्ड प्रॉपर्टी करने के खिलाफ एक तर्क दिया जाता है कि इससे पार्किंग की समस्या खड़ी हो सकती है, लेकिन यह लचर तर्क है. अच्छा होगा कि सरकार जल्द से जल्द नोएडा की प्रॉपर्टी फ्री-होल्ड करने के फैसले को मंजूरी दे दे. आखिर लोगों की खून-पसीने की कमाई पर उनका अधिकार हमेशा के लिए क्यों न हो?

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में घर खरीदने वाले लोगों की आम राय यही है कि प्रॉपर्टी फ्रीहोल्ड होने से उन तमाम लोगों को फायदा होगा, जो यहां घर खरीद चुके हैं या आने वाले दिनों में खरीदना चाहते हैं. इतना ही नहीं, इससे उन लोगों को भी आसानी होगी, जो नोएडा में अपनी प्रॉपर्टी बेचना चाहते हैं. नोएडा के सेक्टर 119 की हाउसिंग सोसायटी एल्डेको आमंत्रण के अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रॉनी दत्ता का कहना है कि अगर सरकार प्रॉपर्टी को फ्री-होल्ड करने का फैसला करती है, तो इलाके के होम ओनर्स उसका तहेदिल से स्वागत करेंगे.

खबर का असर : नोएडा-ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी ट्रांसफर चार्ज आधा हुआ, इंडस्ट्रियल प्लॉट में भी मिली राहत

रियल एस्टेट कंपनियां भी कर रही हैं फ्री-होल्ड का समर्थन

नोएडा के प्रमुख प्रॉपर्टी डेवलपर्स में शामिल अंतरिक्ष इंडिया ग्रुप के सीएमडी राकेश यादव का कहना है कि प्रॉपर्टी फ्री होल्ड किए जाने से लोगों को तीन बड़े फायदे होंगे. पहला फायदा यह कि घर खरीदारों के लिए प्रॉपर्टी बेचने के लिए ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया से निजात मिल जाएगी, जिसके लिए उन्हें अथॉरिटी में कई दिन तक चक्कर लगाने पड़ते हैं. इसी से जुड़ा दूसरा फायदा यह है कि उन्हें ट्रांसफर चार्ज देने से भी राहत मिलेगी. तीसरा और अहम फायदा प्रॉपर्टी पर मालिकाना अधिकार मिलने का है. जिसके चलते ओनर अपनी प्रॉपर्टी को आसानी से तीसरे पक्ष को बेच पाएगा. राकेश यादव के मुताबिक फ्री होल्ड होने पर प्रॉपर्टी की कीमत भी बढ़ती है, जिसका लाभ प्रॉपर्टी बेचने वालों को मिल सकता है.

नोएडा में रियल एस्टेट के कारोबार से जुड़े बी. एंटरप्राइजेज के मालिक भूपिंदर सिंह कालाकोटी का कहना है कि नोएडा की प्रॉपर्टी फ्री-होल्ड करने पर अथॉरिटी और राज्य सरकार को रेवेन्यू के लिहाज से कुछ घाटा तो हो सकता है. लेकिन सरकार चाहे तो इसकी भरपाई वनटाइम फ्री-होल्ड फीस लेकर कर सकती है.  दरअसल, लीज होल्ड सिस्टम में प्रॉपर्टी को बेचने और ट्रांसफर करने पर सरकार का नियंत्रण होता है. प्रॉपर्टी को ट्रांसफर किए जाने पर हर बार अथॉरिटी रजिस्ट्रेशन चार्ज और स्टांप ड्यूटी के अलावा ट्रांसफर चार्ज भी वसूलती है. मौजूदा नीति के तहत नोएडा में पुरानी प्रॉपर्टी 99 साल के लीज़ पर दी गई हैं, जबकि नई प्रॉपर्टी के लिए 90 साल की लीज़ दी जा रही है. नोएडा-ग्रेटर नोएडा में प्रॉपर्टी को फ्री-होल्ड किए जाने की मांग उठाने वालों की दलील है कि जब पड़ोस के गाजियाबाद समेत यूपी के तमाम इलाकों में फ्री-होल्ड पॉलिसी लागू है, तो सिर्फ नोएडा-ग्रेटर नोएडा के लिए अलग नीति क्यों लागू होनी चाहिए?

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