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9 टैक्स जो शेयर बाजार में घटा देते हैं आपका मुनाफा, जान लें इनका पूरा गणित

टैक्स जो शेयर बाजार से होने वाला मुनाफा कर देते हैं कम

Published: August 23, 2019 10:55 AM
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शेयर बाजार ऐसी जगह है, जहां सही जानकारी के साथ निवेश किया जाए तो आपका पैसा दूसरे किसी भी निवेश की तुलना में तेजी से बढ़ सकता है. हालांकि ऐसे कुछ टैक्स हैं, जो आपके होने वाले वास्तविक मुनाफे पर असर डालते हैं. यह असर डायरेक्टर और इनडज्ञयरेक्ट दोनों तरह से हो सकता है. हमनें यहां ऐसे ही 8 टैक्स के बारे में जानकारी दी है जो शेयर बाजार से होने वाला मुनाफा कम कर देते हैं.

आमतौर पर लोगों को डायरेक्ट टैक्स और डायरेक्ट टैक्स चुकाने पड़ते हैं. डायरेक्ट टैक्स जैसे इनकम टैक्स या कॉरपोरेट टैक्स. इनडायरेक्ट टैक्स जैसे GST. इनमें से कुछ टैक्स केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाता है, जबकि कुछ टैक्स राज्य सरकारें लगाती हैं. शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों को इन दोनों तरह के टैक्स से गुजरना पड़ता है. ऐसे में ये अलग अलग टैक्स निवेशकों का शेयर बाजार से होने वाला मुनाफा घटा देते हैं.

डायरेक्ट इंपैक्ट

जब कोई निवेशक शेयर बाजार में ट्रेड करता है तो उसे कुछ मैनेडेटरी चार्ज मसलन ब्रोकरेज चार्ज, ट्रांजैक्शन एंड टर्नओवर चार्ज देने पड़ते हैं. बाजार में ट्रेड करने वालों को कुछ टैक्स मसलन STT/CTT और स्टांप ड्यूटी देनी पड़ती है. इसके अलावा निवेशकों को अपनी कुल इनकम पर कैपिटल गेन टैक्स भी चुकाना पड़ता है.

क्या है कैपिटल गेन्स टैक्स : इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत कैपिटल गेन्स टैक्स का प्रावधान है. यह पीरियड आफ होल्डिंग के आधार पर लांग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG) और दूसरा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (STCG) में विभाजित है.

LTCG पर टैक्सेशन आमतौर पर STCG की तुलना में कम होता है, क्योंकि सरकार लांग टर्म इन्वेस्टिंग कसे बढ़ावा देना चाहती है. STCG टैक्सेशन इस बात पर भी निर्भर करता है कि कोई बिजनेस आफ ट्रेडिंग में है या नहीं. क्या इनकम स्पेक्युलेटिव (यानी इंट्राडे ट्रेडिंग) या नॉन स्पेक्युलेटिवगैर (यानी एफएंडओ) सोर्सेज से आ रही है.

STT/CTT: सिक्युरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स या कमोडिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स एक तरह का डायरेक्ट टैक्स है. यह स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से लेनदेन के कुल कारोबार पर लगाया जाता है. इन्हें ऑफ-मार्केट ट्रांजैक्शन पर नहीं लगाया जाता है.

स्टांप ड्यूटी: यह राज्य सरकारों द्वारा तय और वसूला जाता है, जहां ट्रेडिंग होती है.

इन डायरेक्ट टैक्स

स्टॉक मार्केट में लिस्टेड संस्थाओं के शेयरों में ट्रेडिंग होती है, जो विभिन्न इंडस्ट्रीज में काम कर रही है. इन कंपनियों के शेयरधारक के रूप में, आप खुद कंपनी के हिस्से के मालिक हैं. इसलिए कंपनी द्वारा भुगतान किया गया कोई भी कर आपकी जेब से अप्रत्यक्ष रूप से चुकाया जाने वाला कर है. कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले टैक्स इस तरह से हैं.

कॉरपोरेट टैक्स: कंपनियों को अर्जित की जाने वाली इनकम यानी कॉरपोरेट इनकम पर टैक्स देना होता है जो कॉरपोरेट टैक्स के रूप में जाना जाता है.

डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स(DDT): डीडीटी का भुगतान तब किया जाता है जब कंपनियां डिविडेंड के रूप में अपने शेयरधारकों को अपने लाभ को डिस्ट्रीब्यूट करने का निर्णय लेती हैं. यह शेयरधारकों को भुगतान किए गए डिविडेंड को कम कर देता है, जो शेयर बाजार में कई निवेशकों के लिए कमाई का एक प्रमुख स्रोत है.

डिविडेंड टैक्स: डिविडेंड पाने वालों पर अतिरिक्त कर लगाया जाता है, जो 10 पति वर्ष लाख रुपये से अधिक में डिविडेंड पाता है.

बॉय-बैक टैक्स: यूनियन बजट में DDT के बराबर एक बॉय-बैक टैक्स पेश किया, जो कि बाय-बैक का विकल्प चुनने वाले निवेशकों के आय को कम करेगा.

(लेखक: अमित गुप्ता, CEO और को फाउंडर, TradingBells)

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