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TCS Share Buyback: टीसीएस में कमाई का मौका, 18 दिसंबर को खुल रहा है 16000 करोड़ का आफर

TCS Share Buyback: देश की सबसे बड़ी इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयर बॉय बैक आफर की डेट आ गई है.

December 10, 2020 8:55 AM
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TCS Share Buyback: देश की सबसे बड़ी इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयर बॉय बैक आफर की डेट आ गई है. टीसीएस के 16 हजार करोड़ का शेयर बॉयबैक आफर 18 दिसंबर को खुलेगा और 1 जनवरी 2021 को बंद होगा. बता दें कि पिछले महीने टीसीएस के शेयर होल्डर्स ने शेयर बॉयबैक प्रोग्राम को मंजूरी दी थी. टीसीएस निवेशकों से 5,33,33,333 शेयर बॉयबैक करेगी. टीसीएस के मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर देखें तो इस बॉयबैक प्रोग्राम पर टीसीएस एमकैप का करीब 1.5 फीसदी खर्च करेगी.

3000 रुपये प्रति शेयर पर होगा बॉयबैक

टीसीएस शेयरधारकों से 5.3 करोड़ शेयर 3000 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बॉयबैक करेगी. साफ है कि निवेशकों को इस आफर में हिस्सा लेकर अच्छी कमाई करने का मौका है. अभी शेयर का भाव 2800 रुपये के आस पापस चल रहा है. टीसीएस ने रेगुलेटरी फाइलिंग में कहा है कि शेयर बॉयबैक के लिए रिकॉर्ड डेट 28 नवंबर है. नवंबर लास्ट में शेयर का भाव 2700 रुपये था. स्टॉक एक्सचजेंस पर बिड्स सेंटलमेंट की अंतिम तारीख 12 जनवरी 2021 है. पिछले दिनों टीसीएस मैनेजमेंट ने कहा था कि हमारा उद्देश्य है कि कंपनी को होने वाले लाभ का फायदा शेयर होल्डर्स को भी हो.

क्या होता है शेयर बायबैक

कंपनी जब अपने ही शेयर निवेशकों से खरीदती है तो इसे बायबैक कहते हैं. आप इसे आईपीओ का उलट भी मान सकते हैं. बायबैक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन शेयरों का वजूद खत्म हो जाता है. बायबैक के लिए मुख्यत: दो तरीकों-टेंडर ऑफर या ओपन मार्केट का इस्तेमाल किया जाता है.

कंपनियां क्यों करती हैं बायबैक

इसकी सबसे बड़ी वजह कंपनी की बैलेंसशीट में अतिरिक्त नकदी का होना है. कंपनी के पास बहुत ज्यादा नकदी का होना अच्छा नहीं माना जाता है. इससे यह माना जाता है कि कंपनी अपने नकदी का इस्तेमाल नहीं कर पा रही है. शेयर बायबैक के जरिए कंपनी अपने अतिरिक्त नकदी का इस्तेमाल करती है. कई बार कंपनी को यह लगता है कि उसके शेयर की कीमत कम है (अंडरवैल्यूड) तो वह बायबैक के जरिए उसे बढ़ाने की कोशिश करती है.

क्या है प्रक्रिया

सबसे पहले कंपनी का बोर्ड शेयर बायबैक के प्रस्ताव को मंजूरी देता है. इसके बाद कंपनी बायबैक के लिए कार्यक्रम का एलान करती है. इसमें रिकार्ड डेट और बायबैक की अवधि का जिक्र होता है. रिकॉर्ड डेट का मतलब यह है कि उस दिन तक जिन निवेशकों के पास कंपनी के शेयर होंगे, वे बायबैक में हिस्सा ले सकेंगे. बायबैक का कंपनी और उसके शेयर पर कई तरह से असर पड़ता है. शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिए मौजूद कंपनी के शेयरों की संख्या घट जाती है. इससे प्रति शेयर आय (ईपीएस) बढ़ जाती है. शेयर का पीई भी बढ़ जाता है. इससे कंपनी के कारोबार में कोई बदलाव नहीं आता है.

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