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सेबी के नए नियमों से मिडकैप, स्मालकैप में आएगी तेजी, ये 28 शेयर करा सकते हैं मोटी कमाई

Mid-Cap/Small-cap Idea: सेबी द्वारा मल्टीकैप म्यूचुअल फंड एसेट अलोकेशन के नियमों में बदलाव से मिडकैप व स्मालकैप में तेजी आएगी.

Updated: Sep 15, 2020 8:47 AM
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Mid-Cap/Small-cap Idea: मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड आफ इंडिया (SEBI) ने मल्टीकैप म्यूचुअल फंड के लिए एसेट अलोकेशन के नियमों में बदलाव किया है. नए नियमों के मुताबिक अब फंड हाउस को अपने कुल अलोकेशन का कम से कम 75 फीसदी हिस्सा इक्विटी रिलेटेड इंस्ट्रूमेंट में निवेश करना जरूरी होगा. SEBI के नए नियमों के मुताबिक अब फंड हाउस को 25-25 फीसदी हिस्सा मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश करना जरूरी है. जबकि लॉर्जकैप में भी 25 फीसदी ही हिस्सा निवेश करना होगा. एक्सपर्ट का कहना है कि सेबी के इस फैसले से निश्चित तौर पर आगे मिडकैप और स्मालकैप शेयरों में खरीददारी बढ़ने से तेजी आएगी.

बता दें कि इसके पहले फंड को सिर्फ 65 फीसदी निवेश इक्विटी में करना होता था. वहीं, लॉर्जकैप, मिडकैप और स्मालकैप में अलोकेशन की कोई निर्धारित सीमा नहीं थी. इससे फंड हाउस जोखिम से बचने के लिए ज्यादातर अलोकेशन लॉर्जकैप में कर रहे थे. जबकि स्माल​कैप में कई बार ना के बराबर निवेश होता था. कुछ मल्टीकैप में 80 फीसदी तक निवेश लार्ज कैप में था, कुछ स्कीम में स्मॉल कैप में निवेश शून्य या फिर बेहद कम था. इसे देखते हुए सेबी ने नियमों में बदलाव की जरूरत समझी.

अभी कैसे है अलोकेशन

ब्रोकरेज हाउस एमके ग्लोबल के अनुसार मौजूदा समय की बात करें तो मल्टीकैप स्कीम का कुल एयूएम 1.3 लाख करोड़ रुपये के आस पास है. इसमें से करीब 78 फीसदी अलोकेशन लॉर्जकैप में है. 16 फीसदी अलोकेशन मिडकैप में और 5 फीसदी अलोकेशन स्मालकैप में है. बचा हुआ इन्यू इंस्ट्रूमेंट में.

आगे मिडकैप और स्मालकैप में कितनी खरीददारी

एमके ग्लोबल की रिसर्च के अनुसार नए नियम के बाद अब इन स्कीम को स्मालकैप में 28000 करोउ़ की नई खरीददारी करनी होगी. वहीं इन्हें मिडकैप में 13500 करोड़ की खरीददारी करनी होगी. वहीं इन्हें लॉर्जकैप सेग्मेंट में करीब 41100 करोड़ की बिकवाली करनी होगी. ऐसा होने पर साफ है कि मिडकैप और स्मालकैप शेयरों में तेजी आएगी.

मिडकैप, स्मालकैप में निवेश बनाए रखना जरूरी

अभी मल्‍टीकैप स्‍कीम अपने हिसाब से मार्केट कैप चुनती हैं. सेफ्टी के लिए उनका फोकस लार्जकैप पर ही ज्यादा रहता है. वहीं, आगे मार्केट के उतार चढ़ाव या शेयरों में मूवमेंट के हिसाब से फंड मैनेजर के पास विकल्प रहता है और वे जरूरत के अनुसार पोर्टफोलियो में लार्ज, मिड और स्मॉलकैप शेयरों में निवेश घटाएं या बढ़ाएं. सेबी के नए नियमों के बाद ऐसा नहीं हो पाएगा. फंड मैनेजर को एक खास तरह के मार्केट कैप के शेयरों में निवेश को बनाए रखना होगा. चाहे उनका प्रदर्शन कैसा भी हो.

किन शेयरों में दिख सकती है तेजी

मिडकैप: वरुन बेवरेजेज, अशोक लेलैंड, मैक्स फाइनेंशियल, विनाती र्आर्गनिक्स, क्रॉम्पटन कंज्यूमर, SRF, पीआई इंडस्ट्रीज, एनएचपीसी, जेके सीमेंट, इप्का लैब, गुजरात स्टेट पेट्रोनेट, फेडरल बैंक, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट

स्मालकैप: अतुल आटो, इक्विटास होल्डिंग, डिक्सॉन, रेडिको खेतान, रैलीज, कल्पतरू पावर, KNR कंस्ट्रक्शन, जेके लक्ष्मी, CESC, Firstsource सॉल्यूशंस, ग्रेनुअल्स इंडिया, गल्फ आयल ल्यूब्रिकेंट्स, नवीन फ्लोरीन, परसिसटेंट सिस्टम

(नोट: हमने यहां ब्रोकरेज हाउस की रिपोर्ट के आधार पर जानकारी दी है. बाजार में जोखिम होते हैं, इसलिए निवेश के पहले अपने स्तर पर एक्सपर्ट से सलाह लें.)

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