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COVID-19 की वैक्सीन बनाने में जुटी हैं ये 6 भारतीय कंपनियां, बाजार में कब तक पहुंचेगी पहली खेप?

अमूमन वैक्सीन की टेस्टिंग जानवरों पर शुरू होती है. उसके बाद मनुष्यों पर टेस्टिंग से पहले कई स्तर पर लैब टेस्टिंग से गुजरना पड़ता है.

April 17, 2020 6:05 PM
these Six Indian companies are working on a vaccine for COVID-19वैक्सीन विकसित करना एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें कई साल लग जाते हैं और इस दौरान कई चुनौतियां भी झेलनी पड़ती है. (Representational Image: Reuters)

Vaccine for COVID-19: पूरी दुनिया आज कोरोनावायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) की विभीषिका झेल रही है. अभी तक इस बीमारी से निजात पाने की कोई दवा या वैक्सीन विकसित नहीं हो पाई है. दुनियाभर के कई देशों में रिसर्च चल रही है. अमेरिका, आस्ट्रेलिया, चीन, इजराइल समेत कई देश कोविड-19 के उपचार की एक मुक्कमल दवा/वैक्सीन विकसित करने में जुटे हैं. इसमें भारत भी पीछे नहीं है. छह भारतीय कंपनियां कोविड-19 के लिए वैक्सीन विकसित करने पर काम कर रही हैं. करीब 70 वैक्सीन कैंडिडेट्स पर टेस्ट किया जा रहा है. कम से कम तीन  टेस्ट मनुष्य पर क्लिनिकल ट्रॉयल के चरण में है, लेकिन फिर भी 2021 से पहले नोवल कोरोनावायरस की वैक्सीन बाजार में आ पाना मुमकिन नहीं लग रहा है.

ये 6 भारतीय कंपनियां कर रही रिसर्च

ट्रांजैशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, फरीदाबाद के कार्यकारी निदेशक गगनदीप कांग ने पीटीआई को बताया कि जायडस केडिला दो वैक्सीन बनाने पर काम कर रही है. जबकि सीरम इंस्टीट्यूट, बायोलॉजिकटल ई, भारत बायोटेक, इंडियन इम्यूनोलॉजिकल और मायनवैक्स एक-एक वैक्सीन डेवलप करने में जुटी हैं. उनका कहना है कि वैक्सीन विकसित करना एक जटिल प्रक्रिया है. इसे टेस्टिंग के कई चरण से गुजरना पड़ता है. इसमें कई चुनौतियां हैं. नए कोरोनावायरस SARS-CoV-2 के लिए वैक्सीन विकसित करने में 10 साल का समय नहीं लगेगा, जैसा अन्य वैक्सीन के मामले है, लेकिन कम से कम इसमें एक साल का समय लग सकता है. इसे बाजार में लाने से पहले सुरक्षित, प्रभावकारी और व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी.

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कोविड19 की वैक्सीन बनाने में गगनदीप कांग ने भारत की 6 कंपनियों के नाम बताए हैं. जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ग्लोबल कंवनियों की लिस्ट जो वैक्सीन बनाने में जुटी हैं, उनमें भारत से सिर्फ जायडस केडिला और सीरम इंस्टीट्यूट ही हैं.

वैक्सीन विकसित करना एक लंबी प्रक्रिया: RGCB

राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी (RGCB), केरल के चीफ साइंटिफिक अफसर ई. श्रीकुमार का कहना है कि वैक्सीन विकसित करना एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें कई साल लग जाते हैं और इस दौरान कई चुनौतियां भी झेलनी पड़ती है. CSIR-सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलीक्युलर बॉयोलॉजी (CCMB), हैदराबाद के डायरेक्टर राकेश मिश्रा का कहना है कि, आमतौर पर वैक्सीन विकसित करने में टेस्टिंग के कई चरण होते हैं. इसमें महीनों का समय लगता है. कोविड-19 के मामले में इस साल वैक्सीन आने की उम्मीद नहीं लगती है. अमूमन वैक्सीन की टेस्टिंग जानवरों पर शुरू होती है. उसके बाद मनुष्यों पर टेस्टिंग से पहले कई स्तर पर लैब टेस्टिंग से गुजरना पड़ता है.

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